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Gorakhpur News: संसाधनों के अभाव में टली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
Wed, 27 May 2026 02:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 27 May 2026 02:54 AM IST
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गोरखपुर। बेतियाहाता स्थित आवास विकास कॉलोनी में निजी जमीन पर बिना अधिग्रहण और मुआवजा दिए आवास बनाकर बेचने के मामले में अदालत के सख्त रुख के बाद मंगलवार को कार्रवाई तेज हो गई। अदालत के आदेश के अनुपालन में अदालत अमीन वीरेंद्र यादव पुलिस बल और राजस्व कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तथा जमीन की पैमाइश कर विवादित भवनों पर निशान लगाए। हालांकि भवनों को ध्वस्त कर कब्जा दिलाने की कार्रवाई कटर और अन्य जरूरी संसाधनों के अभाव में पूरी नहीं हो सकी।
प्रेमचंद पार्क के पास स्थित कॉलोनी में सुबह से ही हलचल रही। बेतियाहाता चौकी इंचार्ज विवेक राय और पुलिस बल की मौजूदगी में अदालत अमीन ने राजस्व कर्मियों के साथ जमीन की निशानदेही कराई। पैमाइश के दौरान यह सामने आया कि नगर निगम की पानी की टंकी तो दायरे से बाहर है, लेकिन उसका कुछ हिस्सा विवादित क्षेत्र की सीमा में आ रहा है।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी समेत कई प्रभावित भवन स्वामी मौके पर पहुंच गए। भवन स्वामियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार की नोटिस नहीं दिया गया और न ही उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की ओर से कोई सूचना उपलब्ध कराई गई। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि मौके पर आवास विकास परिषद का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद क्यों नहीं था। विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस की मौजूदगी में अदालत अमीन ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। अदालत अमीन वीरेंद्र यादव ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुपालन में पैमाइश कर भवनों पर निशान लगाए गए हैं। बड़े भवनों को जेसीबी से तोड़ना संभव नहीं था। कटर और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता न होने के कारण कार्रवाई अगली तिथि तक स्थगित कर दी गई है। इसकी रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी।
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बताया जा रहा है कि जिन मकानों पर कार्रवाई की जद आई है, उनमें डॉ. राजीव जायसवाल, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. दुर्गेश गुप्ता, डॉ. नीरज नथानी, डॉ. वीर आर. सिंह, दिलीप मुरार, विनोद गुप्ता, सुरेश सिंह, पूर्व विधायक बृजेश सिंह और अरविंद पांडेय समेत कई प्रतिष्ठित लोग पिछले करीब चार दशकों से निवास कर रहे हैं।
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प्रेमचंद पार्क के पास स्थित कॉलोनी में सुबह से ही हलचल रही। बेतियाहाता चौकी इंचार्ज विवेक राय और पुलिस बल की मौजूदगी में अदालत अमीन ने राजस्व कर्मियों के साथ जमीन की निशानदेही कराई। पैमाइश के दौरान यह सामने आया कि नगर निगम की पानी की टंकी तो दायरे से बाहर है, लेकिन उसका कुछ हिस्सा विवादित क्षेत्र की सीमा में आ रहा है।
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कार्रवाई की सूचना मिलते ही स्थानीय पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी समेत कई प्रभावित भवन स्वामी मौके पर पहुंच गए। भवन स्वामियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार की नोटिस नहीं दिया गया और न ही उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की ओर से कोई सूचना उपलब्ध कराई गई। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि मौके पर आवास विकास परिषद का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद क्यों नहीं था। विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस की मौजूदगी में अदालत अमीन ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। अदालत अमीन वीरेंद्र यादव ने बताया कि अदालत के आदेश के अनुपालन में पैमाइश कर भवनों पर निशान लगाए गए हैं। बड़े भवनों को जेसीबी से तोड़ना संभव नहीं था। कटर और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता न होने के कारण कार्रवाई अगली तिथि तक स्थगित कर दी गई है। इसकी रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाएगी।
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बताया जा रहा है कि जिन मकानों पर कार्रवाई की जद आई है, उनमें डॉ. राजीव जायसवाल, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. दुर्गेश गुप्ता, डॉ. नीरज नथानी, डॉ. वीर आर. सिंह, दिलीप मुरार, विनोद गुप्ता, सुरेश सिंह, पूर्व विधायक बृजेश सिंह और अरविंद पांडेय समेत कई प्रतिष्ठित लोग पिछले करीब चार दशकों से निवास कर रहे हैं।