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अमर उजाला लाइव: गोरखपुर में स्कूल से छुट्टी के बाद जाम और खतरों का इम्तिहान, बच्चों के साथ परिजन परेशान

Thu, 13 Apr 2023 03:22 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Apr 2023 03:22 PM IST
सार

 अमर उजाला ने पड़ताल की तो देखने को मिला कि 20 से 25 फीट चौड़ी इस सड़क पर दोनों तरफ से लोग चार व दो पहिया वाहन लेकर प्रवेश कर जाते हैं। जिन्हें बच्चों को नहीं लेना होता है वे भी दूसरे मार्ग का विकल्प होने के बाद भी इस मार्ग में मय वाहन प्रवेश करने से गुरेज नहीं करते दिखाई पड़े।

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Jam and dangers test after school leave in Gorakhpur
जोखिम में जान: कार्मेल स्कूल छूटने के बाद लगा जाम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में आरटीओ चौराहे से लेकर सिटी मॉल तिराहे तक की सड़क पर मौजूद आधा दर्जन से अधिक स्कूलों के बच्चे हर दिन छुट्टी के बाद जाम और खतरों का इम्तिहान देते हैं। नाजुक कंधों पर भारी बस्तों का बोझ और सड़क पर गाड़ियों की कतार के बीच तिल रखने की जगह नहीं। इनके बीच से निकल कर अपने अभिभावक, रिक्शे या ऑटो वाले तक पहुंचना किसी परीक्षा से कम नहीं। लेकिन इन बच्चों की सुरक्षा की परवाह न ही स्कूल संचालकों को है और न ही प्रशासनिक अमले को।

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इस मार्ग पर सुबह 6:30 बजे के पहले और शाम को चार बजे के बाद यातायात सामान्य रहता है। वहीं, दोपहर के समय स्कूलों की छुट्टी के वक्त ऐसी आपाधापी मचती है कि बच्चों को लेने आने वाले उनके अभिभावक भी घबरा जाते हैं। लेन पर आधा दर्जन से अधिक स्कूल हैं। सभी मशहूर हैं, जहां आसानी से दाखिला नहीं मिलता। मगर बच्चों की सुरक्षा के मामले में ज्यादातार स्कूल प्रबंधन उतने ही लापरवाह दिखाई पड़ते हैं।
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दोपहर 1:30 बजे से 15 या 20 मिनट के अंतराल पर जैसे ही इन स्कूलों में छुट्टी की घंटियां बजती हैं, स्कूल के बाहर चार पहिया, दो पहिया वाहनों, ऑटो, रिक्शा आदि का ऐसा रेला लगता है कि बच्चों की सुरक्षा हाशिए पर आ जाती है। जिन बच्चों की अंगुलियां, अभिभावकों के हाथों में होती हैं, वे तो फिर भी थोड़ा सुरक्षित दिखाई पड़ते हैं, मगर जो बच्चे साइकिल या पैदल चलकर आरटीओ तिराहे या दूसरी तरफ सिटी मॉल के पास खड़े अपने ऑटो या रिक्शा तक पैदल जाते हैं, वे हमेशा खतरे में होते हैं।

बुधवार की दोपहर अमर उजाला ने पड़ताल की तो देखने को मिला कि 20 से 25 फीट चौड़ी इस सड़क पर दोनों तरफ से लोग चार व दो पहिया वाहन लेकर प्रवेश कर जाते हैं। जिन्हें बच्चों को नहीं लेना होता है वे भी दूसरे मार्ग का विकल्प होने के बाद भी इस मार्ग में मय वाहन प्रवेश करने से गुरेज नहीं करते दिखाई पड़े। छोटे-छोटे बच्चों के बिल्कुल पास से सटकर गुजरने वाले ये वाहन कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। कहीं-कहीं तो अभिभावक बीच रास्ते में ही दो पहिया वाहन खड़े कर बच्चों को स्कूल में लेने के लिए जाते हुए नजर आए तो वहीं, कुछ लोग स्कूलों के मुख्य द्वार के सामने ही चार पहिया वाहन खड़े कर अपने बच्चों को बैठाते नजर आए।
 

खुले नालों में बच्चों के गिरने का डर

आरटीओ चौराहे से लेकर सिटी मॉल रोड पर करीब 200 मीटर तक तीन स्कूलों के सामने नाला निर्माण चल रहा है, सबसे ज्यादा सांसत यहीं पर बच्चों को हो रही है। गाड़ियों, ऑटो और रिक्शे की भीड़ के बीच सड़क पर चलने के लिए रास्ता नहीं मिलने पर बच्चे नाले के स्लैब पर चढ़कर जाने को मजबूर दिखे। अभी कुछ दूरी तक नाले पर स्लैब भी नहीं पड़ सका है।

नाला खुला होने की वजह से बच्चों के नाले में गिरने का खतरा भी बना हुआ है। बच्चे तो बच्चे, पैदल चलकर आने वाले उनके परिजन भी जाम से परेशान नजर आए। चिलचिलाती धूप अलग से मुश्किल बढ़ाती नजर आई। पसीने से तरबतर लोग कभी खुद के चेहरे से पसीना पोछ रहे थे तो कभी अपने लाडलों के। जाम की यह स्थित इस रूट पर दोपहर 3:30 बजे तक बनी रही।

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ट्रैफिक पुलिस को भी घुड़की देकर घुस जाते हैं लोग
सिटी मॉल की तरफ तो यातायात पुलिस बहुत सक्रिय नहीं दिखती है मगर आरटीओ चौराहे के पास दो-तीन होमगार्ड डटे रहते हैं। पसीने से भीगे होमगार्ड वाले चार पहिया वाहनों से आने वालों को स्कूल वाली लेन में जाने से रोकने की कोशिश करते दिखाई पड़ रहे थे मगर कई लोग इन्हें भी घुड़की देकर आगे बढ़ ले रहे थे।

कार्मल रोड पर बसों से बच्चों को खतरा
आरटीओ चौराहे से सिटी मॉल वाली सड़क पर स्थित स्कूलों के बच्चों की सुरक्षा को लेकर हो रही लापरवाही और जाम जैसा नजारा कार्मल रोड यानी रेलवे बस स्टेशन से लेकर पुलिस लाइंस तिराहे तक का भी है। इस सड़क पर भी एक-दूसरे से सटे तीन बड़े स्कूल हैं। करीब 35 से 40 फीट चौड़ी इस सड़क पर स्कूलों की छुट्टी के समय दोपहर एक बजे से लेकर दो बजे तक चलना मुश्किल हो जाता है।

एक घंटे तक पूरी सड़क जाम की वजह से चोक हो जाती है। सड़क की दोनों पटरियों पर ऑटो और ई-रिक्शा के अलावा रोडवेज बसों का भी जमावड़ा लग जाता है। छुट्टी के समय जब बच्चों का हुजूम सड़क पर निकलता है, उस समय भी रोडवेज की बसों की कतार लगी रहती है। बच्चे सड़क पार करने तक के लिए बसों के बीच फंसकर जद्दोजहद करते हुए नजर आते हैं।

प्रशासन की सलाह भी नहीं मानते

Jam and dangers test after school leave in Gorakhpur
सिविल लाइन स्कूल की छूट्टी होने के बाद जाम होने कारण नाला पर से जाते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला।
करीब पांच-छह साल पहले ऐसे मार्ग जिनपर दो या उससे अधिक स्कूल स्थित हैं, जिला प्रशासन ने उन स्कूलों के खुलने और बंद करने के समय में अंतराल करा दिया था। कुछ समय तक स्कूलों ने भी इसका पालन किया लेकिन फिर अपने मुताबिक समय बदल दिया।

वर्तमान में आरटीओ चौराहे से लेकर सिटी मॉल तिराहे तक और रेलवे बस स्टेशन से सिविल लाइंस तिराहे के सभी स्कूलों के खुलने और बंद होने के बीच महज 15 से 20 मिनट का अंतराल है। जानकारों का कहना है कि यह अंतराल यदि 30 मिनट का हो जाए तो काफी राहत मिल जाए। साथ ही स्कूल प्रबंधन अपने-अपने स्कूलों के सामने अपने कर्मचारी तैनात करें जो बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें।

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नाला निर्माण के बाद मिलेगी राहत
आरपीएम एकेडमी के चेयरमैन अजय शाही ने कहा कि सभी स्कूलों ने आपसी समन्वय से स्कूल के खुलने व छूटने के समय में 10-20 मिनट का अंतराल रखा है। वर्तमान में स्कूलों के मार्ग पर नाला निर्माण का काम चल रहा है, काम के खत्म होने के बाद काफी हद तक जाम से निजात मिल जाएगी। अभिभावकों को भी अपने वाहनों को दूर खड़ा कर बच्चों को स्कूल लेने आना चाहिए।

10 हजार बच्चे जाते हैं, तब कारें न आएं
एचपी चिल्ड्रेन एकेडमी के डायरेक्टर अनन्य प्रताप शाही ने कहा कि दोपहर में डेढ़ से ढाई बजे के बीच इस मार्ग पर मौजूद स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 10 हजार बच्चों की छुट्टी एक साथ होती है, जाम की मुख्य वजह चार पहिया वाहन हैं, अगर स्कूल के छूटने के समय चार पहिया वाहनों को इस मार्ग पर आने से रोक दिया जाए तो निश्चित ही जाम से निजात मिल जाएगी।

 

ऑटो, ई-रिक्शा वाले जाम लगवाते हैं

अभिभावक रितेश सिंह ने कहा कि पहले कार से स्कूल आता था, लेकिन जाम के कारण अब स्कूल मोटरसाइकिल से आता हूं। इस रोड पर ऑटो चालकों और ई-रिक्शा से लगने वाले जाम वाहन को लेकर स्कूल के डायरेक्टर से शिकायत की गई, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ट्रैफिक पुलिस खास ध्यान नहीं देती
अभिभावक राज प्रकाश मिश्रा ने कहा कि चार पहिया वाहन से बच्चा लेने आता जरूर हूं, लेकिन कार को लेकर इस रोड पर लगने वाले जाम के कारण नहीं आता हूं, गाड़ी को स्कूल से दूर खड़ी कर पैदल ही आता हूं। इसकी यातायात या पुलिस के जवान में जाम से निजात दिलाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।

अभिभावक कारों से न आएं
यातायात एसपी डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि आरटीओ चौराहे से सिटी मॉल तक की सड़क पर जाम की वजह अभिभावकों का नियम का पालन न करना है। लगातार अनाउंस कराया जाता है कि अगर अभिभावक बच्चों को कार से छोड़ने जा रहे हैं तो गाड़ी सीधी लेकर जाएं, बीच में गाड़ी न मोड़ें, क्योंकि यही वहां जाम की वजह बनता है।

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