Maha Ravivar: आज मनाया जा रहा है महा रविवार, श्रद्धालु रखते हैं व्रत
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। यह व्रत इस दिन से प्रारंभ होकर 52 व्रतों की संख्या में करना चाहिए। इस व्रत के देवता सूर्य हैं। सूर्य ग्रह की शांति के लिए किया जाता है।
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भगवान सूर्य की उपासना का पर्व महा रविवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के आखिरी रविवार को महा रविवार या बड़ा रविवार कहा जाता है। इस व्रत को करने से समस्त कष्टों का नाश होता है और व्रती को सुख की प्राप्ति होती है।
यह है व्रत का महात्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। यह व्रत इस दिन से प्रारंभ होकर 52 व्रतों की संख्या में करना चाहिए। इस व्रत के देवता सूर्य हैं। सूर्य ग्रह की शांति के लिए किया जाता है। सूर्य समस्त ग्रहों के अधिपति होने से इस व्रत को करने से समस्त ग्रहों के भी दोष समाप्त हो जाते हैं और भगवान सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि व्रती समस्त कष्टों से विमुक्त होकर असीम सुखों को प्राप्त करता है। इसका उल्लेख नारद पुराण मे भी है। इस दिन का व्रत आरोग्यता प्रदान कराने वाला होता है। मनुष्य का मान-सम्मान बढ़ता है।
यह है पूजन विधि
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, स्नान आदि के बाद परमात्मा का ध्यान करें। सूर्य नारायण को अर्घ्य प्रदान करें। विधि-विधान से आराधना करें। दिनभर निराहार रहें। सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार मीठा भोजन ग्रहण करें। सूर्य पुराण का पाठ, सूर्य मंत्र का जप, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे समस्त परेशानियां दूर होती हैं। त्वचा के रोगों से विमुक्ति के लिए यह उत्तम व्रत है। अगले दिन व्रत का पारण करें।
अनंत चतुर्दशी आज, महिलाएं रखेंगी व्रत
अनंत चतुर्दशी का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। हृषीकेश पंचांग के मुुताबिक इस दिन शतभिषा नक्षत्र और धृति योग है। मान्यतानुसार, इस दिन महिलाएं सौभाग्य की रक्षा एवं सुख-ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, व्रती महिला अनंत चतुर्दशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद व्रती भगवान विष्णु के समक्ष 14 ग्रंथीयुक्त अनंत सूत्र (चौदह गांठ युक्त धागा) को रखकर भगवान विष्णु के साथ ही अनंत सूत्र की पूजा करें। पूजा में रोली, मोली, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि का इस्तेमाल कर भगवान को समर्पित करते हुए ‘ऊं अनंताय नम:’ मंत्र का जप करें। पूजन करने के बाद रक्षासूत्र को पुरुष दाएं हाथ और महिला बाएं हाथ में बांध लें। इसके अनंत ब्राह्मण या किसी पात्र को दान करके या भोजन करवाकर स्वयं भोजन ग्रहण करें। इस दिन नमक रहित भोजन करना चाहिए।