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Mafia Vinod Upadhyay: तीन बार किस्मत ने दिया साथ...अबकी गच्चा खा गया माफिया विनोद
Wed, 10 Jan 2024 01:07 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 10 Jan 2024 01:07 PM IST
सार
बाराबंकी से शूटर अंशू दीक्षित ने अपने साथी संग माफिया विनोद उपाध्याय का पीछा किया था। उस समय लखनऊ के हजरतगंज थाने में जाकर विनोद बच गया था। किस्मत ने तीन बार माफिया का साथ दिया, इस बार भी सेटिंग की थी लेकिन सफल नहीं हुआ।
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माफिया विनोद उपाध्याय
- फोटो : सोशल मीडिया।
विस्तार
माफिया विनोद उपाध्याय को किस्मत ने तीन बार मौका दिया था। मुठभेड़, गैंगवार फिर शूटरों से वह बच गया, लेकिन इस बार गच्चा खा गया और मारा गया। पुलिस मुठभेड़ में वह वर्ष 2005 में ही मारा गया होता, तब उसने पहली बार बड़ी वारदात की थी, लेकिन उसे सत्ता के करीबी होने का फायदा मिला था।
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बताया जाता है कि पुलिस ने उसकी घेराबंदी कर ली थी और वह बिल्कुल गन प्वाइंट पर था, लेकिन एक मंत्री के जनप्रतिनिधि बेटे ने उसकी जान बचा ली। वर्ष 2007 में लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में गोलीकांड के समय भी उसके दो साथी मारे गए, लेकिन वह बच गया। फिर 2016 में उसके ही करीबी रहे एक बदमाश ने उसकी सुपारी दे दी थी। बाराबंकी से शातिर शूटर अंशू दीक्षित अपने साथी के साथ उसके पीछे पड़ा, लेकिन तेजी से गाड़ी भगाते हुए वह हजरतगंज थाने में घुस गया था और बच गया।
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जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2005 में विनोद ने अपने साथियों संग मिलकर नेपाल के माफिया जयनारायण मिश्र और उसके रिश्तेदार की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस के इकबाल पर सवाल उठा तो तीसरे दिन ही लखनऊ जाते समय संतकबीरनगर में माफिया विनोद और उसके साथी की पुलिस ने घेराबंदी कर दी थी।
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बताया जाता है कि उसने तब पुलिस पर एक गोली भी चलाई थी, लेकिन इसी बीच सत्ता के करीबी जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप की वजह से मामला मैनेज हो गया और पुलिस के गन प्वाइंट से वह बच गया। इसके बाद ठेके के वर्चस्व को लेकर लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में लालबहादुर और विनोद के बीच गैंगवार हुआ था। इसमें विनोद के दो साथी मारे गए थे। विनोद बच निकला।
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विनोद के एक करीबी दोस्त की मानें तो मई 2016 की बात है। विनोद अपने एक दोस्त के साथ सफारी गाड़ी से लखनऊ जा रहा था और उसकी मुखबिरी हो गई थी। बाराबंकी में उसकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की गई तो उसने रफ्तार बढ़ा दी और भागने लगा। लखनऊ के हजरतगंज थाने में जाने के बाद ही माफिया विनोद ने अपनी गाड़ी रोकी थी। तब वह बच गया था। इसके बाद वह गोरखपुर में कम ही रहता था। उसने लखनऊ में ही ठिकाना बना लिया और बेटी की पढ़ाई भी वहीं से कराता था।
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विनोद को विधायक समझते थे आसपास के लोग
लखनऊ में जहां पर वह रहता था, वहां आसपास के लोग उसे विधायक समझते थे। उसके घर पर नेताओं का आना-जाना होता था। इस बात की जानकारी पुलिस को तब हुई थी, जब फरारी के समय उसकी तलाश में पुलिस लखनऊ स्थित आवास तक पहुंची थी।
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विनोद के एक करीबी दोस्त की मानें तो मई 2016 की बात है। विनोद अपने एक दोस्त के साथ सफारी गाड़ी से लखनऊ जा रहा था और उसकी मुखबिरी हो गई थी। बाराबंकी में उसकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की गई तो उसने रफ्तार बढ़ा दी और भागने लगा। लखनऊ के हजरतगंज थाने में जाने के बाद ही माफिया विनोद ने अपनी गाड़ी रोकी थी। तब वह बच गया था। इसके बाद वह गोरखपुर में कम ही रहता था। उसने लखनऊ में ही ठिकाना बना लिया और बेटी की पढ़ाई भी वहीं से कराता था।
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विनोद को विधायक समझते थे आसपास के लोग
लखनऊ में जहां पर वह रहता था, वहां आसपास के लोग उसे विधायक समझते थे। उसके घर पर नेताओं का आना-जाना होता था। इस बात की जानकारी पुलिस को तब हुई थी, जब फरारी के समय उसकी तलाश में पुलिस लखनऊ स्थित आवास तक पहुंची थी।