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गोरखपुर का हाल: नियमों को दरकिनार कर अस्पतालों में हो रहा है लिंग परीक्षण और गर्भपात

Thu, 13 Apr 2023 01:09 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Apr 2023 01:09 PM IST
सार

डॉ. एके सिंह ने बताया कि इस साल दुष्कर्म के दो मामलों में गर्भपात कराया गया है। दोनों मामलों में कोर्ट का आदेश था। दोनों पीड़िताओं के साथ दुष्कर्म हुआ था। मामले में सीएमओ, बाल रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में एक मेडिकल बोर्ड का गठन भी किया गया था।

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abortions test being done in hospitals bypassing rules in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Social Media

विस्तार

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के नियमों को दरकिनार कर अवैध अस्पतालों में भ्रूण के लिंग परीक्षण और गर्भपात का खेल हो रहा है। उल्लिखित घटनाएं इसकी तस्दीक भी कर रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग चंद अस्पतालों पर कार्रवाई कर अपना पल्ला झाड़ ले रहा है। जबकि, इस खेल में 100 से अधिक अस्पताल शामिल हैं, जो मोटी रकम लेकर गर्भपात करा रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के पास न तो प्रशिक्षित डॉक्टर है और न ही स्वास्थ्यकर्मी। इतना ही नहीं इन अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है।

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नियम के तहत 12 सप्ताह से पहले गर्भवती स्वेच्छा से गर्भपात करवा सकती है। लेकिन, 12 से 24 सप्ताह तक की गर्भवती को गर्भपात के लिए कारण सीएमओ और उनके निर्देशन में गठित कमेटी को बताना होगा। इसके बाद ही महिला को गर्भपात का अधिकार मिलेगा, वह भी शहर के 25 चुनिंदा अस्पतालों में, जो एमटीपी के तहत स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड है। अगर इन अस्पतालों को छोड़कर कहीं कोई महिला गर्भपात करवा रही है तो कानूनी रूप से गलत है।
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शर्तों के साथ करा सकती हैं गर्भपात
पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) के नोडल अधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि एमटीपी एक्ट के तहत 12 सप्ताह की गर्भवती खुद गर्भपात करवा सकती है। लेकिन, इसके लिए भी वह उन्हीं अस्पतालों में गर्भपात करवा सकती है, जो एमटीपी के तहत रजिस्टर्ड हों। इसके अलावा 12 से लेकर 24 सप्ताह के बीच वाली गर्भवती को शर्तों साथ गर्भपात का अधिकार है।

इसके लिए वाजिब वजह सीएमओ और उनकी कमेटी को बताना होगा। कमेटी की दी गई रिपोर्ट के बाद ही डॉक्टर उनका गर्भपात कर सकते है। डॉ. एके सिंह ने बताया कि एमटीपी एक्ट के तहत विवाहित महिलाओं की विशेष श्रेणी, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता व दिव्यांग और नाबालिग जैसी अन्य संवेदनशील महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी समय सीमा 24 सप्ताह थी, जबकि अविवाहित महिलाओं के लिए यही समय सीमा 20 सप्ताह है। लेकिन, अब इसे बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया है।

रजिस्टर्ड अस्पतालों में ही गर्भपात करा सकने का अधिकार

डॉ. एके सिंह ने बताया कि शहर के 25 स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने अस्पताल रजिस्ट्रेशन के समय एमटीपी के लिए आवेदन किया था, जिनको विभाग की तरफ से अनुमति मिली है। ये डॉक्टर 12 सप्ताह के अंदर वाली गर्भवतियों का गर्भपात बिना किसी सूचना के कर सकते हैं। जबकि 12 सप्ताह से ऊपर वाली गर्भवतियों को इसके लिए विभाग को सूचना देने का नियम है।

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दुष्कर्म के दो मामलों में हुआ है गर्भपात
डॉ. एके सिंह ने बताया कि इस साल दुष्कर्म के दो मामलों में गर्भपात कराया गया है। दोनों मामलों में कोर्ट का आदेश था। दोनों पीड़िताओं के साथ दुष्कर्म हुआ था। मामले में सीएमओ, बाल रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में एक मेडिकल बोर्ड का गठन भी किया गया था। बोर्ड ने मरीज को देखने के बाद ही गर्भपात का फैसला लिया था।

पीसीपीएनडी एक्ट नोडल डॉ. एके सिंह ने कहा कि भ्रूण के लिंग परीक्षण के लिए इस्तेमाल हो रहीं आठ पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील किया गया है। इस मशीन का इस्तेमाल पैथालॉजी संचालक भ्रूण जांच के लिए करते थे। इसके अलावा पांच अस्पतालों को नियम विरुद्ध गर्भपात कराने पर सील किया गया है। इनमें संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। मामला न्यायालय में चल रहा है।
 

केस-एक
भटहट स्थित सत्यम हॉस्पिटल में झोलाछाप ने महिला का गर्भपात करा दिया। इस दौरान अधिक रक्तस्राव होने लगा। महिला की स्थिति बिगड़ी तो स्वास्थ्यकर्मियों ने बीआरडी रेफर कर दिया। लेकिन, इससे पहले अस्पताल में ही महिला की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए संचालक को जेल भेज दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया।

केस-दो
भटहट में पापुलर पैथालॉजी नाम से बिना रजिस्ट्रेशन के पैथाेलाॅजी चलाई जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली कि यहां पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से भ्रूण के लिंग की जांच की जाती है। जांच के बाद एक अस्पताल में गर्भपात भी कराया जाता है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की तो पैथालॉजी अवैध मिली। इस दौरान पैथालॉजी को सील करते हुए अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया गया।



केस- तीन
मोगलहा में केएमसी अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था। मुखबिर की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की तो पता चला कि अस्पताल में चार मरीज भर्ती है। इनमें एक गर्भवती थी, जिसका इलाज चल रहा था। विभाग के मुताबिक महिला 18 सप्ताह की गर्भवती थी, जिसको अस्पताल संचालक ने गर्भपात के लिए भर्ती कराया था। विभाग ने अस्पताल को सील करते हुए मरीजों को बीआरडी रेफर कर दिया था।

केस-चार
गोला बाजार स्थित मां हॉस्पिटल पर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से भ्रूण के लिंग की जांच की जाती थी। बिना किसी रजिस्ट्रेशन के मशीन का संचालन किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग को मुखबिर से सूचना मिली। टीम ने जब जांच की तो पता चला कि अस्पताल में लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात के लिए गोला के एक अस्पताल में भेज दिया जाता था। विभाग ने अल्ट्रासाउंड मशीन को मौके पर सील कर दिया।
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