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डॉक्टर कोरोना जांच रिपोर्ट का करते रहे इंतजार, घायल युवक ने तोड़ दिया दम, जानें क्या है पूरा मामला
Fri, 22 May 2020 08:37 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 May 2020 08:37 AM IST
सार
- राजघाट इलाके के युवक का कोरोना जांच ना होने की वजह से 15 घंटे तक नहीं हुआ आपरेशन
- सिर पर चोट होने की वजह से लखनऊ किया गया था रेफर
- मृतक के बड़े भाई ने पत्र लिखकर नियमों में बदलाव की मांग की
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
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विस्तार
ऑपरेशन से पहले कोरोना जांच रिपोर्ट की अनिवार्यता में एक युवक की जान चली गई। उसके सिर पर लोहे के राड से हमला हुआ था और गंभीर रूप से घायल होने पर मेडिकल कॉलेज से उसे लखनऊ रेफर किया गया था।
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भाई का आरोप है कि केजीएमयू लखनऊ में कोरोना जांच कराई गई और रिपोर्ट के इंतजार में 15 घंटे तक ऑपरेशन ही नहीं हो सका और मौत हो गई। भाई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गंभीर मरीजों के लिए ऐसी किसी जांच की औपचारिकता पूरी किए बिना ही इलाज दिलाने की गुहार लगाई है।
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राजघाट इलाके के चकरा गांव के प्रदीप के मुताबिक, 19 मई को मारपीट में उनके भाई सामंत कुमार के सिर पर चोट आई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों को जेल भी भेजा। भाई को इलाज के लिए जिला अस्पताल फिर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
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20 मई की सुबह दस बजे मेडिकल कॉलेज से लखनऊ रेफर कर दिया गया। बताया गया कि न्यूरो सर्जन ना होने की वजह से ऑपरेशन नहीं हो सकता है। फिर भाई को लेकर लखनऊ के लिए निकले और शाम 6:30 बजे केजीएमयू में भर्ती कराया गया। जहां कोरोना जांच हुई, लेकिन रिपोर्ट आने तक डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया।
अगले दिन सुबह दस बजे तबीयत बिगड़ने लगी और 11 बजे के करीब मौत हो गई। इस सब प्रक्रिया में 15 घंटे का समय लग गया। उन्होंने पत्र के माध्यम से गंभीर मरीजों के तत्काल उपचार की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में जांच रिपोर्ट जल्दी आनी चाहिए ताकि इलाज या फिर ऑपरेशन के अभाव में किसी की जान न जा सके।
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइंस में ऑपरेशन से पहले गंभीर मरीजों की कोरोना जांच अनिवार्य की गई है। इसी लिहाज से चिकित्सकों ने जांच कराई। इस मामले में अब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
अगले दिन सुबह दस बजे तबीयत बिगड़ने लगी और 11 बजे के करीब मौत हो गई। इस सब प्रक्रिया में 15 घंटे का समय लग गया। उन्होंने पत्र के माध्यम से गंभीर मरीजों के तत्काल उपचार की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में जांच रिपोर्ट जल्दी आनी चाहिए ताकि इलाज या फिर ऑपरेशन के अभाव में किसी की जान न जा सके।
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइंस में ऑपरेशन से पहले गंभीर मरीजों की कोरोना जांच अनिवार्य की गई है। इसी लिहाज से चिकित्सकों ने जांच कराई। इस मामले में अब तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।