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क्रिमिनल जस्टिस: ...ताकि फिर किसी बेगुनाह को न बनाया जाए डॉक्टर भगवानदास, पुलिस कर रही बदलाव

Mon, 26 Jun 2023 02:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 26 Jun 2023 02:43 PM IST
सार

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि पुलिस, केस तहरीर के आधार पर दर्ज करती है। लेकिन कार्रवाई, जांच के आधार व साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है। पुलिस, गंभीर मामलों में जांच कर कार्रवाई कर रही है। दोषी को सख्त सजा मिल सके, इसके लिए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस चार्जशीट दाखिल करती है और बेगुनाह फंसाए गए लोगों का नाम भी केस से बाहर किया जाता है।

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Innocent people get caught in trap of immediate arrest in gorakhpur
डॉक्टर भगवान दास। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वर्ष 2008 में चौरीचौरा का एक नर्सिंग होम चलाने वाले प्रतिष्ठित डॉ. भगवानदास हत्या के आरोप में घिर गए। उनके साले ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन देकर डॉक्टर ने बहन की हत्या कर दी। आनन-फानन पुलिस ने केस दर्ज किया और डॉक्टर को जेल भेज दिया। तब उनके बेटे की उम्र महज पांच साल थी। हाईकोर्ट से 18 अप्रैल 2022 में वह बेगुनाह साबित हो गए।

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वह बाहर तो आए, लेकिन तब तक उनकी जिंदगी में सब कुछ बदल चुका था। बेटा भी जवान हो चुका था। ऐसे एक डॉक्टर ही नहीं, व्यापारी और तमाम प्रतिष्ठित हस्तियों समेत तमाम पीड़ित हैं, जिन्हें बेगुनाह होते हुए भी सजा या पुलिसिया उत्पीड़न झेलना पड़ा। ऐसे हालात से बचाने के लिए कप्तान ने आपराधिक न्याय प्रणाली (क्रिमिनल जस्टेस सिस्टम) को मजबूत करने पर जोर दिया है। इस तरह बारीक जांच के जरिए बेगुनाह लोग उत्पीड़न से बचाए जा रहे हैं।
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डॉ. भगवानदास बताते हैं, न बेटे का बचपना देख पाया और न ही उसे पिता का समुचित प्यार-दुलार मिला। पेशा भी तबाह हो गया। हालांकि, अब नर्सिंग होम को डॉक्टर ने अपनी मेहनत से फिर से खड़ा कर दिया है, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल है कि जिंदगी के 14 साल उन्होंने उस गुनाह की सजा काटी, जो उन्होंने की ही नहीं।
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यह घटना महज बानगी भर है पुलिस की कार्यप्रणाली की। आज से कुछ वर्षों पहले तक पुलिस, तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लेती थी। फिर आरोपी को बिना जांच पूरी किए ही जेल भेज दिया जाता था। इस चक्कर में कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें इंसाफ पाने में कई साल और रुपये खर्च कर देने पड़ते हैं।

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हालांकि, अब पुलिस ने केस दर्ज करने में देरी छोड़कर जांच में समय देने के फार्मूले पर काम शुरू किया है, तो इसका फायदा बेगुनाहों को मिलने लगा है। जब भी किसी को साजिशन फंसाने की कोशिश की है, पुलिस ने हत्या, हमला करने जैसे गंभीर धाराओं में केस तो दर्ज किया, लेकिन जांच में पर्याप्त समय दिया। इसका फायदा उन बेगुनाहों को मिला, जो फंसाए गए थे। उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा।

वहीं, कई ऐसे मामले भी हैं, जिसमें पुलिस ने दबाव में आरोपी को जेल तो भेज दिया, लेकिन बाद में जांच में निर्दोष पाए जाने पर रिपोर्ट भेजकर जेल से रिहा भी कराया।

केस एक

Innocent people get caught in trap of immediate arrest in gorakhpur
क्रिमिनल जस्टिस सीजन 3 - फोटो : social media

बेगुनाह थे फिर भी सात महीने काटे जेल में
17 फरवरी 2022: गुलरिहा इलाके के सराय गांव में शिक्षक इरशाद के सिर पर हमला किया गया था। वह कोमा में था। कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। बहन ने पट्टीदारों पर आरोप लगा दिया। पुलिस जांच से जान तो गई थी कि आरोपी बनाए गए लोग बेगुनाह हैं, लेकिन दबाव में चार लोगों इस्लाम, मुस्तकिन, उसकी पत्नी हस्रआरा और नजमा को जेल भेज दिया।

पुलिस ने जांच को भी बंद नहीं किया। बाद में एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने घटना का पर्दाफाश करते हुए बताया कि बहन आफरीन ने ही अपने दोस्त सूरज यादव के साथ मिलकर हत्या की थी। फिर दोनों आरोपी जेल भेजे गए और बेगुनाह फंसे लोगों की रिपोर्ट भेजकर पुलिस ने सात महीने बाद उन्हें जेल से छुड़ाया था।

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केस दो
मकान मालिक को महीनों झेलना पड़ा दुष्कर्म का केस
25 दिसंबर 2022:
गोरखनाथ इलाके के काली मंदिर के पास एक किशोरी की किराए के मकान में लाश मिली थी। मकान मालिक पर दुष्कर्म कर हत्या का आरोप लगाया गया। पोस्टमार्टम में खुदकुशी की पुष्टि हुई, लेकिन घरवालों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने तत्काल हत्या और दुष्कर्म का केस दर्ज किया।

जांच की तो पता चला कि घर के पास का ही एक युवक उसकी अश्लील फोटो ले लिया था और उसके दबाव में उसने खुदकुशी कर ली थी। पुलिस ने हत्या की धारा को खुदकुशी के लिए उकसाने में बदलकर जांच पूरी कर ली , लेकिन इतनी मेहरबानी की कि बेगुनाह फंसाए गए मकान मालिक को जेल नहीं भेजा गया। फिर भी पांच महीने मकान मालिक को उत्पीड़न झेलना ही पड़ा।
 

केस तीन

व्यापारी ने हत्या का केस तो झेला, बस जेल नहीं गए
20 फरवरी 2023:
कैंट इलाके के इंजीनियरिंग कॉलेज के पास अवनीश नाम के युवक की लाश मिली। वह नशे का आदी था। मगर, घरवालों ने विदेश भेजने वाली रजिस्टर्ड फर्म के जिम्मेदारों व एक व्यापारी पर हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया। पुलिस ने तहरीर पर जरा भी आपत्ति नहीं की और हत्या का केस दर्ज कर लिया, लेकिन एक बार भी पुलिस ने बेगुनाह फंसाए गए लोगों को परेशान नहीं किया। जांच की और सच सामने आ गया। अब पुलिस इस केस को खत्म करने की तैयारी में है। बेगुनाह फंसे लोग भी सुकून की सांस लेते हुए व्यापार कर रहे हैं।

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एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि पुलिस, केस तहरीर के आधार पर दर्ज करती है। लेकिन कार्रवाई, जांच के आधार व साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है। पुलिस, गंभीर मामलों में जांच कर कार्रवाई कर रही है। दोषी को सख्त सजा मिल सके, इसके लिए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस चार्जशीट दाखिल करती है और बेगुनाह फंसाए गए लोगों का नाम भी केस से बाहर किया जाता है। रंजिश में कोई किसी को फंसा सकता है, लेकिन पुलिस जांच कर वहीं कार्रवाई करती है, जिससे कोई निर्दोष न फंसने पाए।



 
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