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Gorakhpur News: पुराने धंधेबाज ही बांट रहे नशीली गोलियां..कार्रवाई केवल जांच तक सिमटी

Tue, 22 Apr 2025 12:30 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Apr 2025 12:30 AM IST
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Only old dealers are distributing narcotic pills...action limited to investigation only
पुराने धंधेबाज ही बांट रहे नशीली गोलियां..कार्रवाई केवल जांच तक सिमटी
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पहले पटना में पकड़ा गया मामला, फिर लखनऊ में भी खुला खेल



भालोटिया मार्केट में बिना दुकान के केवल लाइसेंस पर हो रहा था सारा धंधा







गोरखपुर। पूर्वांचल में दवा की सबसे बड़ी मंडी भालोटिया मार्केट बड़ी तेजी से नारकोटिक्स की दवाओं की अवैध बिक्री के लिए बदनाम हो रहा है। दो साल में तीसरा मौका है, जब नारकोटिक्स से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्पेशल टीम ने यहां डेरा डाला है। आश्चर्यजनक यह है कि पटना और लखनऊ में पकड़ी गई नशीली दवा और इंजेक्शन के तार सीधे इस मार्केट से जुड़ने के बावजूद अब तक कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जो नजीर साबित हो। इस बार जो जांच हुई, उसमें भी पुराने धंधेबाजों के ही नाम सामने आ रहे हैं।



बीते बुधवार को दिल्ली से नारकोटिक्स ब्यूरो के क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम नशीली दवाइयों के एक चार साल पुराने मामले की छानबीन करने गोरखपुर आई। टीम अपने साथ एक ऐसे शख्स को लेकर आई थी, जिसकी इस मार्केट में पहले एक दवा की दुकान हुआ करती थी। सूत्र बताते हैं कि इस दुकानदार के खिलाफ पहले भी नशीली दवाओं की बिक्री का मामला सामने आ चुका है।
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टीम ने गोरखपुर से लेकर सिद्धार्थनगर तक उसे ही अपने साथ घुमाया। छानबीन में पता लगा कि दुकानदार ही नहीं, इस धंधे में दो फर्मासिस्ट भी शामिल हैं, जिनके नाम पर दवाएं मंगाई व बाहर भेजी गईं। पंजाब की टीम भी गोरखपुर कनेक्शन की जांच कर चुकी है।
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पटना और लखनऊ में भी पकड़ी जा चुकी हैं यहां की दवाएं



पिछले साल पटना में एक दुकान पर नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम ने छापा मारा तो वहां बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं और इंजेक्शन मिले। यह सारा माल गोरखपुर की एक दुकान के नाम पर था, जिसे पटना में उतारा गया था। तीन दिन तक टीम यहां रही और तीन दुकानों के स्टॉक का भी सत्यापन किया था। लेकिन, अंत में पूरा मामला ही समेट दिया गया। जिन दुकानों की जांच हुई, उनको क्लीनचिट दे दी गई। यह भी पता नहीं लगा कि गोरखपुर के नाम से बुक दवाओं का वास्तव में मालिक कौन था। इसके बाद लखनऊ में ऐसा मामला पकड़ा गया। भालोटिया की जिस दुकान से ये दवाएं वहां भेजी गई थीं, उसकी जांच हुई तो पता लगा कि वहां तो दूसरी दुकान संचालित हो रही है। एक ही पते पर दो दुकानों का पंजीकरण कैसे हो गया, यह तथ्य सामने आने के बाद जांच पड़ताल शुरू हुई, लेकिन यह मामला भी फाइलों में ही कहीं गुम हो गया। अब तीसरी बार टीम यहां छानबीन करने आई है।








औषधि प्रशासन के पास केवल बहाना



भालोटिया मार्केट में नकली और प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री तो हो ही रही है, नशीली दवाइयों का धंधा भी गहरे तक पैठ बना चुका है। कुछ साल पहले गीडा व शहर के कुछ अन्य हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं। साल भर के भीतर मेडिकल कॉलेज रोड, कसया रोड समेत जिले के अन्य हिस्सों में भी छोटी-छोटी दुकानों तक नकली दवाएं पकड़ी गई हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में बात केवल जांच तक सीमित रहा है। वहीं अगर किसी दवा विक्रेता के दुकान की कोई मामूली शिकायत दर्ज हुई तो पूरा विभाग दुकान की जांच करने में जुट जाता है। दवा विक्रेता कई बार इसका विरोध भी कर चुके हैं।





यह गंभीर प्रकरण है। जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। एक-एक बिंदु की पड़ताल हो रही है। पूरे रैकेट का पर्दाफाश होगा। कोई भी दोषी नहीं बचेगा।



-पूरन चंद, सहायक आयुक्त, औषधि प्रशासन
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