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महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा कारोबार का मंच
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महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा कारोबार का मंच
गोरखपुर। महिला स्वयं सहायता समूहों को कारोबार के लिए मंच मिलेगी। समूह की सदस्य अब आर्थिक रूप से और सशक्त होंगी। इनकी आय और बचत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सदस्य को मनरेगा के तहत प्रति माह कम से कम पांच दिन का काम दिया जाएगा। हस्तकला और उद्योग से जुड़े समूहों के लिए बायर-सेलर मीट कार्यक्रम और उनके उत्पादों को ऑनलाइन मार्केेटिंग साइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने इसका खाका तैयार किया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशासन ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रत्येक सदस्य को कम से कम पांच सौ रुपये और समूह को पांच हजार रुपये बचत के रूप में जमा करने होंगे। डीएम के मुताबिक प्रत्येक ग्राम पंचायत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कम से कम दो स्वयं सहायता समूह को प्रशिक्षण आदि सुविधाएं देकर आगे बढ़ाया जाएगा। पशुशाला, गोशाला, पोल्ट्री शेड निर्माण कर संचालन के लिए समूहों को दिया जाएगा। पशुपालन विभाग गाय, भैंस पालन और उनकी ब्रीडिंग कराने और अच्छी नस्ल के पशुओं का पालन करने में मदद करेगा। मुर्गी पालन और मत्स्य पालन के लिए संबंधित विभाग चूजे, मछली बीज, दाने आदि उपलब्ध कराएंगे। कृषि विभाग, महिला बाल विकास विभाग, विद्युत वितरण निगम, जिला पूर्ति विभाग, खाद्य प्रसंस्करण विभाग भी इन समूहों को रोजगार, तकनीकी व अन्य सहायता उपलब्ध कराएंगे।
वोकल फॉर लोकल को मिलेगा बड़ा मंच
महिला स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय स्तर पर बनाए गए उत्पादों को अमेजन जैसे बहुराष्ट्रीय ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफार्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की मार्केटिंग (विपणन) ग्राम संगठन, संकुल संगठन के जरिये स्थानीय स्तर पर तो किया ही जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विकास खंड पर एक प्रेरणा शॉप की स्थापना की जाएगी। तहसील और जनपद स्तर पर इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था की जाएगी।
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गोरखपुर। महिला स्वयं सहायता समूहों को कारोबार के लिए मंच मिलेगी। समूह की सदस्य अब आर्थिक रूप से और सशक्त होंगी। इनकी आय और बचत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सदस्य को मनरेगा के तहत प्रति माह कम से कम पांच दिन का काम दिया जाएगा। हस्तकला और उद्योग से जुड़े समूहों के लिए बायर-सेलर मीट कार्यक्रम और उनके उत्पादों को ऑनलाइन मार्केेटिंग साइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। जिलाधिकारी विजय किरन आनंद ने इसका खाका तैयार किया है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशासन ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रत्येक सदस्य को कम से कम पांच सौ रुपये और समूह को पांच हजार रुपये बचत के रूप में जमा करने होंगे। डीएम के मुताबिक प्रत्येक ग्राम पंचायत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कम से कम दो स्वयं सहायता समूह को प्रशिक्षण आदि सुविधाएं देकर आगे बढ़ाया जाएगा। पशुशाला, गोशाला, पोल्ट्री शेड निर्माण कर संचालन के लिए समूहों को दिया जाएगा। पशुपालन विभाग गाय, भैंस पालन और उनकी ब्रीडिंग कराने और अच्छी नस्ल के पशुओं का पालन करने में मदद करेगा। मुर्गी पालन और मत्स्य पालन के लिए संबंधित विभाग चूजे, मछली बीज, दाने आदि उपलब्ध कराएंगे। कृषि विभाग, महिला बाल विकास विभाग, विद्युत वितरण निगम, जिला पूर्ति विभाग, खाद्य प्रसंस्करण विभाग भी इन समूहों को रोजगार, तकनीकी व अन्य सहायता उपलब्ध कराएंगे।
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वोकल फॉर लोकल को मिलेगा बड़ा मंच
महिला स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय स्तर पर बनाए गए उत्पादों को अमेजन जैसे बहुराष्ट्रीय ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफार्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की मार्केटिंग (विपणन) ग्राम संगठन, संकुल संगठन के जरिये स्थानीय स्तर पर तो किया ही जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विकास खंड पर एक प्रेरणा शॉप की स्थापना की जाएगी। तहसील और जनपद स्तर पर इन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था की जाएगी।
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