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कोरोना संक्रमितों का डाटा भरने में लापरवाही बरत रहे हैं निजी पैथालॉजी, जांच के नाम पर कर रहे हैं मनमानी

Sun, 09 Aug 2020 06:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 09 Aug 2020 06:02 PM IST
सार

  • सही समय पर संक्रमितों की नहीं मिल पा रही विभाग को जानकारी
  • शहर के पांच निजी पैथालॉजी में हो रही कोरोना जांच

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Private pathology is being negligent in filling the data of corona positive case in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

कोरोना मरीजों की संख्या जिले में लगातार बढ़ती जा रही है। बीआरडी से लेकर, जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी और पीएचसी पर जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। जांच की जिम्मेदारी शहर के कुछ निजी पैथालॉजी को भी दी गई है। लेकिन निजी पैथालॉजी जांच के नाम पर मनमानी पर उतारु हैं। कोरोना संक्रमितों का डाटा भरने में लापरवाही तो बरत ही रहे हैं साथ ही जांच के नाम पर अवैध वसूली भी कर रहे हैं। निगेटिव आने पर 2500 रुपये। वहीं, पॉजिटिव आने पर 4500 रुपये की मांग कर रहे हैं।

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कोरोना महामारी के बढ़ते केस के बीच आईसीएमआर ने जिले के पांच निजी पैथालॉजी को कोरोना जांच की अनुमति दी है। यह पैथालॉजी शुरुआती दिनों में जांच तो बेहतर तरीके से कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ती गई वैसे-वैसे इनका मनमानी भी शुरू हो गया।
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जांच के बाद पॉजिटिव आने पर यह लोग आईसीएमआर की वेबसाइट पर मरीजों का डाटा अपलोड करने और स्वास्थ्य विभाग को आकड़ा देने में लगातार मनमानी कर रहे हैं। इसकी वजह से सही आकड़े विभाग को नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि इसे लेकर सीएमओ नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं। इसके बाद भी लोगों में सुधार नहीं हो रहा है।

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निगेटिव रिपोर्ट पर 2500, पॉजिटिव आने पर 4500

शहर के कुछ निजी पैथालॉजी जांच के नाम पर मरीजों का शोषण भी कर रहे हैं। रिपोर्ट निगेटिव आने पर 2500 रुपये लिया जा रहा है। जबकि पॉजिटिव आने पर 4500 रुपये की मांग की जा रही है। वहीं, शासन ने पहले ही कोरोना जांच के लिए 2500 रुपये शुल्क तय कर रखे हैं। इसकी मौखिक शिकायत कमिश्नर से भी लोगों ने की है।
 
गंभीर मरीजों की जांच जरूरी
निजी अस्पतालों में इलाज से पहले गंभीर मरीजों की जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसका फायदा निजी पैथालॉजी जमकर उठा रहे हैं। ऑपरेशन से पहले मरीजों की कोरोना जांच कर रहे हैं। और जांच के बाद रिपोर्ट देने में भी देरी कर रहे हैं। ऐसा मामला सामने भी आ चुका है। मोहद्दीपुर के रहने वाले एक बुजुर्ग की मौत के बाद निजी पैथालॉजी ने रिपोर्ट दी थी।

यह निजी पैथालॉजी कर रहे हैं जांच

तिलक पैथालॉजी, लाल पैथ, लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर, गोरखनाथ चिकित्सालय, एसएलआर पैथालॉजी
 
सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी ने बताया कि कुछ निजी पैथालॉजी मरीजों का डाटा अपलोड करने में आनाकानी बरत रहे हैं। इसकी शिकायत मिली है। इसे लेकर पैथालॉजी संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है। अगर सुधार नहीं होता है तो कार्रवाई की जाएगी। रही बात अधिक रुपये लेने की तो अब तक इस तरह की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। फिर भी मामले को दिखवाया जाएगा।

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