पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव का मुख्य पर्व दिवाली शनिवार को पूजन-अर्चन के बीच हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस बार दिवाली खास होने जा रही है। अखिल भारतीय विद्वत महासभा के प्रवक्ता पंडित शरद चंद्र मिश्र के मुताबिक 499 वर्ष के बाद महासिद्धि का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
Diwali 2020: 499 साल बाद बन रहा महासिद्धि योग, जानिए क्यों खास है ये दिवाली
दिवाली के दिन सिद्धि एवं सर्वाथ सिद्धि योग मिलकर महा सिद्धि का संयोग बना रहे हैं, जो सभी के लिए शुभदायक है। इस योग में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश एवं कुबेर की आराधना करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होगी।
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शनिवार को दिवाली के दिन ब्रह्ममुहूर्त में पितृगण एवं देवताओं का पूजन करें। संभव हो तो उपवास या फलाहार करके गोधूलि बेला में या वृष, सिंह, वृश्चिक आदि स्थिर लग्न में श्री गणेश कलश षोडश मातृका एवं महालक्ष्मी का षोडषोपचार पूजन करें। पूजन थाली में 26 दीये और एक अतिरिक्त चौमुखा दीप प्रज्वलित कर दीपमालिका का पूजन करें।
गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति की चांदी आदि के सिक्के से पूजन करना शुभ माना जाता है। चौमुखा दीपक को रात भर जलने-जलाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अंत में दवात के रूप में माता काली, कलम बही के रूप में मां लक्ष्मी और सरस्वती तथा कुबेर के तुला रूप में पूजन करना फलदाई होगा।
- लक्ष्मी पूजन मुहूर्त- शाम 05.24 से 07.29 मिनट तक
- अवधि- दो घंटे पांच मिनट
- प्रदोष काल- शाम 05.24 से 08.06 तक प्रदोष काल
- वृषभ काल- शाम 05.24 से 07.29 मिनट तक
- अमावस्या तिथि प्रारंभ - दोपहर 01.49 मिनट से