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Exclusive: ट्रांसफार्मर की मरम्मत के नाम पर खर्च कर दिए 60 हजार लीटर तेल, जानिए क्या है मानक

Mon, 06 Feb 2023 04:19 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 06 Feb 2023 04:19 PM IST
सार

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि जिस खंड में ट्रांसफार्मर जलते हैं, उस क्षेत्र के अधिशासी अभियंता की जिम्मेदारी होगी कि वह तेल की खपत की निगरानी करें। जैसे, 100 लीटर तेल जारी होता है तो पूरा तेल ट्रांसफार्मर में डाला जाए, इसकी निगरानी जिम्मेदारों को खुद से करनी होगी।

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Spent 60 thousand liters of oil in name of repairing transformer
ट्रांसफार्मर। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बिजली निगम शहरी खंड में ट्रांसफार्मर मरम्मत के नाम पर 60 हजार लीटर तेल खपत कर दिया गया। छह माह के भीतर ये खपत की गई। इसमें बड़ी संख्या में तेल का खेल सामने आया है। सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र में खराब ट्रांसफार्मर में टॉपअप के नाम पर सैकड़ों लीटर तेल लिए गए, लेकिन उन्हें पूरी तरह प्रयोग नहीं किया गया। जैसे, 100 लीटर तेल अगर स्टोर से जारी हुआ तो उसका इंडेड बना और मौके पर चला गया। अब उसमें से कितना तेल ट्रांसफार्मर में पड़ा, इसका भैतिक रिकार्ड नहीं होता। इसी तेल में जिम्मेदार खेल कर जा रहे।

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बिजली निगम शहरी मंडल में 2265 ट्रांसफार्मर लगे हैं। ये सभी 10,16, 25, 63, 100,250, 400, 630, 1000 केवीए की क्षमता के हैं। इनमें कुल 123 ट्रांसफार्मर पिछले छह माह में फुंके थे। इन्हें मरम्मत करने में कुल खपत तेल के अनुपात में लगभग 40 लाख रुपये खर्च हो गए। उदाहरण, बिजली निगम शहरी मंडल के एक खंड में 32 से ज्यादा ट्रांसफार्मरों के फुंकने की शिकायतें मिली।
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अब इन्हें सही करने के लिए तेल तो लिया गया, लेकिन पूरे तेल की प्रयोग करने की जगह उसमें खेल कर दिया गया। इसी वजह से बार बार ट्रांसफार्मर जलता रहा। ये हाल द्वितीय और चतुर्थ खंड का भी रहा। यहां, ट्रांसफार्मर में तेल बदले जाते रहा और ट्रांसफार्मर फुंकने के साथ टॉपअप( मौके पर ही ट्रांसफार्मर में तेल डालना) के नाम पर सैकड़ों लीटर तेल खर्च होते गए। ये हाल शहर में ट्रांसफार्मरों से लेकर पावर ट्रांसफार्मर का भी रहा।
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तकनीकी खराबी व जले ट्रांसफार्मरों में तेल डालने या तेल चोरी कर प्रति माह हेराफेरी की जा रही। इससे प्रतिमाह निगम को लाखों रूपये का नुकसान हो रहा। सूत्रों ने बताया कि ट्रांसफार्मरों को टॉपअप कर तेल डाकर उत्सर्जित करने के नाम पर 80 फीसदी ट्रांसफार्मरों में मानक को दरकिनार कर तेल भरा जा रहा है।

 

ऐसे तेल की चोरी करने की संभावनाएं

बिजली निगम के किसी भी खंड या उपखंड में लगे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का एक नियम होता है। खराब हुए ट्रांसफार्मर में तेल डालने के लिए अवर अभियंता उसका इंडेंड बनाता है। इसे अपने अधिकारी को भेजते। इसके बाद इंडेंड को स्वीकृत कर वर्कशाप में तेल के आवेदन को भेज दिया जाता। मांग के अनुसार, उक्त तेल संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदारों को आवंटित कर दिया। गोपनीय जांच में पता लगा कि इसी तेल में जिम्मेदार मिलकर खेल कर जा रहे।

ट्रांसफार्मर में तेल का मानक
पावर ट्रांसफार्मर गर्म होकर खराब न हो, इसके लिए विशेष तेल का प्रयोग किया जाता है। मानक के अनुसार 10 से 16 केवीए के ट्रांसफार्मर के लिए कम से कम 25 लीटर और 25 केवीए के ट्रांसफार्मर के लिए 40 लीटर व 400 केवीए के ट्रांसफार्मर के लिए 340 लीटर तेल की जरूरत होती है।

मंडल के जिम्मेदारों के सामने से हजारों लीटर तेल चोरी हो चुके हैं। सबसे अधिक कुशीनगर, देवरिया मंडल में हुए। यंहा ट्रांसफार्मरों में पहले नट बोल्ट खोलकर या कट लगाकर तेल चोरी कर लिया जा रहा। ट्रांसफार्मर सुबह तक फुंक जा रहे। इसके बाद मौके पर ही इसे फिर से चार्ज करने के लिए सैकड़ों लीटर तेल मौके पर ही भेजे जाते। इसमें भी कितना तेल प्रयोग किया गया? इसका कोई आधिकारिक रिकार्ड नहीं होता।

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि जिस खंड में ट्रांसफार्मर जलते हैं, उस क्षेत्र के अधिशासी अभियंता की जिम्मेदारी होगी कि वह तेल की खपत की निगरानी करें। जैसे, 100 लीटर तेल जारी होता है तो पूरा तेल ट्रांसफार्मर में डाला जाए, इसकी निगरानी जिम्मेदारों को खुद से करनी होगी। ट्रांसफार्मरों में तेल खपत होने की सूचना मिल रही है। इसका औचक निरीक्षण और गोपनीय टीम से जांच करवाई जा सकती है।
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