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विकास की अधूरी खुशी: गोरखपुर में मिनी सचिवालय अभी सपना, एक साल बीत गए टेंडर ही नहीं हो पाया

Mon, 21 Aug 2023 02:07 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Aug 2023 02:07 PM IST
सार

निर्माण खंड भवन अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि नए कलेक्ट्रेट भवन से संबंधित डीपीआर को शासन की वित्तीय समिति ने मंजूर कर लिया है। शासनदेश जारी होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया होगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

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Tender for Mini Secretariat in Gorakhpur could not be done for one year
गोरखपुर जिलाधिकारी कार्यालय। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में मिनी सचिवालय का सपना अभी पूरा नहीं होगा। नई बिल्डिंग बनाने की योजना में विलंब हो रहा है। शासन की वित्तीय समिति ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी शासनादेश की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें ही दो माह गुजर जाएंगे। इस वजह से कलेक्ट्रेट भवन का काम विलंब से ही शुरू हो सकेगा। नई बिल्डिंग बनने तक फरियादियों को अधिकारियों से मिलने के लिए अलग-अलग जगहों का चक्कर लगाना ही पड़ेगा।

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कलेक्ट्रेट भवन अंग्रेजों के समय का बना हुआ था। समय के साथ काम का बोझ बढ़ा तो पुराने भवन में जगह कम पड़ गई। मुख्यमंत्री ने पुराने भवन की जगह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित भवन बनवाने का निर्देश दिया, जिसमें प्रमुख विभागों का दफ्तर एक साथ हो। इसका फायदा यह होगा कि एक ही भवन में सारे अफसर मिल जाएंगे और लोगों की भागदौड़ कम होगी।
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इस योजना को साकार करने के लिए करीब ढाई साल पहले भवन का डीपीआर तैयार हुआ, जिसमें ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट के अलावा 11 मंजिला बिल्डिंग बनाने की बात कही गई। इसका हर फ्लोर चार हजार स्कवायर मीटर में प्रस्तावित है। नए भवन में डीएम के अलावा एसएसपी कार्यालय और विकास भवन के सभी कार्यालय स्थापित होंगे।
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इसके निर्माण पर 356 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। डीपीआर बनने के बाद नई बिल्डिंग का निर्माण जल्दी शुरू होने की उम्मीद जगी। करीब छह माह पहले पुराने कार्यालय के भवन को तोड़ दिया गया। लेकिन भवन टूटने के बाद से अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो सका है।

बीते दिनों कलेक्ट्रेट में सीएम का कार्यक्रम होने की वजह से मलबा साफ कराया गया। अब इस खाली जगह का प्रयोग पार्किंग के रूप में किया जा रहा है। यहां रोजाना चार पहिया वाहन खड़े हो रहे हैं।

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पहले एक साथ मिलते थे अधिकारी, अब चक्कर लगाने की परेशानी
पुराने कलेक्ट्रेट भवन में डीएम के साथ-साथ एसएसपी कार्यालय था। वहां डीएम के अलावा एसएसपी, एडीएम सिटी, एडीएम प्रशासन, तीन एसपी और अन्य अधिकारी बैठते थे। अगल-बगल में कई कार्यालय हाेने से फरियादियों को सहूलियत मिलती थी। यहां आने पर एक साथ लोग कई विभागों का कामकाज आसानी से निबटा लेते थे। बगल में तहसील, ट्रेजरी ऑफिस और रजिस्ट्री कार्यालय भी था।

नए निर्माण के लिए जब पुराना भवन तोड़ा गया तो डीएम कार्यालय, एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट का कार्यालय रेलवे बस स्टेशन के पास पर्यटन विभाग में स्थानांतरित हो गया। पुलिस विभाग को पुराना आरटीओ में ले जाया गया। अब पुराने कलेक्ट्रेट में एडीएम वित्त एवं राजस्व के अलावा कलेक्ट्री कचहरी, ट्रेजरी और रजिस्ट्री ऑफिस, चकबंदी ऑफिस आदि दफ्तर बचे हैं।

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एक काम में बीत जाता पूरा दिन, करनी पड़ती भागदौड़

Tender for Mini Secretariat in Gorakhpur could not be done for one year
गोरखपुर पुराना कलक्ट्रेट परिसर, यहीं पर बनेगा नया भवन। - फोटो : अमर उजाला।

शनिवार की दोपहर 12.02 बजे झरना टोला निवासी महेश थापा पासपोर्ट के काम से डीएम कार्यालय पहुंचे। वहां से काम निपटाकर उनको पुलिस कार्यालय जाना था। वह काफी देर तक इस उलझन में रहे कि कैसे समय का प्रबंधन करें। क्योंकि उनको तय समय में सारा काम खत्म करना था। अकेले महेश थापा नहीं, बल्कि रोजाना तमाम लोगों को कलेक्ट्रेट कचहरी, पुलिस कार्यालय और डीएम कार्यालय तक दौड़भाग करनी पड़ती है।

डीएम कार्यालय में मिले श्यामरथी, देव कुमार सहित अन्य लोगों ने अपनी पीड़ा बताई। कहा कि डीएम को एक पत्र देने के लिए पहले कलेक्ट्रेट में जाकर प्रार्थना पत्र लिखवाना पड़ता है। इसके बाद डीएम से मिलने लोग आते हैं। इस दौरान कई बार ऐसा होता है कि डीएम से मुलाकात नहीं होती। एक जगह कार्यालय होने से कम समय में सारा काम हो जाता था। अब पूरा दिन बीत जा रहा है। यही हालत अधिवक्ताओं की होती है। उनको भी काफी भागदौड़ करनी पड़ती है।

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कैप्टन ओम प्रकाश ने कहा कि पुराना कलेक्ट्रेट भवन सही था। वहां एसएसपी और डीएम एक साथ बैठते थे। इससे दोनों दफ्तर का काम हो जाता था। अलग अलग जगह ऑफिस होने से परेशानी बढ़ी है।

भरत लाल शर्मा ने कहा कि बच्चे की तबीयत खराब है। शासन से मदद के लिए पत्र देना है। पुराने कलेक्ट्रेट में सारी सुविधा थी। कलेक्ट्रेट में अधिवक्ता से पत्र लिखवाकर आए हैं। यहां पता लगा कि डीएम नहीं बैठे हैं। इससे काफी समय बर्बाद हो रहा है।

महेश थापा ने कहा कि मेरा पासपोर्ट का मामला है। मेरे साथ के सभी आवेदकों का पासपोर्ट आ गया है। मैं डीएम कार्यालय में आवेदन देने आया था। अधिवक्ता से सलाह लेने के लिए कलेक्ट्रेट में जाना पड़ा था। इसमें काफी समय लग गया है।

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अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने कहा कि अधिवक्ता ही नहीं, फरियादी भी परेशान होते हैं। करीब एक साल से हम लोग देख रहे हैं। अभी नई बिल्डिंग के संबंध में कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जल्दी काम शुरू होता तो जल्दी से सुविधा मिल जाती। इस रफ्तार से कम से कम तीन साल तक का समय लग जाएगा।

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अधिवक्ता नितेश कुमार ने कहा कि एक काम के लिए डीएम कार्यालय जाइए तो आने जाने में काफी समय लग जाता है। यदि किसी मामले में डीएम के साथ ही एसएसपी को पत्र देना हो तो पूरा दिन गुजर जाता है। ऐसे में काम नहीं हो पाता है। नए भवन के निर्माण तक यह समस्या बनी रहेगी।

निर्माण खंड भवन अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि नए कलेक्ट्रेट भवन से संबंधित डीपीआर को शासन की वित्तीय समिति ने मंजूर कर लिया है। शासनदेश जारी होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया होगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

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