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देशभर में सिर्फ गोरखपुर में होता है ये खास कार्यक्रम, इस बार टूट जाएगी 1948 से चली आ रही परंपरा

Sat, 03 Oct 2020 02:10 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 03 Oct 2020 02:10 PM IST
सार

  • विजयदशमी के दिन देश में सिर्फ गोरखपुर में होता है राघव और शक्ति के मिलन का कार्यक्रम
  • कोरोना के कारण इस बार टूट जाएगी 1948 से चली आ रही परंपरा

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Raghav and Shakti milan programme will not organized in gorakhpur due to coronavirus impact
राघव शक्ति मिलन कार्यक्रम की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विजयदशमी के दिन देशभर में सिर्फ गोरखपुर में होने वाली ऐतिहासिक राघव शक्ति मिलन की परंपरा का निर्वहन इस बार नहीं हो सकेगा। कोरोना ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम पर भी ग्रहण लगा दिया है। संक्रमण से बचाव के लिए कमेटी ने इस कार्यक्रम को इस बार नहीं कराने का निर्णय लिया है।

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राघव शक्ति मिलन कार्यक्रम की शुरुआत 1948 में स्व. मोहन लाल यादव, स्व. रामचंद्र सैनी, स्व. मेवालाल यादव एवं स्व. रघुवीर मास्टर ने राघव शक्ति मिलन कमेटी की स्थापना करके व्यवस्थित तरीके से की थी। तभी से इस परंपरा का निर्वहन निरंतर हो रहा है।
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विजयदशमी के दिन बर्डघाट रामलीला के श्रीराम रावण का वध करने के पश्चात माता जानकी, भाई लक्ष्मण और हनुमान के साथ विजय जुलूस में दुर्गा मिलन चौक, बसंतपुर तिराहे पर पहुंचते हैं। जहां आकर शहर की प्राचीनतम दुर्गा बाड़ी की प्रतिमा का श्रीराम पूजन-अर्चन एवं आरती कर युद्ध में विजय के लिए माता रानी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशीर्वाद लेते हैं।
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इसी श्रीराम एवं माता दुर्गा के मिलन के कार्यक्रम को राघव शक्ति मिलन के नाम से जाना जाता है। इस अद्भुत पल को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु बसंतपुर पहुंचते हैं। जहां फूलों की वर्षा एवं जयघोष के बीच वातावरण भक्तिमय हो जाता है। राघव शक्ति मिलन के बाद ही शहर की कोई दुर्गा प्रतिमा राप्ती नदी में विसर्जन के लिए आगे बढ़ती है। इस कार्यक्रम में होने वाली भीड़ के मद्देनजर शासन की गाइडलाइन के पूर्व ही कमेटी ने इस बार इस कार्यक्रम को नहीं करने का निर्णय लिया है।

ये हैं कमेटी के पदाधिकारी

  • किशुन लाल यादव, अध्यक्ष
  • सुरेश चंद्र सैनी व सुरेंद्र यादव, उपाध्यक्ष
  • राकेश वर्मा, महामंत्री
  • संजय गुप्ता व चुन्नु सैनी, मंत्री
  • हृदयेश कुमार सैनी, कोषाध्यक्ष

ये है मान्यता
मान्यता है कि लंका विजय के बाद जब श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ लौट रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने मां शक्ति की आराधना कर लंका में मिली विजय पर माता के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनका आशीर्वाद लिया था। इसी का जीवंत रूप शहर में राघव शक्ति मिलन कार्यक्रम में देखने को मिलता है।

श्री श्री राघव शक्ति मिलन कमेटी के महामंत्री राकेश वर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार जुलूस निकलना मुश्किल है। साथ ही पंडालों में मूर्ति स्थापना होना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसे ऐतिहासिक राघव शक्ति मिलन का कार्यक्रम संभव नहीं है।
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