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Gorakhpur News: भविष्य में एमआरआई और सीटी स्कैन जांच होगी सस्ती, घटेगी मशीन की लागत

Mon, 18 May 2026 02:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 02:09 AM IST
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Research by physics researchers of MMMUT published in 'Optical and Quantum Electronics'.
गोरखपुर। सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी महंगी जांच की बात सामने आते ही मरीजों और तीमारदारों की बेचैनी बढ़ जाती है। वह जांच तो कराते हैं लेकिन मन में जेब ढीली किए जाने की तकलीफ रहती है। यह जांच भविष्य में सस्ती हो सकती है। यह उम्मीद जगी है मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के शोधकर्ताओं के नए शोध से। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जांच में लौह चुंबकीय पदार्थ काफी महंगा है जबकि मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम आधारित परतदार चुंबकीय पदार्थ टिकाऊ तो है ही इसकी लागत बहुत कम है।
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यह शोध भौतिकी के प्रो. बीके पांडेय और उनके शोधार्थी व संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा के सहायक आचार्य डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव ने किया है। यह शोध स्प्रिंगर नेचर समूह के जर्नल ''''ऑप्टिकल एंड क्वांटम इलेक्ट्रॉनिक्स'''' के मई-2026 के अंक में प्रकाशित हुआ है। शोध में फेरो मैग्नेटिक मैटेरियल (लौहचुंबकीय पदार्थ) और मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम आधारित परतदार चुंबकीय पदार्थों का गहन अध्ययन किया गया।
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प्रो. बीके पांडेय ने बताया कि अध्ययन में सामने आया कि मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम आधारित परतदार चुंबकीय पदार्थ भी लौह चुंबकीय पदार्थ की ही तरह टिकाऊ हैं। इसकी कार्यक्षमता और गति भी काफी बेहतर है। मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम आधारित पदार्थ तुलनात्मक रूप से बहुत सस्ते हैं। वर्तमान में सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन तैयार करने में महंगे लौह चुंबकीय पदार्थ का उपयोग किया जाता है, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है। मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम आधारित परतदार चुंबकीय पदार्थ तुलनात्मक रूप से बहुत सस्ते पड़ेंगे। यानी भविष्य में इन मशीनों के निर्माण में लागत तो कम आएगी ही सीटी स्कैन और एमआरआई में लगने वाला समय भी बचेगा।
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शोध का कई क्षेत्रों में मिलेगा लाभ
डॉ. अभय प्रकाश ने बताया कि इस शोध का लाभ सिर्फ सीटी स्कैन या एमआरआई मशीन के निर्माण तक ही सीमित नहीं है। इसका उपयोग संवेदक, तीव्र गति वाले विद्युत उपकरण, क्वांटम तकनीक व आधुनिक संचार प्रणालियों में भी किया जा सकेगा।



प्रकाश अवशोषण क्षमता बनाती है उपयुक्त
वैज्ञानिकों ने मैंगनीज-बिस्मथ-टेल्यूरियम नामक उन्नत चुंबकीय पदार्थों के संरचनात्मक, यांत्रिक, तापीय, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रकाशीय गुणों का विस्तृत अध्ययन ''''घनत्व फलन सिद्धांत'''' (डीएफटी) तकनीक की सहायता से किया। शोध में पाया गया कि ये पदार्थ भविष्य की क्वांटम तकनीक, स्पिंट्रोनिक्स, इंफ्रारेड सेंसर व मैग्नेटो-ऑप्टिकल उपकरणों के विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। अध्ययन के अनुसार, इन पदार्थों में लगभग ''''एक इलेक्ट्रॉन वोल्ट'''' ऊर्जा क्षेत्र में अत्यधिक प्रकाश अवशोषण क्षमता पाई गई है, जो इन्हें आधुनिक ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक एवं प्लास्मोनिक उपकरणों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह शोध भविष्य की उन्नत तकनीकों के लिए नए मार्ग खोलने में सहायक सिद्ध होगा।
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