गोरखपुर में कोरोना महामारी ने अब तक 315 लोगों की जान ली है। इनमें 75 प्रतिशत मरीजों को शुगर (मधुमेह) की बीमारी थी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में यह बात सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन्हें शुगर की बीमारी है, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि मधुमेह एक बार हो जाने पर जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता।
इन मरीजों को है कोरोना का ज्यादा खतरा, जानिए कैसे बरतें सावधानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जानकारी के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित 315 मरीजों की मौत अब तक हो चुकी है। इनमें करीब 85 प्रतिशत ऐसे मरीज थे, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से ग्रसित थे। इन मरीजों में 75 प्रतिशत मरीज शुगर की बीमारी से भी ग्रसित थे।
फिजिशियन डॉ संजीव गुप्ता ने बताया कि शुगर एक बड़ी समस्या है। मौजूदा समय में तकरीबन हर घर में एक न एक सदस्य शुगर की बीमारी से ग्रसित है। इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता। लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। शुगर से किडनी, आंख, ह्दय, ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारियां बढ़ जाती हैं। ऐसा होने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है। मरीज की जान भी चली जाती है।
उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में शुगर और बीपी (ब्लड प्रेशर) के मरीज कोरोना को बिल्कुल हल्के में न लें। जरा सी भी दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। बीमारी के दौरान दवा डॉक्टरों की सलाह पर ही लें।
इस बार विश्व मधुमेह दिवस, द नर्स एंड डायबिटिज थीम पर मनाया जाएगा। डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के देखभाल में नर्सों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यह थीम रखा गया है। कोरोना महामारी में मरीजों की देखभाल में भी नर्सों का विशेष योगदान रहा है।