MMMUT बीटेक फर्जी प्रवेश: तीन शिक्षक व पांच कर्मचारियों की पकड़ी गई लापरवाही, नोटिस जारी
कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था ही, प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी मिली। प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में फर्जी दस्तावेज के आधार पर बीटेक में 40 छात्रों के प्रवेश के मामले में तीन शिक्षकों और पांच कर्मचारियों को प्रथमदृष्टया दोषी माना गया है। जांच में पाया गया है कि प्रवेश के दौरान इन्होंने लापरवाही बरती है। सभी को नोटिस जारी कर सप्ताह भर में जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है, जो गुण-दोष के आधार पर कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की बैठक में जांच समिति की रिपोर्ट को रखा गया। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तीन शिक्षकों और पांच कर्मचारियों को कार्य में लापरवाही बरतने का आरोपी पाया गया है। प्रवेश के दौरान इन्हें काउंसिलिंग लेटर से लेकर शुल्क तक का मिलान करना था। लेकिन इसके बावजूद फर्जी दस्तावेज लगाने वालों के दस्तावेजों के सत्यापन के साथ ही काउंसिलिंग लेटर का मिलान नहीं किया गया। लिहाजा माना गया है कि इनकी मिलीभगत हो सकती है।
कार्य परिषद के सदस्यों से मिले संकेतों के आधार पर इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के प्रो. एसके सोनी, फिजिक्स एंड मैटेरियल साइंस के प्रो. डीके द्विवेदी तथा केमेस्ट्री के प्रो. पीपी पांडेय की संलिप्तता मिली है। इसके अलावा क्लर्क में रवि मोहन श्रीवास्तव, अविनाश त्रिपाठी व तीन अन्य कर्मचारियों का नाम भी सूची में शामिल है।
इसे भी पढ़ें: ट्रैक्टर चालक की पीट-पीटकर हत्या, घर के अंदर मिला साड़ी से हाथ-पैर बंधा शव
कार्य परिषद की बैठक के बाद शिक्षकों के बीच इनके नामों की चर्चा भी तेज हो गई। इन सभी को नोटिस देकर सप्ताह भर में अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इनका जवाब आने के बाद जांच समिति गुण व दोष के पैमाने पर जांच करेगी और फिर अपनी रिपोर्ट विवि प्रशासन को सौंपगी।
जांच समिति में इन्हें रखा गया
विवि प्रशासन ने शिक्षकों और कर्मचारियों के जवाब का परीक्षण करने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जिसका अध्यक्ष राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राम अचल सिंह बनाया गया है। जबकि, मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के प्रो. राजीव त्रिपाठी एवं एसके अग्रवाल को बतौर सदस्य रखा गया है।
एमएमएमयूटी कुलसचिव प्रो. जय प्रकाश ने कहा कि बीटके में हुए फर्जी प्रवेश के मामले में जांच रिपोर्ट को कार्य परिषद के सामने रखा गया। जिसमें प्रथमदृष्टया लापरवाही बरतने वाले शिक्षक-कर्मचारियों को नोटिस देकर सात दिनों में जवाब मांगा गया है। जवाब को गुण-दोष के आधार पर परीक्षण के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इसे भी पढ़ें: दिनभर काम कर वापस घर लौट रहा था युवक, नदी में गिरा; तलाश जारी
यह था मामला
इसे भी पढ़ें: भोजन के पैसे के लिए अधिवक्ताओं और रंगरेजा रेस्त्रां कर्मियों में मारपीट, डकैती का केस दर्ज
ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था ही, प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी मिली। प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुल्क और आवंटन पत्र के मिलान में पाया गया कि कई छात्रों का प्रवेश सूची से भिन्न नामों से है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया था।