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विवादों से मिल सकती है मकान मालिक व किराएदार को राहत, जानिए क्या है नया किराएदारी कानून

Sun, 10 Jan 2021 02:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 10 Jan 2021 02:19 PM IST
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new tenancy law follow in gorakhpur provide relief to landlord and tenant from disputes
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
यूपी में प्रस्तावित नए किराएदारी कानून से मकान मालिक व किराएदारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। पुलिस अफसरों का कहना है कि जो प्रावधान हैं, उससे कोई मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकेगा। ऐसा हुआ तो विवाद कम होंगे। किराए पर मकान लेकर कब्जा जमाने की नियत कामयाब नहीं होगी। किराएदारी से संबंधित रोजाना औसतन चार मामले थाने में आते हैं। अदालत में भी मामले लंबित होते हैं।  
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जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर शहर में अधिकतर मकान मालिक किराएदार रखते समय करारनामा नहीं करते हैं। सिर्फ दुकान के मामलों में ही अनुबंध किया जाता है। करारनामा नहीं होने पर मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ा लेते हैं। दूसरी तरफ कई ऐसे मामले सामने आते हैं, जब किराएदार मकान नहीं छोड़ते हैं। विवाद करके मकान मालिक को परेशान करते हैं।
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इसे देखते हुए ही राज्य सरकार ने नए कानून का प्रारूप (उप्र नगरीय परिसरों की किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021) तैयार किया है। इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। अभी उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराए पर देने, किराए तथा बेदखली का विनियमन अधिनियम-1972) लागू है।
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केस 1

खजनी के उपेंद्र कुमार मल्ल बेतियाहाता स्थित मुंशी प्रेमचंद पार्क के पॉस कॉलोनी में किराए के मकान में रहते हैं। 20 दिन पहले तहरीर दी और आरोप लगाया कि घर में घुसकर मारपीट हुई है। पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि किराएदारी का विवाद है। उपेंद्र तीन साल से मकान में रह रहा है। अब मकान खाली करने को तैयार नहीं है। भला हो मकान मालिक का, जिसने सीसी टीवी कैमरा लगा रखा था। कैमरे से पुष्टि हुई कि मारपीट नहीं हुई थी।

केस 2
देवरिया के शिवकुमार परिवार के साथ रुस्तमपुर में रहते हैं। पूरा नाम और पता बताने से डरते हैं। उनका कहना है कि एक साल पहले जब मकान किराए पर लिया था तो सात हजार रुपये महीना किराया तय हुआ था। अचानक जनवरी में मकान का किराया दस हजार कर दिया गया। एक साल में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी से परेशान हैं। अब कुछ कह नहीं पा रहे हैं। जैसे ही कुछ कहेंगे, मकान खाली करने का फरमान आ जाएगा।

कानून व्यवस्था के लिए भी जरूरी
किराएदार कभी-कभी पुलिस के लिए चुनौती बन जाते हैं। बिना करारनामा व सत्यापन के रहते हैं, फिर चले जाते हैं। जब घटना होती है, तब पता चलता है कि किराएदार की गतिविधि संदिग्ध थी। लिहाजा, प्रस्तावित कानून से कानून व्यवस्था के लिए कारगर साबित होगा। हर किराएदार का करारनामा बनेगा। पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। विवाद की स्थिति नहीं बनेगी। कई मामले ऐसे सामने आए, जिसमें मारपीट व बवाल तक हुआ था।

ये होगा अनुबंध

नए कानून के मुताबिक, किराएदार और मकान मालिक के बीच एक अनुबंध होगा। मकान मालिक को तीन माह के अंदर अनुबंध पत्र किराया प्राधिकरण में जमा करना होगा। पहले से रखे गए किराएदारों के लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा। किराएदार के लिए नियम है कि उसे रहने वाले स्थल की देखभाल करनी होगी। मकान मालिक की अनुमति के बिना मकान में तोड़फोड़ नहीं की जा सकेगी। मकान मालिक को जरूरी सेवाएं देनी होंगी। मकान मालिक किराएदार को अनुबंध अवधि में बेदखल नहीं कर सकेगा।

साल में पांच से सात फीसदी ही बढ़ा पाएंगे किराया
कानून में यह प्रावधान है कि आवासीय भवनों के किराए में सालाना पांच फीसदी और गैर आवासीय भवनों के किराए में सात फीसदी की वृद्धि ही की जा सकेगी। यदि किराएदार दो माह तक किराया नहीं देता तो मकान मालिक उसे हटा सकता है। एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा। गैर आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।

किराएदार, मालिक दोनों को होगा फायदा

गोलघर के दीपक ने बताया कि इस कानून से किराएदार और मकान मालिक दोनों को फायदा होगा। अनुबंध होने पर मकान में उतने समय के लिए आदमी आराम से रह सकता है और किराया मनमाने ढंग से नहीं बढ़ेगा। मकान मालिक को यह फायदा होगा कि जब भी मकान खाली कराना चाहे अनुबंध खत्म होने से पहले बता कर मकान को खाली करा सकता है।  

मकान मालिक की मनमानी बंद होगी
बक्शीपुर के शैलेश पांडेय ने बताया कि किराए पर कमरा लेते समय मौखिक ही रेट तय हो जाता है। समय गुजरने पर मकान मालिक मनमाने ढंग से किराया बढ़ाकर बता देते हैं, फिर कोई रास्ता नहीं बचता है। एक ही विकल्प रहता है। मकान छोड़ दें या बढ़ा किराया दें। पांच से सात फीसदी किराए की बढ़ोतरी सामान्य कही जा सकती है।
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