गोरखपुर की अमरुतानी: बस गईं कॉलोनियां...मगर पता बताते हिचकते हैं बाशिंदे
कॉलोनी में व्यापारी, शिक्षक जैसे समाज के अच्छे लोगों ने मकान बनाया तो इसकी सूरत बदल गई है। अब यहां की जमीनें जो कभी 50 हजार रुपये डिसमिल होती थी, वह अब लाखों में पहुंच चुकी है। शहर का हिस्सा होने की वजह से लोग यहां पर तेजी से जमीन की खरीद फरोख्त भी कर रहे हैं।
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महेवा स्थित अमरूतानी के एक हिस्से में अब कॉलोनी भी बन गई है। यहां के वाशिंदों ने गेट लगाकर अमरूतानी की ओर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। कॉलोनी के आसपास तेजी से निर्माण भी हो रहा और प्लाटिंग भी हो गई है, लेकिन एक बड़ा हिस्सा आज भी बदहाल है। स्मैक और कच्ची शराब का अड्डा बन गया।
आए दिन आपराधिक घटनाएं होती रहीं। अब यहां बसे लोगों को रिश्तेदार व परिचितों को अमरूतानी में आवास बताने में भी संकोच होता है। वे चाहते हैं कि इस इलाके में भी विकास हो, ताकि बदनामी का दाग धुल जाए और अमरूतानी को एक पहचान मिले।
यहां पर न तो सड़क है और न ही बिजली, पानी का इंतजाम। इसके चलते यह इलाका विकसित नहीं हो पाया। इस इलाके के रहने वाले बिरजू निषाद बताते हैं- एक समय था कि ट्रांसपोर्टनगर बंधे तक अमरूतानी का ही इलाका था। बाद में ट्रांसपोर्टनगर के आसपास के इलाकों का विकास हो गया और अब वहां पर कॉलोनी भी बस गई है।
खुद राजघाट पुल से पहले बाएं साइड में भी एक कॉलोनी और मैरिज हाउस बना है, जो कभी अमरूतानी का हिस्सा हुआ करता था। यहां पर लोग बसे और अंदर अमरूतानी से आने वालों से परेशान हुए तो कॉलोनी को अमरूतानी से अलग कर उसे नई पहचान दे दी गई।
एक इलाके ने न्यू ट्रांसपोर्टनगर कॉलोनी से नई पहचान बना ली तो एक हिस्सा अघोरपीठ की वजह से मशहूर हो गया। अब इन दोनों कॉलोनी के रास्तों को बंद कर दिया गया है, ताकि अमरूतानी की ओर से कोई न आ सके और कॉलोनी सुरक्षित रहे।
रामलखन साहनी बताते हैं-पहले जब रास्ता खुला था तो पुलिस वाले अमरूतानी में कार्रवाई करते थे तो इस ओर चले आते थे। कई बार विवाद भी हो चुका है और छींटाकशी जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, लेकिन जब से कॉलोनी के रास्ते को बंद कर दिया गया है, तब से अब यह पूरी तरह से सुरक्षित हो गई है। अब उतनी परेशानी नहीं होती है। कभी कभार सड़क पर इस तरह के लोग दिख जाते हैं, लेकिन पुलिस भी रहती है, तो परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
कॉलोनी में सड़क, बिजली सब दुरुस्त
अमरूतानी से अलग होकर बने कॉलोनियों को अब पूरी तरह से व्यवस्थित कर दिया गया है। पुराने अमरूतानी की तरह यहां पर लकड़ी के खंभे और कच्ची सड़क नहीं हैं। बल्कि, पक्का सड़क और व्यवस्थित बिजली के खंभे हैं, जिसकी मदद से अब कोई भी इस हिस्से को यह नहीं कह सकता है कि कभी यह अमरूतानी का हिस्सा रहा हो। आज यह पूरी तरह से व्यवस्थित हो चुका है।
अच्छे लोगों ने बनाया मकान तो बदली सूरत
इस कॉलोनी में व्यापारी, शिक्षक जैसे समाज के अच्छे लोगों ने मकान बनाया तो इसकी सूरत बदल गई है। अब यहां की जमीनें जो कभी 50 हजार रुपये डिसमिल होती थी, वह अब लाखों में पहुंच चुकी है। शहर का हिस्सा होने की वजह से लोग यहां पर तेजी से जमीन की खरीद फरोख्त भी कर रहे हैं। मंगलवार को जाने पर दिखा कि कई लोग अपने मकान का निर्माण भी करवा रहे हैं और तेजी से प्लाटिंग हुई है।
बोले स्थानीय लोग
विकास हो तो बंद हो जाएगा अपराधअमरूतानी में अगर विकास हो जाए तो अपराध बंद हो जाएगा। पुलिस की सक्रियता की वजह से पहले से अपराध कम तो हुआ है, लेकिन इस पर स्थायी रूप से अंकुश तभी लग सकता है, जब इस पूरे इलाके को विकसित कर दिया जाए। क्योंकि अमरूद के बाग में आबादी कम होने का ही फायदा कच्ची शराब वाले उठाते हैं और नशे का सामान बेचते हैं। - उमेश कुमार।
विकास हो तभी मिलेगी सुकून
अमरूतानी पहले ट्रांसपोर्ट नगर तक फैला हुआ था। इसके एक हिस्से का विकास प्राइवेट लोगों ने कर दिया है। फायदा भी हुआ, कई लोग आकर बस गए और अब उसे अमरूतानी के नाम से जाना भी नहीं जाता है। अभी एक बड़ा इलाका अमरूतानी के तौर पर विकसित है, इसमें विकास की जरूरत है। तभी जाकर यहां के लोगों को सुकून मिलेगा। - भृनुनाथ निषाद।