गोरखपुर में भ्रष्टाचार: एआईजी स्टांप से पुलिस ने की पूछताछ, मांगे दस्तावेज
सीओ कैंट के नेतृत्व में कैंट पुलिस ने दफ्तर पहुंचकर जांच की, दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम, पद भी पुलिस ने मांगे हैं। यह भ्रष्टाचार पर कार्रवाई डीएम ने किया है।
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गोरखपुर रजिस्ट्री विभाग के भ्रष्टाचार के मामले में बुधवार को कैंट पुलिस रजिस्ट्री दफ्तर जांच के लिए पहुंची। पुलिस ने एआईजी स्टांप और मौजूद सब रजिस्ट्रार से पूछताछ कर कई जानकारी मांगी है। खबर है कि पुलिस ने दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम, पद और मोबाइल फोन नंबर मांगा है। साथ ही किसके पास क्या काम है, यह भी मांगा गया है।
जानकारी के मुताबिक, डीएम विजय किरन आनंद की गोपनीय जांच में भ्रष्टाचार व वसूली की पुष्टि हुई थी। इसी लिहाज से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी, सरकारी पद के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में रजिस्ट्री और आरटीओ के 12 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कैंट और शाहपुर थाने में केस दर्ज किया गया था।
कैंट पुलिस रजिस्ट्री दफ्तर में काम करने वाले दो बिचौलियों को जेल भेज चुकी है। इसके बाद बुधवार को सीओ कैंट श्यामदेव बिंद, इंस्पेक्टर कैंट शशि भूषण राय फोर्स के साथ रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे थे। यहां करीब एक घंटे तक पुलिस टीम मौजूद रही। सीओ ने अफसरों से कई जानकारियां उपलब्ध कराने को कहा है। सीओ कैंट श्याम देव विंद ने बताया कि मामले की जांच जारी है। रजिस्ट्री दफ्तर के कर्मचारियों के नाम का ब्योरा मांगा गया है। साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
उप निबंधक और बिचौलिये के बीच लगातार होती थीं बातें
भ्रष्टाचार मामले में निबंधन एवं आरटीओ कार्यालय के 12 अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो गई है। निबंधन कार्यालय के उप निबंधक द्वितीय केके तिवारी और जिन बिचौलियों पर एफआईआर दर्ज हुई है। इनमें से एक बिचौलिये जितेंद्र जायसवाल की रोज उप निबंधक द्वितीय से सात-आठ बार फोन पर बात होती थी। जितेंद्र जायसवाल, उप निबंधक का करीबी बताया जा रहा है। वह स्थायी कर्मचारी की तरह उनके कार्यालय में काम करता था और हर पटल पर उसका हस्तक्षेप भी था। स्टांप ड्यूटी कमी के मामलों में मौके का निरीक्षण जितेंद्र ही करता था। जांच में पता चला है कि उसके व उप निबंधक के बीच तीन महीने में करीब 800 बार फोन पर बात हुई है। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के बाद डीएम ने जो कार्रवाई की है, उसमें फोन रिकार्ड भी बड़ा आधार है।
रजिस्ट्री कार्यालय : सुविधा शुल्क मांगे तो घुमाएं अफसरों के नंबर
गोरखपुर में भ्रष्टाचार मामले में सख्ती के बाद रजिस्ट्री दफ्तर में अधिकारियों के नंबर चस्पा कर अपील की गई है कि यदि विभाग में कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य के लिए सुविधा शुल्क की मांग करता है तो तत्काल उसकी सूचना संबंधित अधिकारियों के फोन पर दें, कार्रवाई की जाएगी। एडीएम फाइनेंस समेत पांच अधिकारियों के नंबर जारी किए गए हैं। इनमें डीआईजी स्टांप, एआईजी स्टांप के अलावा उप निबंधक प्रथम और उप निबंधक द्वितीय के भी मोबाइल फोन नंबर शामिल हैं।
उधर, डीएम की सख्ती के बाद जिले के सभी रजिस्ट्री दफ्तरों से प्राइवेट कर्मचारी (बिचौलिए) भागे-भागे फिर रहे हैं। जांच-पड़ताल के लिए बुधवार को सीओ कैंट के नेतृत्व में पहुंची पुलिस को देख एक बार फिर विभाग में हड़कंप मच गया। कलेक्ट्रेट परिसर में घूमने वाले रजिस्ट्री, तहसील आदि विभागों में काम करने वाले प्राइवेट (निजी) कर्मचारी भी गायब हो गए हैं। विभाग के सब रजिस्ट्रार और बिचौलिए समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद सोमवार से ही वहां के सभी काम स्थायी कर्मचारी ही निपटा रहे हैं।
यही नहीं सदर तहसील समेत जिले के सभी तहसील कार्यालयों में भी लेखपाल-कानूनगो के प्राइवेट मुंशी समेत वहां काम करने वाले सभी निजी कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। सभी छुट्टी पर चले गए हैं।
इन नंबरों पर करें शिकायत
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) 9454417615
उप महानिरीक्षक निबंधन 9412529709
सहायक महानिरीक्षक निबंधन 9450919121
उप निबंधक प्रथम 9450678989
उप निबंधक द्वितीय 9450555587