गोरखपुर थोक मंडी से नदारद विटामिन सी की टेबलेट, अधिक रेट पर लोगों को खरीदनी पड़ रही दवा
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कोरोना महामारी के बीच इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक विटामिन-सी की टेबलेट दवा की थोक मंडी भालोटिया मार्केट से नदारद हो गई है। मांग के अनुपात में आपूर्ति कम बताकर थोक दुकानदार विटामिन सी की गोलियां एमआरपी (अधिकम खुदरा मूल्य) से ज्यादा पर बेच रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को यह दवा काफी महंगी मिल पा रही है।
कोरोना महामारी के बीच ही दवा व्यापारियों ने मास्क और सैनिटाइजर की कालाबाजारी शुरू कर दी थी। प्रशासन ने छापेमारी की तो भारी मात्रा में कई दुकानों में मास्क और सैनिटाइजर का स्टॉक मिला। कार्रवाई करते हुए कई दुकानें भी सील की गईं थीं।
इस बीच जब प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) व चिकित्सा विशेषज्ञों ने विटामिन सी के सेवन की बात कही तो लोगों ने इसका उपयोग करना अधिक शुरू कर दिया। इसकी वजह से विटामिन सी दवा अचानक भालोटिया मार्केट से गायब हो गई है।
20 से 26 फीसदी का अंतर है थोक और फुटकर में
थोक और फुटकर के दाम में किसी भी दवा में 20 से 26 फीसदी का अंतर होता है। थोक दुकानदार अभी तक फुटकर दुकानदारों को विटामिन सी भी 23 फीसद के अंतर से बेच रहे थे। लेकिन अब उन्हें प्रिंट मूल्य पर मिलने से फुटकर दुकानदारों को अधिक दामों पर बेचना पड़ रहा है। वह भी सभी फुटकर दुकानों पर उपलब्ध नहीं है।
पेट की कीड़े मारने की दवा की मांग अचानक बढ़ी
भालोटिया में ग्रामीण इलाकों से एलबेंडाजोल की मांग अचानक बढ़ गई है। पहले प्रतिदिन इसके नौ सौ से 12 सौ पत्ते बिकते थे। अब इनकी संख्या दो हजार से 22 सौ तक पहुंच गई है। दुकानदार आशंका जता रहे हैं यदि आपूर्ति नहीं बढ़ी तो इसकी भी कमी हो जाएगी। ग्रामीण इलाकों में लोगों के बीच यह बात फैल गई है कि एलबेंडाजोल की दवा कोरोना से बचाएगी, जबकि इस दवा का उपयोग पेट के कीड़े मारने के लिए किया जाता है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय उपाध्याय ने कहा कि विटामिन सी बाजार से लगभग गायब है लेकिन इसकी कालाबाजारी नहीं की गई है। मांग बढ़ने से यह खत्म हुई है। एलबेंडाजोल की मांग भी बढ़ जाने से इसकी कमी की भी आशंका है। दवा ऑर्डर की गई है।