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दस्तक पखवाड़ा: 46 लाख की आबादी में ढूंढे जाएंगे कालाजार के मरीज, होगा निशुल्क इलाज

Tue, 09 Mar 2021 04:48 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 09 Mar 2021 04:48 PM IST
सार

  • 10 से 24 मार्च तक दस्तक पखवाड़े के दौरान ढूंढे जाएंगे बुखार के रोगी
  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनाएंगी मरीजों की सूची, होगा निशुल्क इलाज

 

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Kala azar patients will be found in Gorakhpur
गोरखपुर जिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले की 46 लाख की आबादी के बीच कालाजार के रोगी ढूंढे जाएंगे। इनकी तलाश भी दस्तक पखवाड़े के माध्यम से ही होगी। गांव-गांव से बुखार के रोगियों को ढूंढ कर उनकी सूची आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनाएंगी। सूची को एएनएम के माध्यम से ब्लॉक मुख्यालय भेजा जाएगा। इनमें जिन बुखार के रोगियों में कालाजार के लक्षण होंगे, उनकी जांच कराई जाएगी और बीमारी की पुष्टि होने पर निशुल्क इलाज किया जाएगा।

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यह जानकारी जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय ने दी। बताया कि कालाजार रोगियों की खोज के अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और पाथ संस्थाएं तकनीकी स्तर पर, जबकि सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) संस्था स्वास्थ्य संचार के स्तर पर विभाग का सहयोग करेंगी। कुल 42 स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा चुकी हैं।
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कालाजार की दृष्टि से गोरखपुर मंडल संवेदनशील है। पूरे मंडल में कुल 42 केस मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा देवरिया और कुशीनगर जिले के हैं। प्रदेश में गोरखपुर मंडल ही एक ऐसा मंडल है, जहां चारों जिलों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में कालाजार के केस मिले हैं।  
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बालू मक्खी से फैलती है बीमारी

डॉ. एके पांडेय ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। समय से इलाज न मिलने पर 95 फीसदी मामलों में मृत्यु का खतरा रहता है।  

सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि दस्तक अभियान में पड़ोसी जिलों की स्थिति को देखते हुए इस बार कालाजार के रोगियों को ढूंढने पर भी विशेष जोर होगा। इसके अलावा इंसेफेलाइटिस, टीबी के मरीज भी ढूंढे जाएंगे।

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