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राष्ट्रीय युवा दिवस: पहलवान गौरव को भाइयों के हिस्से की खुराक ने दी ताकत, सपना ओलंपिक में स्वर्ण जीतना
Thu, 12 Jan 2023 12:17 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 12 Jan 2023 12:17 PM IST
सार
गौरव ने बताया कि संघर्ष के दिनों को कभी भूल नहीं सकता। जब किसी प्रतियोगिता में मैं पदक हासिल करता हूं तो मां का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जब उस पदक को मां के गले में डालता हूं तो हर प्रतियोगिता को जीतने की प्रेरणा मिलती है।
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गौरव अपनी मां बबिता के साथ।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
किसान परिवार से ताल्लुक रखता हूं। वर्ष-2007 में पिता का निधन हो गया था, दोनों बड़े भाई भी अभी छोटे थे। मां गृहिणी थी, घर चलाने की जिम्मेदारी अचानक उनपर आ गई। मुफलिसी के दौर में मेरी फिटनेस बनी रहे, इसलिए भाइयों के हिस्से का दूध और खुराक भी मुझे मेरी मां देती थी। आज उसी खुराक ने मुझे केवल ताकत ही नहीं दी दम भी भरा।
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मूलरूप से मुजफ्फरनगर में मां बबिता देवी के साथ रहने वाले पूर्वोत्तर रेलवे के स्टॉर पहलवान गौरव बालियान ने विशेष बातचीत में बताया कि महज सात साल की उम्र में पहलवानी शुरू की। मेरे चाचा पहलवान रहे हैं। उन्हें देखकर घर के पास के अखाड़ा से प्रैक्टिस शुरू की। दो बार सीनियर नेशनल कुश्ती का विजेता रहा।
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कहा, वर्ष 2021 में पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में टीसी के पद पर तैनाती हुई। तब से लेकर अब तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किया हूं। मेरा सपना देश को ओलंपिक गेम्स में कुश्ती में स्वर्ण पदक दिलाने का है।
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एक बार में एक हजार सपाट करते हैं गौरव
गौरव ने बताया कि सुबह और शाम तीन-तीन घंटे की प्रैक्टिस करते हैं। इनमें फिजिकल के साथ-साथ गेम होती है। एक बार में एक हजार दंड बैठक करते हैं। सुबह नाश्ते में दूध, बादाम, काजू के साथ अंडा लेते हैं। दोपहर और रात में दो से तीन रोटी के साथ ही भोजन करते हैं। उनका पूरा फोकस प्रोटीन युक्त आहार लेने पर होता है।
हर पदक मेरी मां और कोच को समर्पित
गौरव ने बताया कि संघर्ष के दिनों को कभी भूल नहीं सकता। जब किसी प्रतियोगिता में मैं पदक हासिल करता हूं तो मां का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जब उस पदक को मां के गले में डालता हूं तो हर प्रतियोगिता को जीतने की प्रेरणा मिलती है।
ये हैं उपलब्धियां
हर पदक मेरी मां और कोच को समर्पित
गौरव ने बताया कि संघर्ष के दिनों को कभी भूल नहीं सकता। जब किसी प्रतियोगिता में मैं पदक हासिल करता हूं तो मां का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। जब उस पदक को मां के गले में डालता हूं तो हर प्रतियोगिता को जीतने की प्रेरणा मिलती है।
ये हैं उपलब्धियां
- जूनियर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक
- सीनियर एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक
- अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक
- वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट में रजत पदक