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गोरखपुर विश्वविद्यालय: सात शिक्षकों के एक दिन का वेतन काटने का आदेश, जानिए क्या है वजह

Fri, 07 Jan 2022 07:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 07 Jan 2022 07:10 PM IST
सार

निलंबित आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि अपनी कक्षा लेने और शेष दायित्वों का निवर्हन करने के बाद सत्याग्रह में शामिल होने वाले सात शिक्षकों के एक दिन के वेतन की कटौती के आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।

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Order to deduct one day salary of seven teachers in Gorakhpur University
गोरखपुर विश्वविद्यालय में धरने पर बैठे प्रो कमलेश गुप्ता अन्य शिक्षक। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सात शिक्षकों के एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी हुआ है। ये सभी शिक्षक हिंदी विभाग के निलंबित आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त के समर्थन में 21 दिसंबर 2021 को प्रशासनिक भवन पर 21 दिसंबर को धरने पर बैठे थे।

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कुलपति प्रो. राजेश सिंह को हटाने और उनके कार्यकाल में आय और व्यय की जांच की मांग को लेकर प्रो. कमलेश गुप्त ने मोर्चा खोल रखा है। इसके लिए उन्होंने सत्याग्रह शुरू किया और धरने पर बैठे। उन्होंने कुलपति के खिलाफ सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए। जिसे संज्ञान में लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। साथ ही उनके समर्थन में धरने पर बैठने वाले सात शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
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कुलपति के निर्देश पर कुलसचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने सात जनवरी 2022 को वाणिज्य विभाग के प्रो. अजेय कुमार गप्त, रसायन शास्त्र विभाग के प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, गणित एवं सांख्यिकी विभाग के प्रो. विजय शंकर वर्मा, प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव, प्रो. विजय कुमार, इतिहास विभाग के प्रो. चंद्रभूषण गुप्त एवं हिंदी विभाग के प्रो. अरविंद कुमार त्रिपाठी का एक दिन के वेतन का भुगतान न करने का आदेश जारी किया है।

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सोशल मीडिया पर प्रो. कमलेश की निंदा

हिंदी विभाग के निलंबित आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सात शिक्षकों के वेतन कटौती के आदेश को विधि विरुद्ध और गैर लोकतांत्रिक बताया है। पोस्ट में लिखा है कि अपनी कक्षा लेने और शेष दायित्वों का निवर्हन करने के बाद सत्याग्रह में शामिल होने वाले सात शिक्षकों के एक दिन के वेतन की कटौती के आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के माध्यम से शिक्षकों पर दबाव बनाने की असफल कोशिश है। लोकतांत्रिक तरीके से इसका प्रतिकार किया जाएगा। वहीं शोधार्थियों को दिए गए आश्वासन के विपरीत पैटर्न और प्रश्नपत्रों से परीक्षा कराना एक छल है। यह विभागाध्यक्षों और शिक्षकों को भी असहज बनाने वाला है।

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