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UP Election 2022: देवरिया की सभी सीटों पर सियासत और विरासत बचाने की जंग, पूर्व मंत्री और विधायकों की सियासत दांव पर

Sun, 20 Feb 2022 09:25 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Sun, 20 Feb 2022 09:25 AM IST
सार

कृषि मंत्री व पूर्व मंत्री के प्रत्याशी होने के कारण जिले के लिए वीआईपी सीट मानी जाने वाली पथरदेवा विधानसभा सीट से परवेज आलम बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। पिता स्व. शाकिर अली पथरदेवा से सपा विधायक थे और मंत्री भी रह चुके हैं। जबकि दूसरी तरफ प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही विधायक हैं।

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UP Election 2022 battle to save politics and heritage in all seats of Deoria
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवरिया जिले में विधानसभा चुनाव की रणभेरी के बीच जनपद की सभी सीटों पर दिग्गज नेताओं की सियासत दांव पर है तो कई प्रत्याशियों ने विरासत संभालने के लिए ताकत झोंक दी है। पूर्व विधायकों के पुत्र पिता की कुर्सी पाने के लिए मतदाताओं के चौखट पर पहुंच रहे हैं। पर यह दस मार्च को पता चलेगा कि कौन पिता की राजनीतिक जमीन को बचाने में सफल होगा। जबकि प्रदेश की सियासत में बड़े नामों में शुमार अपनी सियासत की चटक रंग को कायम रखने के लिए पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं।

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तीन मार्च को मतदान होने हैं। तारीख अब नजदीक है। इसको देखते हुए प्रत्याशी दौड़ लगानी तेज कर दिए हैं। सियासत और विरासत की जंग पर नजर डाली जाए तो विभिन्न दलों से पांच पूर्व विधायक के बेटे चुनावी मैदान में हैं। इसमें सलेमपुर और बरहज के कई बार विधायक व मंत्री रहे पंडित दुर्गा मिश्र की पहचान प्रदेश के कद्दवार नेताओं में थी।
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इस बार के चुनाव में बरहज विधानसभा क्षेत्र से उनके पुत्र भागलपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख दीपक मिश्र शाका भाजपा के प्रत्याशी हैं। उनके सामने बसपा के पूर्व विधायक राम प्रसाद जायसवाल के पुत्र मुरली मनोहर जायसवाल सपा उम्मीदवार हैं। दोनों लोग पिता की तरह विधायक बनने का सपना सजोएं हैं।
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सदर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक जन्मेजय सिंह के पुत्र अजय प्रताप सिंह पिंटू दूसरी बार चुनाव मैदान हैं। पिता के निधन के बाद उप चुनाव में लड़े थे, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इस बार सपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में हैं। दूसरी तरफ प्रदेश की सियासत में अलग पहचान रखने वाले मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी भाजपा प्रत्याशी हैं। यहां भी सियासत और विरासत की जंग देखने को मिल रही है।

 

वीआईपी सीट पथरदेवा विधानसभा सीट

कृषि मंत्री व पूर्व मंत्री के प्रत्याशी होने के कारण जिले के लिए वीआईपी सीट मानी जाने वाली पथरदेवा विधानसभा सीट से परवेज आलम बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। पिता स्व. शाकिर अली पथरदेवा से सपा विधायक थे और मंत्री भी रह चुके हैं। जबकि दूसरी तरफ प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही विधायक हैं।

वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्जगज नेता एवं पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर तिवारी मैदान में हैं। दोनों लोग सियासत में धमक कायम रखने के लिए पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं तो वहीं परवेज पिता की राजनीतिक जमीन पर कायम होना चाहते हैं। भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक आशुतोष उपाध्याय हैट्रिक लगाने की आस में है। पिता कामेश्वर उपाध्याय के निधन के बाद दो बार विधायक बन चुके हैं।

इस बार भी विरासत को कायम रखते हुए चुनाव ताल ठोक रहे हैं। जबकि राजनीति में कई वर्षों से सक्रिय रहने वाले सभाकुंवर कुशवाहा भाजपा से मैदान में  हैं। जो सियासत में अपने आप को कायम करने के लिए पसीना बहा रहे हैं। रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र और सलेमपुर से विधायक रही फसीहा मंजर गजाला लारी सपा से मैदान में हैं। जो राजनीति की जमी खिलाड़ी हैं।

वहीं बसपा से पुष्पा शाही हैं, जिनके पति निर्दल चुनाव लड़ कर अच्छा वोट पा चुके हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। जबकि भाजपा से सुरेंद्र चौरसिया उम्मीदवार हैं। पहली बार विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं। इसी सीट से पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा भी जनधिकार पार्टी से ताल ठोक रहे हैं। जो सदर विधाससभा सीट से विधायक रह चुके हैं।

 


 

रूद्रपुर विधानसभा सीट

रूद्रपुर विधानसभा की सीट पर सबसे अधिक सियासत में कायम रखने का नजारा देखने को मिल रहा है। यहां पर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद भाजपा प्रत्याशी हैं। बसपा प्रत्याशी सुरेश तिवारी हैं, जो रुद्रपुर के विधायक रह चुके हैं और इस समय बरहज के विधायक भी। अपने पुरानी सीट पर एक फिर से काबिज होने के लिए वोटरों तक दौड़ लगा रहे हैं।

सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद हैं। जो पहली बार इस विधाससभा क्षेत्र से मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी अखिलेश प्रताप सिंह हैं। जो  2012 में रूद्रपुर के विधायक बने थे और दूसरी बार 2017 में भी सपा और कांग्रेस गठबंधन से चुनाव लड़े थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। सलेमपुर सुरक्षित सीट से सुभाषपा से पूर्व विधायक मनबोध प्रसाद मैदान में हैं। जबकि भाजपा ने विजय लक्ष्मी गौतम को मैदान में उतारा है। जो सलेमपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं।
 

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