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युवा दिवस: जुगनू कभी रोशनी के मोहताज नहीं होते, किसान परिवार के युवक ने ऐसे लिखी कामयाबी की इबारत

Wed, 12 Jan 2022 03:32 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 12 Jan 2022 03:32 PM IST
सार

किसान परिवार में जन्मे हैमर थ्रो खिलाड़ी फारूख ने मुफलिसी में कामयाबी की इबारत लिखी। अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उसने कांस्य पदक हासिल किया।

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Hammer thrower Farooq yuva diwas story
कोच जानिसार अख्तर व फारूख अहमद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना, बिना मेहनत के तख्तों-ताज नहीं मिलते। ढूंढ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी, क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज नहीं होते। किसी शायर की ये पंक्तियां गोरखपुर विश्वविद्यालय के हैमर थ्रो खिलाड़ी फारूख अहमद पर खूब फब्ती है। फारूख ने मंगलोर विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता (4-7 जनवरी) के हैमर थ्रो में कांस्य पदक हासिल कर गोरखपुर विश्वविद्यालय का नाम पूरे देश में रौशन किया है।

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मूलरूप से प्रतापगढ़ के रामपुर बजहा गांव निवासी फारूख के पिता अब्दुल रऊफ किसान हैं। किसान के घर जन्म लेने के बाद फारूख ने दो वक्त की रोटी के लिए पूरे परिवार को मेहनत करते करीब से देखा है। कई बार ऐसा हुआ कि डाइट और किट के लिए भी दूसरों की तरफ देखना पड़ता था। शुरुआत में हैमर नहीं था तो रोटेशन बनाने के लिए प्लेट, मेडिसिन बॉल और राड से प्रैक्टिस करनी पड़ी, मगर फारूख ने कभी हार नहीं मानी और कठिन परिश्रम के दम पर कामयाबी की इबारत लिखी।
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अमर उजाला संवाददाता से बातचीत में फारूख ने बताया कि उन्होंने साधारण परिवार में जन्म लिया। परिवार में किसी का खेल से कोई नाता नहीं था, ऐसे में उनके मामा और राज्यस्तरीय खिलाड़ी इश्तेयाक ने उनका 10 वर्ष की उम्र से मार्गदर्शन करना शुरू किया। आगे चलकर जानिसार अख्तर ने भी खेल के प्रति उनके समर्पण को देखतर उनका मार्गदर्शन शुरू किया।
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शुरुआत में ज्यादा सफलता न मिली तो निराशा भी हुई, मगर फारूख ने कभी हिम्मत नहीं हारी। फारूख का सपना देश के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करना है। उनका कहना है कि किसी प्रतियोगिता में जब तिरंगा लहराया जाता है तो उनका जोश दोगुना हो जाता है।

 

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता अब्दुल रऊफ, मां सबीना बानो, भाई शाहरुख के साथ कोच इश्तेयाक, जानिसार अख्तर के साथ गोरखपुर विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रो हिमांशु पांडेय, डॉ राजबीर सिंह, प्रो विजय चहल और बहादुर प्रसाद यादव पीजी कॉलेज के प्रबंधक अजय यादव को आदि को दिया।

एमए प्रथम वर्ष के हैं छात्र

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध बहादुर प्रसाद यादव मेमोरियल पीजी कॉलेज भटनी में फारूख एमए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। यहां उनके कोच प्रवीण कुमार ने उनके प्रदर्शन को निखारने में मदद की। उनकी उपलब्धि पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश सिंह ने भी शुभकामनाएं दी हैं।

ये हैं उपलब्धियां

2016 : स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में चतुर्थ स्थान
2017 : स्कूल स्टेट प्रतियोगिता में रजत पदक
2018 : जूनियर नेशनल रांची में चतुर्थ स्थान
2020 : आल इंडिया यूनिवर्सिटी में आठवां स्थान
2020 : ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम खेलो इंडिया खेलो में तीसरा स्थान
2020 : स्टेट यूपी में कांस्य
2022 : अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में कांस्य पदक



 

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