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Gorakhpur News: नुसरत-अंजलि पर पड़ी यशोदा की नजर तो संवर गई जिंदगी
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रेलवे स्टेशन के पास सड़क पर अलग-अलग जगहों पर लावारिस मिली थीं दोनों मासूम
चार साल दोनों लड़कियां स्टेशन पर मांगती थीं भीख, एशिन सहयोगी संस्था ने अपनाया फिर विदेशी महिलाओं ने लिया गोद
स्पेन में नुसरत और न्यूजीलैंड में अंजली का सबसे अच्छे कॉलेज में उनकी प्रतिभा पर फ्री में मिला प्रवेश
अनुराग पांडेय
गोरखपुर। घरवालों ने बोझ समझकर दो मासूमों को रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया। पेट की भूख मिटाने को चार साल की उम्र से भीख मांगने लगीं। इसी दौरान दोनों मासूमों को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी (सीडब्ल्यूसी) ने एशियन सहयोगी संस्था इंडिया में आसरा दिलाया। फिर स्पेन और न्यूजीलैंड से भारत घूमने आईं दो महिलाओं का आंचल इन पर पड़ा। दोनों महिलाएं मां यशोदा की भूमिका में आ गईं और इनका सहारा पाकर अब दोनों बेटियों की जिंदगी संवर गई।
यह कहानी है रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाली दो मासूम नुसरत और अंजली की। नुसरत अब स्पेन में पढ़ती है और कक्षा में अव्वल है, जबकि अंजली न्यूजीलैंड में पढ़ रही है। वह तैराकी और घुड़सवारी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
दोनों की कहानी बेहद दिलचस्प है। आरपीएफ को 10 जून 2013 को चार वर्ष की नुसरत लावारिस हालत में भीख मांगते हुए मिली थी। वह अपने या परिवार के बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी। आरपीएफ ने अखबार में फोटो का इश्तेहार में देकर परिजनों को खोजने का प्रयास किया। जब कोई नहीं आया, तब उन्हें एशियन सहयोगी संस्था में रखवाया गया। वहां से 22 दिसंबर को 2016 को दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण नई दिल्ली के माध्यम से स्पेन की नोएल व एलिजा ने कानूनी रूप से नुसरत को गोद लिया। वर्तमान में नुसरत स्पेन की भाषा बोलने लगी है, वहां शिद्दत से पढ़ाई कर हर वर्ष कक्षा में अव्वल आती रही है।
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वर्तमान में नुसरत के अच्छे प्रदर्शन की वजह से स्पेन के सबसे अच्छे स्कूल में उसे फ्री में नौंवी कक्षा में दाखिला मिला है। अभी भी नुसरत एशियन सहयोगी संस्था के नंबर पर वीडियो कॉल कर अपने दोस्तों और संस्था के सदस्यों से बातचीत कर हाल-चाल लेती रहती है।
न्यूजीलैंड में अंजली दिखा रही प्रतिभा
सीडब्ल्यूसी ने 29 मई 2013 में रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिली दो वर्ष की अंजली को एशियन सहयोगी संस्था में भेजा गया था। अंजली का फोटो के साथ अखबार में इश्तेहार दिया गया, लेकिन उसे कोई लेने नहीं आया। संस्था द्वारा थोड़ी बड़ी होने पर अंजली काे एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला दिलाया गया। जहां पर उसकी पढ़ाई और प्रतिभा देखकर शिक्षक भी हैरान थे। इसी बीच आठ अगस्त 2019 को दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण नई दिल्ली के माध्यम से न्यूजीलैंड की सिंगल मदर मारिया ने अंजली को गोद लिया और अपने देश लेकर चली गईं। अंजली के टैलेंट की बदौलत उसे न्यूजीलैंड के आकलैंड शहर स्थित बैराडीन कॉलेज ऑफ द सैक्रेट हार्ट में फ्री में दाखिला मिला है। वहां स्कूली प्रतियोगिता तैराकी, घुड़सवारी में भी उसने अच्छा प्रदर्शन कर मेडल जीता है।
वर्जन
दोनों बच्चियों की उपलब्धि देखकर अच्छा लगता है। दोनों ही बहुत टैलेंटेड थीं। अब न्यूजीलैंड और स्पेन भी अच्छा प्रदर्शन कर परिवार का मान बढ़ा रही हैं। हमेशा बात होती रहती है, अपनी दोस्तों से भी वीडियो कॉल कर दोनों बातें करती हैं।
-उषा दास, एडमिन डाएरेक्टर, एशियन सहयोगी संस्था
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चार साल दोनों लड़कियां स्टेशन पर मांगती थीं भीख, एशिन सहयोगी संस्था ने अपनाया फिर विदेशी महिलाओं ने लिया गोद
स्पेन में नुसरत और न्यूजीलैंड में अंजली का सबसे अच्छे कॉलेज में उनकी प्रतिभा पर फ्री में मिला प्रवेश
अनुराग पांडेय
गोरखपुर। घरवालों ने बोझ समझकर दो मासूमों को रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया। पेट की भूख मिटाने को चार साल की उम्र से भीख मांगने लगीं। इसी दौरान दोनों मासूमों को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी (सीडब्ल्यूसी) ने एशियन सहयोगी संस्था इंडिया में आसरा दिलाया। फिर स्पेन और न्यूजीलैंड से भारत घूमने आईं दो महिलाओं का आंचल इन पर पड़ा। दोनों महिलाएं मां यशोदा की भूमिका में आ गईं और इनका सहारा पाकर अब दोनों बेटियों की जिंदगी संवर गई।
यह कहानी है रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाली दो मासूम नुसरत और अंजली की। नुसरत अब स्पेन में पढ़ती है और कक्षा में अव्वल है, जबकि अंजली न्यूजीलैंड में पढ़ रही है। वह तैराकी और घुड़सवारी में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
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दोनों की कहानी बेहद दिलचस्प है। आरपीएफ को 10 जून 2013 को चार वर्ष की नुसरत लावारिस हालत में भीख मांगते हुए मिली थी। वह अपने या परिवार के बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी। आरपीएफ ने अखबार में फोटो का इश्तेहार में देकर परिजनों को खोजने का प्रयास किया। जब कोई नहीं आया, तब उन्हें एशियन सहयोगी संस्था में रखवाया गया। वहां से 22 दिसंबर को 2016 को दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण नई दिल्ली के माध्यम से स्पेन की नोएल व एलिजा ने कानूनी रूप से नुसरत को गोद लिया। वर्तमान में नुसरत स्पेन की भाषा बोलने लगी है, वहां शिद्दत से पढ़ाई कर हर वर्ष कक्षा में अव्वल आती रही है।
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वर्तमान में नुसरत के अच्छे प्रदर्शन की वजह से स्पेन के सबसे अच्छे स्कूल में उसे फ्री में नौंवी कक्षा में दाखिला मिला है। अभी भी नुसरत एशियन सहयोगी संस्था के नंबर पर वीडियो कॉल कर अपने दोस्तों और संस्था के सदस्यों से बातचीत कर हाल-चाल लेती रहती है।
न्यूजीलैंड में अंजली दिखा रही प्रतिभा
सीडब्ल्यूसी ने 29 मई 2013 में रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिली दो वर्ष की अंजली को एशियन सहयोगी संस्था में भेजा गया था। अंजली का फोटो के साथ अखबार में इश्तेहार दिया गया, लेकिन उसे कोई लेने नहीं आया। संस्था द्वारा थोड़ी बड़ी होने पर अंजली काे एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला दिलाया गया। जहां पर उसकी पढ़ाई और प्रतिभा देखकर शिक्षक भी हैरान थे। इसी बीच आठ अगस्त 2019 को दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण नई दिल्ली के माध्यम से न्यूजीलैंड की सिंगल मदर मारिया ने अंजली को गोद लिया और अपने देश लेकर चली गईं। अंजली के टैलेंट की बदौलत उसे न्यूजीलैंड के आकलैंड शहर स्थित बैराडीन कॉलेज ऑफ द सैक्रेट हार्ट में फ्री में दाखिला मिला है। वहां स्कूली प्रतियोगिता तैराकी, घुड़सवारी में भी उसने अच्छा प्रदर्शन कर मेडल जीता है।
वर्जन
दोनों बच्चियों की उपलब्धि देखकर अच्छा लगता है। दोनों ही बहुत टैलेंटेड थीं। अब न्यूजीलैंड और स्पेन भी अच्छा प्रदर्शन कर परिवार का मान बढ़ा रही हैं। हमेशा बात होती रहती है, अपनी दोस्तों से भी वीडियो कॉल कर दोनों बातें करती हैं।
-उषा दास, एडमिन डाएरेक्टर, एशियन सहयोगी संस्था