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Gorakhpur: चंदे से हुआ अनाथ झीनक का दाह संस्कार, कुपोषण से हुई थी मौत

Thu, 16 Jun 2022 01:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 16 Jun 2022 01:16 PM IST
सार

खंड विकास अधिकारी कार्यालय में मौजूद आंकड़ों के अनुसार, गगहा क्षेत्र में 626 कुपोषित बच्चे हैं। इन बच्चों में झीनक और उसके भाई करन व अजय का नाम शामिल नहीं है। इस कारण प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के सर्वे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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Orphan Jhinak cremation done with donations in Gorakhpur
चंदे की मदद से अनाथ बालक झीनक का दाह संस्कार किया गया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में कुपोषण और बीमारी से मरने वाले 12 साल के बालक झीनक का दाह संस्कार बुधवार को चंदा एकत्र करके किया गया। रकहट स्थित राप्ती तट पर सात साल के करन ने बड़े भाई झीनक को मुखाग्नि दी। वहीं, जानकारी होने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई नहीं पहुंचा, न ही किसी तरह की मदद दी गई। जनता की सेवा का दावा करने वाले किसी जनप्रतिनिधि की भी संवेदना नहीं जगी।

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बता दें कि मां-बाप की मौत के बाद 12 साल के झीनक और सात व पांच साल के उसके दो भाई अनाथ हो गए। झीनक कूड़ा बीनकर अपना और दोनों भाइयों का पेट पाल रहा था। इसी बीच वह बीमार पड़ गया। ठीक से इलाज नहीं होने और समय पर भोजन नहीं मिलने की वजह से तीनों भाई कुपोषित हो गए। इस संबंध में सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाएं नाकाफी साबित हुईं। यदि किसी का भी लाभ इन बच्चों को मिला होता तो इनकी यह दशा नहीं होती और झीनक की जान नहीं जाती।  

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नहीं कराया गया पोस्टमार्टम

बालक झीनक की मौत किस वजह से हुई अब यह पता नहीं चल पाएगा। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से झीनक के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। मंगलवार शाम झीनक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके निवास पर पहुंची थी, लेकिन शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। इस संबंध में जब सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया, इसका पता लगाया जाएगा।

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बांसगांव एसडीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस जगह पर बच्चे रह रहे थे वहां दोपहर में तहसीलदार एवं चिकित्सकों को भेजा गया था, लेकिन पता चला कि झीनक के दाहसंस्कार के बाद दोनों बच्चे अपने किसी रिश्तेदार के घर खजनी चले गए हैं। बच्चों के बेहतर इलाज एवं जीविका के लिए तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

 

झीनक की मौत से सरकार की योजनाओं पर सवाल

अनाथ बालक झीनक की मौत के बाद सरकार की ओर से कुपोषण खत्म करने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं। हेल्थ कैंप, स्वास्थ्य परीक्षण और पोषाहार जैसी योजनाओं का लाभ झीनक और उसके भाइयों को क्यों नहीं मिल पाया? जबकि  आए दिन इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। इन आयोजन में गांव-गांव में भ्रमण कर कुपोषित बच्चों की सूची तैयार की जाती है। सवाल उठता है कि महीनों से बीमार झीनक तक यह मुहिम क्यों नहीं पहुंच पाई?

पीएचसी हाटा पर छोटे भाइयों संग कई बार गया था झीनक

सवाल यह भी है कि जब तीनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हट गया तो उन्हें सरकारी सुविधाएं क्यों नहीं मिलीं? जबकि बच्चों ने इस बारे में कई बार ग्राम प्रधान से लेकर खंड विकास अधिकारी कार्यालय तक गुहार लगाई थी। मंगलवार शाम गगहा सीएचसी प्रभारी को झीनक के गंभीर रूप से बीमार होने की बात बताई गई तो उन्होंने गंभीरता से न लेते हुए दूसरे दिन स्वास्थ्य परीक्षण कराने की बात कही। वहीं, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाटा में कई बार झीनक अपने भाई करन व अजय के साथ दवा लेने गया था। उसे सिर्फ खांसी और बुखार की दवा देकर लौटा दिया जाता था।

गगहा में हैं 626 कुपोषित बच्चे, इनमें झीनक और उसके भाइयों का नाम नहीं  

खंड विकास अधिकारी कार्यालय में मौजूद आंकड़ों के अनुसार, गगहा क्षेत्र में 626 कुपोषित बच्चे हैं। इन बच्चों में झीनक और उसके भाई करन व अजय का नाम शामिल नहीं है। इस कारण प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के सर्वे पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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