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Gorakhpur News: ऐसी क्या हुई तकरार कि...नोकझोंक करने लगे अफसर और थानेदार, अतिक्रमण हटवाने गई थी टीम
Tue, 20 May 2025 01:38 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुऱ
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुऱ
Published by: रोहित सिंह
Updated Tue, 20 May 2025 01:38 PM IST
सार
सोमवार को नायब तहसीलदार हंसराज, एनएचएआई के भूमि अधिग्रहण अधिकारी चंद्रशेखर, थाना प्रभारी पीपीगंज प्रभु दयाल सिंह और कार्यदाई संस्था पीएनसी इंफ्राटेक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सड़क के पूर्वी हिस्से से अतिक्रमण हटाने का काम दोपहर करीब एक बजे से शुरू हुआ। इस टीम को जोखई, नोखई, गंगा, मुन्ने सहित करीब 21 लोगों के घरों को तोड़ना था।
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अतिक्रमण हटाने गई टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
गोरखपुर-सोनौली फोरलेन हाईवे निर्माण के लिए जंगल कौड़िया के रायपुर गांव में सोमवार को अतिक्रमण हटवाने गए एनएचएआई के अफसर और पीपीगंज पुलिस के बीच नोंकझोंक हो गई। एक महिला के घर को लेकर हुई तकरार में पुलिस भारी पड़ी।
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इस दौरान 6 से 7 लोगों के निर्माण को तोड़ा गया, लेकिन महिला के घर पर बुलडोजर नहीं चला। एनएचएआई के अफसर व राजस्व टीम को काम अधूरा छोड़कर लौटना पड़ा। एनएचएआई के अफसर ने इसकी शिकायत एडीएम प्रशासन से की है।
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फोरलेन निर्माण के दौरान कई जगह अतिक्रमण के चलते अभी तक सड़क पूरी नहीं बन पाई है। सोमवार को नायब तहसीलदार हंसराज, एनएचएआई के भूमि अधिग्रहण अधिकारी चंद्रशेखर, थाना प्रभारी पीपीगंज प्रभु दयाल सिंह और कार्यदाई संस्था पीएनसी इंफ्राटेक के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सड़क के पूर्वी हिस्से से अतिक्रमण हटाने का काम दोपहर करीब एक बजे से शुरू हुआ।
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इस टीम को जोखई, नोखई, गंगा, मुन्ने सहित करीब 21 लोगों के घरों को तोड़ना था। अतिक्रमण हटाने का कार्य शुरू होते ही ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच मुआवजे को लेकर नोकझोंक होने लगी। इस दौरान एक महिला ने अपने मकान को तोड़ने के लिए एक दिन का अतिरिक्त समय मांगा।
लेकिन, अधिकारियों ने कहा कि पहले भी कई बार समय दिया जा चुका है। बार-बार टीम गठित कर अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई शुरू होते है और फिर रुक जाती है। इसलिए कार्रवाई नहीं रोक सकते। एसओ पीपीगंज प्रभु दयाल सिंह ने महिला का समर्थन करते हुए उसकी मकान नहीं तोड़ने की बात कही।
वहीं एनएचएआई के भूमि अधिग्रहण अधिकारी चंद्रशेखर का कहना था कि बार-बार मशीन लेकर अतिक्रमण हटवाने आना संभव नहीं है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी। बहसबाजी के चलते महिला का मकान नहीं तोड़ा गया।
देर शाम एनएचएआई और राजस्व टीम 21 में से 6 से 7 मकानों से अतिक्रमण हटवाकर लौट गई।एनएचएआई के भूमि अधिग्रहण अधिकारी चंद्रशेखर का कहना था कि टीम गठित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में मजिस्ट्रेट के रूप में नायब तहसीलदार हंसराज मौके पर मौजूद थे।
कोई भी फैसला लेना उनके अधिकार क्षेत्र में था। उनके बजाय एसओ ने खुद फैसला ले लिया और एक मकान न तोड़ने का दबाव बनाया और बहसबाजी की। दो महीने से भूमि खाली करने के लिए लोगों से कहा जा रहा है। वहीं मकानों को तोड़ने के लिए चिह्नांकन पिछले साल सितंबर में पूरा हो चुका है।
सोमवार कार्रवाई में करीब 2 लाख 80 हजार रुपये का खर्च आया। पीडब्ल्यूडी की भूमि पर जो भी निर्माण है, उसका मुआवजा लोगों को नहीं दिया जाना है। जबकि आबादी, बंजर भूमि और निजी भूमि पर बने मकान (स्ट्रक्चर) का पैसा भेजा जा चुका है। स्ट्रक्चर हटने के बाद भूमि कब्जा मुक्त होगी इसके बाद भूमि का भी पैसा त्वरित भेज दिया जाएगा। जमीन व मकान का मिलाकर लगभग 6 करोड़ मुआवजा देना है।