खुशखबर: तीन महीने बाद जल्द ही पाठकों तक पहुंचेगी कल्याण पत्रिका, मिलेगी ये खास सुविधा
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गोरखपुर के गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली पत्रिका कल्याण के अंक पाठकों को जल्द ही पढ़ने को मिलेंगे। तीन महीने बाद पत्रिका के प्रकाशन के बाद गीता प्रेस प्रबंधन इसे पाठकों तक पहुंचाने में लग गया है।
लॉकडाउन के कारण गीता प्रेस बंद था। ऐसे में यहां से 94 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका कल्याण का प्रकाशन भी बंद हो गया था। जिससे अप्रैल और मई के अंक पाठकों को नहीं भेजे जा सके। लॉकडाउन के बाद अनलॉक 1.0 में गीता प्रेस खोल दिया गया।
खुलने के बाद यहां सबसे पहले कल्याण के अप्रैल, मई और जून के अंक प्रकाशित करने का काम शुरू हुआ। तीनों महीनों के कल्याण के अंक अब छपकर तैयार हो चुके हैं और इसे भेजने का काम गीता प्रेस प्रबंधन ने शुरू करा दिया है।
दिल्ली और मुंबई को छोड़ बाकी सभी शहरों में कल्याण के अप्रैल के अंक को भेजा जा रहा है। एक दिन में पत्रिका की 25 हजार प्रतियां डिस्पैच की जा रही हैं। अप्रैल के अंक भेजे जाने के बाद बारी-बारी मई और जून के अंक भी पाठकों तक भेज दिए जाएंगे।
तीनों माह के अंक पाठकों को भेजे जाएंगे
कल्याण पत्रिका की वार्षिक बुकिंग होती है। पाठकों से 12 मासिक अंकों के पैसे एक साथ जमा करा लिए जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान कल्याण के अप्रैल और मई के अंक प्रकाशित नहीं हो सके थे लेकिन पाठकों को ऑनलाइन कल्याण पढ़ाया गया था।
इसके बावजूद इसके गीता प्रेस प्रबंधन की ओर से पाठकों को जून के अंक भेजने से पूर्व अप्रैल और मई के अंक छपवा कर भेजे जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि पाठकों को कहीं ये न लगे कि पैसा उन्होंने 12 अंकों के दिए जबकि उन तक गीता प्रेस ने 10 अंक ही पहुंचाए। ऐसे में सभी 12 अंक पाठकों तक पहुंचाए जाएंगे।
गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि लॉकडाउन के बाद खुले गीता प्रेस में तेजी से कल्याण के छपाई का कार्य पूरा कराया गया। अब पाठकों तक इसे भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रतिदिन कल्याण की 25 हजार प्रतियां दिल्ली और मुंबई को छोड़ देशभर में भेजने का काम चल रहा है।