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बनारस के डोम ने बनवाया था यह पुल, 19वीं शताब्दी की तकनीकी का सटीक उदाहरण है ये 'गर्डर'

Thu, 18 Jun 2020 08:28 AM IST
vivek shukla संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर।
संतोष श्रीवास्तव, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 18 Jun 2020 08:28 AM IST
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Story of Siddharth nagar Special Garder Bridge
गार्डर पुल। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय को बीचोबीच विभाजित करने वाली जमुआर नदी पर शताब्दी पूर्व पुल बनाए जाने की घोषणा हुई तो यहां के तराई क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटना मानी गई थी।

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जमुआर पर पुल निर्माण की घोषणा तत्कालीन अंग्रेजी शासन या किसी रजवाड़े अथवा जमींदार की ओर से नहीं, बल्कि बनारस के चर्चित कल्लू डोम के एक वंशज ने की थी। तब उसे डोम राजा कहा जाता था। तुर्रा यह कि शमशान घाटों पर शव कर वसूलने वाले डोम राजा ने पुल निर्माण के बाद उसे पथकर से मुक्त करने की भी घोषणा की थी।
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शहर के उत्तरी छोर स्थित जमुआर नदी पर डोम राजा ने लोहे का पुल बनवाया। आज के वैज्ञानिक युग में भी उस वक्त की तकनीक और कारीगरी का अद्भुत नमूना है। यह अलग बात है कि कभी अंग्रेजों का माथा झुका देने वाला पुल पिछले दो दशक से उपेक्षित होकर अनुपयोगी पड़ा है।
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दो बाजारों को एक सड़क से जोड़ा गया

वर्ष 1883 के बस्ती गजेटियर का अध्ययन करने पर पता चलता है कि कुछ वर्ष पूर्व तक व्यापारिक नावें आती जाती रहीं। इसके बाद में अनेकों नाविकों ने माना कि भुअही घाट से आगे कूड़ा और जमुआर नदियों में बड़ी नावें उतारना खतरनाक है, क्योंकि वे नदियां पतली और छिछली हैं।

ऐसे में एक विचार यह हुआ कि नेपाल से सटे मटेहना बाजार को उसका बाजार तक सड़क मार्ग से जोड़ देने पर समस्या का हल संभव है। इस बीच जमुआर नदी एक बड़ी बाधा थी, जिसे पार करने का उपाय नहीं था।

पुराने समय में चावल व्यापार से जुड़े घरानों के बुजुर्ग सदस्य बताते हैं कि बनारस के व्यापारियों ने उसका से मटेहना को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए जमुआर नदी पर पुल बनाने के लिए अनेक फरियादें की, सफलता नहीं मिली। बौद्ध मठों की नगरी और काला नमक की मंडी मटेहना अब बर्डपुर के मार्ग को सुगम बनाने और इस क्षेत्र को नेपाल से जोड़ने के लिए डोम राजा ने पुल निर्माण कराने की घोषणा कर दी।

यह 19वीं शताब्दी की टेक्नोलॉजी का एक बेजोड़ नमूना है। 100 फुट लंबे पुल के प्रत्येक एंगल को बड़ी कुशलता के साथ नट और बोल्ट से जोड़कर एक रेलिंग युक्त पुल का रूप दिया गया। दो दशक पूर्व नए पुल के निर्माण बाद अनुपयोगी हो गया है।

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