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Gorakhpur News: प्रतिबंधित नशीली दवाएं नेपाल ले रहे दो तस्कर दबोचे गए, साउंड बॉक्स में छिपाकर कर रहे थे तस्करी
Sat, 06 May 2023 01:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 May 2023 01:57 PM IST
सार
एसटीएफ ने कैंट पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ में पकड़े गए समीर अहमद ने बताया कि उसके मित्र शिवम ने उसकी बात फोन पर भैया जी से कराई थी। भैया जी ने कहा कि तुम बिहार के रक्सौल व मोतिहारी चले जाओ वहां सद्दाम मिलेगा। वह एक साउंड बॉक्स देगा। उसे लाकर देने पर 50 हजार नेपाली करेंसी मिलेगा।
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एसटीएफ ने 2 नशीली दवाओं के तस्करों को दबोचा।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर से तस्करी करके नेपाल ले जाए जा रहे प्रतिबंधित नशीली इंजेक्शन की खेप को बृहस्पतिवार की रात एक बार फिर एसटीएफ ने पकड़ा। दो तस्करों को गिरफ्तार कर उनके पास से साउंड बॉक्स में छिपाकर रखे गए 4270 नशीले इंजेक्शन को बरामद कर लिया गया। आरोपियों के खिलाफ कैंट थाने में केस दर्ज कर लिया गया।
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पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। हालांकि, इस तरह के तस्करी के मामले पहले भी पकड़े गए है, लेकिन पुलिस तह तक नहीं पहुंच पाती है। जबकि, इस प्रतिबंधित इंजेक्शनों को बेचने का लाइसेंस चंद दवा व्यापारियों के पास ही है। बताया जा रहा है कि दस रुपये में ही इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कर नशेड़ी महंगे ब्राउन शुगर और ड्रग्स जैसे नशे में डूब जाते हैं।
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पकड़े गए आरोपियों की पहचान गुलरिहा के वार्ड नंबर 6 निवासी सरफराज उर्फ बाबू और समीर अहमद के रूप में हुई है। सरफराज मूल रूप से बलिया के बेल्थरा रोड का निवासी है और नेपाल के बर्दिया में दवा की दुकान चलाता है। एसटीएफ गोरखपुर यूनिट प्रभारी सत्य प्रकाश सिंह के मुताबिक, बृहस्पतिवार रात को मुखबिर से सूचना मिली कि दो लोग पुराना रेलवे स्टेशन चौकी के पास बस से आए है, उनके पास दवाएं हैं।
एसटीएफ ने कैंट पुलिस के साथ मिलकर आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ में पकड़े गए समीर अहमद ने बताया कि उसके मित्र शिवम ने उसकी बात फोन पर भैया जी से कराई थी। भैया जी ने कहा कि तुम बिहार के रक्सौल व मोतिहारी चले जाओ वहां सद्दाम मिलेगा। वह एक साउंड बॉक्स देगा। उसे लाकर देने पर 50 हजार नेपाली करेंसी मिलेगा।
बॉक्स में ऐसे छिपाए थे कि टूटे न एक भी शीशी
एसटीएफ के अनुसार समीर अपने मित्र सरफराज के साथ रक्सौल गया, वहां उन्हें सद्दाम मिला। फिर वहां से तीनों मोतिहारी गए जहां अनीस मिला। अनीस ने दोनों को साउंड बॉक्स दिया। जिसे लेकर ये दोनों गोरखपुर बस से आए। यहां से ये दोनों बहराइच होते हुए नेपाल के काठमांडू जाते। काठमांडू में भैया जी को ये लोग दवाओं से भरा साउंड बॉक्स देते। जिसके बाद इन्हें 50 हजार नेपाली रुपये मिलते।
भैया जी उन नशीली दवाओं को काठमांडू में महंगे दाम पर बेचता। एसटीएफ ने दोनों के पास से साउंड बॉक्स में छिपाया गया 4270 नशीले प्रतिबंधित इंजेक्शन, चार मोबाइल फोन, 2 हजार नेपाली व 1200 भारतीय रुपये, नेपाली नागरिकता व बीजा बरामद किया है। एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर कैंट पुलिस ने सरफराज व समीर अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेजा गया।
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साउंड बॉक्स को खोखला करके इन लोगों ने कपड़े, टीश्युफोम लगाकर काले पॉलीथिन में इंजेक्शन के बॉयल को छिपाए थे। इस तरह से रखा गया कि एक भी बॉयल इंजेक्शन टूटने न पाए। साउंड बॉक्स को देखकर कोई शक भी नहीं करता। अपने पहनावे को भी इन लोगों ने इस तरह से रखा कि किसी को भी देखने में यही लगे कि यह लोग साउंड बॉक्स लेकर ही किसी शादी वगैरह में जा रहे हैं।
सिर्फ दवा की पर्ची पर ही मिल सकते हैं इंजेक्शन
आरोपियों के पास जो दवाएं बरामद हुई हैं, वह सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर ही खरीदी जा सकती हैं। बरामद डायजेपाम, बुप्रेन्योरफिने इंजेक्शन ऑपरेशन के समय मरीजों को बेहोश करने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकती है। वह सीधे डॉक्टर को ही सप्लाई की जाती है। हर कंपनी के चुनिंदा व्यापारियों के पास ही इन दवाओं के बेचे जाने का लाइसेंस भी है। ऐसे में यह दवाएं कैसे बाहर आई और तस्करी कैसे हो रही है, यह एक बड़ा सवाल है।
भैया जी उन नशीली दवाओं को काठमांडू में महंगे दाम पर बेचता। एसटीएफ ने दोनों के पास से साउंड बॉक्स में छिपाया गया 4270 नशीले प्रतिबंधित इंजेक्शन, चार मोबाइल फोन, 2 हजार नेपाली व 1200 भारतीय रुपये, नेपाली नागरिकता व बीजा बरामद किया है। एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर कैंट पुलिस ने सरफराज व समीर अहमद के खिलाफ केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेजा गया।
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साउंड बॉक्स को खोखला करके इन लोगों ने कपड़े, टीश्युफोम लगाकर काले पॉलीथिन में इंजेक्शन के बॉयल को छिपाए थे। इस तरह से रखा गया कि एक भी बॉयल इंजेक्शन टूटने न पाए। साउंड बॉक्स को देखकर कोई शक भी नहीं करता। अपने पहनावे को भी इन लोगों ने इस तरह से रखा कि किसी को भी देखने में यही लगे कि यह लोग साउंड बॉक्स लेकर ही किसी शादी वगैरह में जा रहे हैं।
सिर्फ दवा की पर्ची पर ही मिल सकते हैं इंजेक्शन
आरोपियों के पास जो दवाएं बरामद हुई हैं, वह सिर्फ डॉक्टर की पर्ची पर ही खरीदी जा सकती हैं। बरामद डायजेपाम, बुप्रेन्योरफिने इंजेक्शन ऑपरेशन के समय मरीजों को बेहोश करने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकती है। वह सीधे डॉक्टर को ही सप्लाई की जाती है। हर कंपनी के चुनिंदा व्यापारियों के पास ही इन दवाओं के बेचे जाने का लाइसेंस भी है। ऐसे में यह दवाएं कैसे बाहर आई और तस्करी कैसे हो रही है, यह एक बड़ा सवाल है।