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Gorakhpur News: भरूच से निकला शुभम-दादा-दादी का प्रेम

Sun, 28 Jul 2024 05:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jul 2024 05:53 AM IST
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Shubham-Grandfather's love from Bharuch

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गुजरात के भरूच से गायब शुभ 40 दिन बाद दादा-दादी के पास पहुंचा गोरखपुर



दादा-दादी से पोते के प्रेम की अजब कहानी, साइकिल से निकला था, रास्ते में ट्रक से हो गया घायल

ट्रक चालक ने कराया इलाज, लखनऊ से गोरखपुर वाली बस में बैठाकर चला गया



गुजरात और गोरखपुर में दर्ज थी गुमशुदगी, पिता ने रखा था 50 हजार का इनाम

अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। दादा-दादी से पोते के प्रेम की अजब कहानी सामने आई है। गुजरात में मम्मी-पापा के साथ रहने वाले 11 वर्षीय शुभ निषाद को अचानक गोरखपुर में रहने वाले दादा-दादी की याद आई। वह घर से बिना बताए कपड़ा और बैग लेकर साइकिल से गोरखपुर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में एक ट्रक की चपेट में आकर अचेत हो गया।



एक ट्रक चालक ने 38 दिन तक अपने पास रखकर उसका इलाज कराया। इसके बाद शुभ को लखनऊ लाकर बस से गोरखपुर भिजवा दिया। 40वें दिन शुभ, दादा-दादी के पास पहुंचा तो खुशी से सबके आंसू बहने लगे। मां-बाप को खबर लगी तो वे भी गोरखपुर आने की तैयारी में जुट गए।
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जानकारी के अनुसार, 15 जून को शुभ गुजरात के भरूच शहर से लापता हुआ। पिता सुरेश निषाद ने उसकी तलाश के लिए 50 हजार रुपये इनाम रखा था। पिता ने भरूच और दादा ने तिवारीपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। जयप्रकाश के बेटे सुरेश निषाद गुजरात के भरूच में जैब्सन एंड फूड कंपनी में काम करते हैं। करीब 12 साल से वह पत्नी और तीन बच्चों के साथ भरूच में ही रहते हैं।
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शुभ भरूच के ऑक्सीलियम स्कूल में कक्षा छह में पढ़ता है। शुभ ने बताया कि तीन साल से गोरखपुर शहर के सूर्यकुंड इलाके में रहने वाले अपने दादा- दादी से नहीं मिला था। गुजरात से 15 जून की सुबह वह घर पर बिना बताए चुपके से सुबह पांच बजे साइकिल से निकल गया। स्कूल बैग में कपड़े भी साथ ले लिए।



रास्ते में अंकलेश्वर के पास ट्रक ने ठोकर मार दी, जिससे साइकिल टूट गई और वह दूर जाकर गिर गया। राजस्थान के रहने वाले ट्रक चालक जगदीश अचेत पड़े शुभ को अस्पताल लेकर गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत में थोड़ा सुधार तो आया, लेकिन वह अपने बारे में कुछ बता नहीं पा रहा था। जगदीश ने उसे अपने साथ ट्रक में ही बैठा लिया।



ट्रक चालक ने इस दौरान 28 दिन तक शुभ का इलाज करवाया। इस दौरान सूरत, मुंबई समेत अन्य शहरों में भी उसे अपने साथ ले गया। ठीक होने के बाद शुभ ने गोरखपुर में दादा-दादी के पास जाने की इच्छा जताई तो ट्रक चालक बृहस्पतिवार रात शुभ को लेकर लखनऊ पहुंचा।

वहां गोरखपुर जाने वाली एक सरकारी बस में किराया देकर उसे विदा किया। शुक्रवार की शाम को शुभ गोरखपुर बस स्टैंड पर उतरा। यहां से रिक्शे से वह सूर्यकुंड क्राॅसिंग पर पहुंचा। वहां से पैदल लंगड़ाते हुए अपने दादा-दादी के पास पहुंचा। शुभ के घुटने का घाव अभी भरा नहीं है।




अमर उजाला से बात करते हुए शुभ ने बताया कि ट्रक चालक ने उसका बहुत ख्याल रखा। वहीं दादा-दादी ने भी ट्रक चालक की खूब तारीफ की। बच्चे की मिलने की खबर मिलते ही गुजरात से पिता गोरखपुर आने की तैयारी में जुट गए। यह कहानी जानने के बाद सुर्यकुंड में बच्चे से मिलने वालों की भीड़ लग गई है। हर कोई ट्रक चालक की ईमानदारी का मिसाल दे रहा है।
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