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गोरखपुर: एम्स को मिले केवल छह वालंटियर, कोवा-वैक्स का ट्रायल शुरू

Sun, 11 Jul 2021 10:44 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 11 Jul 2021 10:44 AM IST
सार

100 वालंटियरों की थी तलाश, कम समय होने की वजह से नहीं मिले। एम्स, आरएमआरसी और आईसीएमआर की देखरेख में हो रहा ट्रायल।  
 

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Trial of Covid Vaccine Cova Vax started in Gorakhpur AIIMS with only six volunteers due to shortage of time
AIIMS Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अमेरिका की कंपनी नोवा वैक्स इंक की कोविड वैक्सीन कोवा-वैक्स के ट्रायल के लिए केवल छह वालंटियर ही मिल सके। सभी वालंटियर युवा हैं। इनको कोवा-वैक्स की डोज दी गई है। अब एम्स इनके स्वास्थ्य की लगातार छह माह तक लगातार निगरानी करेगा। कोवा-वैक्स वैक्सीन का यह तीसरे फेज का ट्रायल है। इसमें 100 लोगों पर ट्रायल होना था। लेकिन ट्रायल के लिए केवल आठ दिन का समय होने के कारण वांलिटयर नहीं मिल सके। एम्स के साथ आरएमआरसी (रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) भी ट्रायल में शामिल हैं।
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जानकारी के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और आईसीएमआर (इंडियन मेडिकल रिसर्च सेंटर) ने अमेरिका की नोवा वैक्स इंक की कोविड वैक्सीन कोवा-वैक्स के भारत में ट्रायल का फैसला लिया है। इसके लिए देश के 23 संस्थान चुने गए हैं। इनमें एम्स गोरखपुर और आरएमआरसी गोरखपुर भी है।
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कार्यक्रम की शुरुआत 30 जून से की गई और वालंटियर की तलाश के लिए आठ जुलाई तक का समय दिया गया। समय कम होने की वजह से केवल छह वालंटियर ही मिल पाए। इनकी उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच है। बताया जा रहा है कि वैक्सीन की पहली डोज लगाने के 21 दिन बाद वांलटियरों को दूसरी डोज लगाई जाएगी। इस बीच छह माह तक एम्स प्रशासन वालंटियर के स्वास्थ्य पर नजर रखेगा। आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि जो भी वालंटियर ट्रायल में शामिल है वह कभी कोरोना संक्रमित नहीं हुआ है। उसे कोई भी वैक्सीन नहीं लगाई गई है। ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है। इसकी वजह से कम वालंटियर मिले हैं।
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अमेरिका और इंग्लैंड में 89.7 फीसदी कारगार पाई गई है वैक्सीन

डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि अमेरिका और इंग्लैंड में इस वैक्सीन के दो फेज का ट्रायल हो चुका है। यह वैक्सीन 89.7 फीसदी कारगर पाई गई है। यह बेहद सुरक्षित और असरदार है। तीसरे फेज का ट्रायल देश के 23 संस्थानों में हो रहा है। बताया कि यह वैक्सीन कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन को प्यूरिफाइड करके तैयार की गई है। ऐसे में यह ज्यादा असरदार है। अमेरिका और इंग्लैंड में यह वैक्सीन दूसरे फेज के ट्रायल के बाद ही लगाई जा रही है।
 
आरएमआरसी के सीनियर वैज्ञानिक डॉ अशोक पांडेय ने बताया कि एम्स और आरएमआरसी ने मिलकर अमेरिका की नोवा वैक्स इंक की कोविड वैक्सीन कोवा-वैक्स का ट्रायल शुरू कर दिया है। छह वालंटियरों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई है। 21 दिन बाद उन्हें दूसरी डोज लगाई जाएगी। दो फेज का ट्रायल अमेरिका और इंग्लैंड में हो चुका है। यहां तीसरे फेज का ट्रायल चल रहा है।  
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