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कोरोना: फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट पर लोग कर रहे हवाई यात्रा, लखनऊ एयरपोर्ट पर जांच के दौरान पकड़ा गया यात्री
Sun, 25 Jul 2021 09:48 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 25 Jul 2021 09:48 AM IST
सार
रवीश पैथोलॉजी ने कैंट थाने में दर्ज कराया मामला। दो और पैथोलॉजी का नाम पहले आ चुका है सामने।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
विदेश जाने या अन्य हवाई यात्राओं के लिए जरूरी आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में छेड़छाड़ कर लोग यात्रा कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में फर्जी रिपोर्ट के इस्तेमाल करने पर लखनऊ में यात्री पकड़ा गया है। लखनऊ एयरपोर्ट पर वह गोरखपुर स्थित पैथोलॉजी से जारी रिपोर्ट के आधार पर नाम बदल कर विदेश जाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा था।
इसके बाद रवीश पैथालॉजी के संचालक ने मामले में कैंट थाने में केस दर्ज कराया है। मामला 22 जुलाई का है। वहीं एक अन्य मामले में विजय कुमार मिश्र के नाम से जारी रिपोर्ट को लालू प्रसाद शाह के नाम पर 23 जुलाई को जारी दिखाया गया। उसे भी विदेश जाना था। जब युवक इसका प्रिंट आऊट निकालने पैथालॉजी पर पहुंचा तो उसे पता चला कि इसका इस्तेमाल पहले ही किसी ने कर लिया है। ऐसे में उसकी रिपोर्ट का भी फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर लिया गया है। इसे भी रविश पैथोलॉजी से ही जारी हुआ दिखाया गया। इससे से पता चलता है कि जिले से विदेश और दूसरे राज्यों में जा रहे लोग फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट का उपयोग यात्रा के लिए कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के निवासी दुर्गेश कुमार की आरटीपीसीआर रिपोर्ट 16 जून को जारी हुई थी। इसी रिपोर्ट पर दुर्गेश का नाम बदलकर चंदन राजभर कर दिया गया। इसका खुलासा लखनऊ एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान 22 जुलाई को हुआ। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जब जांच की तो चला कि गोरखपुर के रवीश पैथोलॉजी से रिपोर्ट जारी की गई है।
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इसके बाद रवीश पैथालॉजी के संचालक ने मामले में कैंट थाने में केस दर्ज कराया है। मामला 22 जुलाई का है। वहीं एक अन्य मामले में विजय कुमार मिश्र के नाम से जारी रिपोर्ट को लालू प्रसाद शाह के नाम पर 23 जुलाई को जारी दिखाया गया। उसे भी विदेश जाना था। जब युवक इसका प्रिंट आऊट निकालने पैथालॉजी पर पहुंचा तो उसे पता चला कि इसका इस्तेमाल पहले ही किसी ने कर लिया है। ऐसे में उसकी रिपोर्ट का भी फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर लिया गया है। इसे भी रविश पैथोलॉजी से ही जारी हुआ दिखाया गया। इससे से पता चलता है कि जिले से विदेश और दूसरे राज्यों में जा रहे लोग फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट का उपयोग यात्रा के लिए कर रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के निवासी दुर्गेश कुमार की आरटीपीसीआर रिपोर्ट 16 जून को जारी हुई थी। इसी रिपोर्ट पर दुर्गेश का नाम बदलकर चंदन राजभर कर दिया गया। इसका खुलासा लखनऊ एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान 22 जुलाई को हुआ। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जब जांच की तो चला कि गोरखपुर के रवीश पैथोलॉजी से रिपोर्ट जारी की गई है।
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करें क्यूआर कोड से मिलान
अथॉरिटी ने आईसीएमआर के पोर्टल पर जब रिपोर्ट चेक की तो मरीज का नाम गलत मिला। रिपोर्ट के फर्जी होने की पुष्टि के लिए एयरपोर्ट अधिकारियों ने इसकी सूचना पैथोलॉजी संचालक को दी। संचालक ने जांच की और पता चला कि इस नाम से 22 जुलाई को कोई रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। इस मामला की जांच चल रही थी कि एक और रिपोर्ट के फर्जी होने की जानकारी मिली। विजय कुमार मिश्र के नाम से जारी रिपोर्ट को लालू प्रसाद शाह के नाम पर 23 जुलाई को जारी होना दिखा दिया गया। इसके बाद संचालक अभिषेक मालवीय ने जालसाजी और धोखाधड़ी का मुकदमा कैंट थाने में दर्ज कराया है। कैंट एसओ सुधीर सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।
रविश पैथोलॉजी के संचालक डॉ. अभिषेक मालवीय ने बताया कि लैब की पुराने रिपोर्ट के क्यूआर कोड में हेरफेर पर फर्जी रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसमें लैब के पैड का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह पूरी तरह से फर्जी है। मामले में कैंट थाने में तहरीर दी गई थी, जिस पर मुकदमा दर्ज हो गया है।
गोरखपुर पैथोलॉजी एसोसिएशन के सचिव और आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। कुछ दिन पहले इसी प्रकार की एक अन्य रिपोर्ट जो चंद्रा पैथोलॉजी से जारी हुई थी, वह पैथवर्ड डायग्नोस्टिक के पैड पर प्रिंट की गई थी। इसी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने जनता से अपील है कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट लेने के बाद क्यूआर कोड की स्कैनिंग जरूर कराएं। इसके अलावा वह आईसीएमआर की वेबसाइट पर जाकर अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से रिपोर्ट की जांच कर सकते हैं। अगर रिपोर्ट फर्जी मिलती है तो इसकी सूचना संचालक को दें। डॉ. मंगलेश ने बताया कि इसकी लिखित सूचना सीएमओ कार्यालय को दी गई है।
रविश पैथोलॉजी के संचालक डॉ. अभिषेक मालवीय ने बताया कि लैब की पुराने रिपोर्ट के क्यूआर कोड में हेरफेर पर फर्जी रिपोर्ट बनाई जा रही है। इसमें लैब के पैड का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह पूरी तरह से फर्जी है। मामले में कैंट थाने में तहरीर दी गई थी, जिस पर मुकदमा दर्ज हो गया है।
गोरखपुर पैथोलॉजी एसोसिएशन के सचिव और आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। कुछ दिन पहले इसी प्रकार की एक अन्य रिपोर्ट जो चंद्रा पैथोलॉजी से जारी हुई थी, वह पैथवर्ड डायग्नोस्टिक के पैड पर प्रिंट की गई थी। इसी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। उन्होंने जनता से अपील है कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट लेने के बाद क्यूआर कोड की स्कैनिंग जरूर कराएं। इसके अलावा वह आईसीएमआर की वेबसाइट पर जाकर अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से रिपोर्ट की जांच कर सकते हैं। अगर रिपोर्ट फर्जी मिलती है तो इसकी सूचना संचालक को दें। डॉ. मंगलेश ने बताया कि इसकी लिखित सूचना सीएमओ कार्यालय को दी गई है।