रिलायंस जियो डीजीएम मौत मामला: विधायक बनने की थी इच्छा, नहीं बने तो नाम में ही लगा लिया 'विधायक'
अभिषेक ने सेंट एंड्रयूज कॉलेज में बीए में प्रवेश लिया और यहीं से छात्र राजनीति में उतर गए। छात्र राजनीति की तरफ उनका झुकाव इंटर से ही था। वर्ष 2001 में उन्होंने सेडिका में महामंत्री का चुनाव भी लड़ा, हालांकि मामूूली अंतर से चुनाव हार गए।
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गोरखपुर सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज (सेडिका) से कभी छात्रसंघ महामंत्री का चुनाव लड़े अभिषेक की इच्छा विधायक बनने की थी, लेकिन जब राजनीति में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने अपने नाम के आगे ही विधायक लगा दिया। छात्र राजनीति से शहर में पहचान बनाने वाले अभिषेक शुक्ला उर्फ अभी की अचानक मौत से उनके शुभचिंतक और साथी सभी हैरान हैं।
मूलत: महराजगंज निवासी अभिषेक लंबे समय तक दीवान बाजार में माता-पिता और बहन के साथ रहते थे। अब उन्होंने सिंघड़िया के पास आवास बनवा लिया था। राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज से इंटर की पढ़ाई की। इस दौरान वे मारपीट की कई घटनाओं से चर्चा में आए और उनके साथी उन्हें पहाड़ी कहकर बुलाने लगे। लेकिन यह उन्हें पसंद नहीं था। अभिषेक का मिलना-जुलना गोरखपुर के सभी बड़े नेताओं से था।
वर्ष 2001 में छात्रसंघ महामंत्री का लड़ा चुनाव
अभिषेक ने सेंट एंड्रयूज कॉलेज में बीए में प्रवेश लिया और यहीं से छात्र राजनीति में उतर गए। छात्र राजनीति की तरफ उनका झुकाव इंटर से ही था। वर्ष 2001 में उन्होंने सेडिका में महामंत्री का चुनाव भी लड़ा, हालांकि मामूूली अंतर से चुनाव हार गए। धर्मवीर सिंह ने यह चुनाव जीता था। इसके बाद कॉलेज में चुनाव ही नहीं कराया गया। जिसे लेकर आंदोलन भी हुआ, जिसमें अभिषेक समेत पांच लोग अरेस्ट हुए।
इसी बीच उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। जिसके विरोध में वे हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट के निर्णय पर ही आगे की पढ़ाई हरनही, खजनी से पूरी की। चुनाव लड़ने के लिए ही उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और वर्ष 2005-06 में उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा लेकिन यहां भी सफलता नहीं मिली।
छात्रनेताओं में शोक की लहर
गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव पांडेय ने बताया कि अभिषेक मौत के एक दिन पहले तक उनके संपर्क में थे। पारिवारिक कलह से परेशान भी थे, लेकिन अचानक इतना बड़ा कदम उठा लेंगे, यह नहीं सोचा था। सुसाइड नोट में अभिषेक ने न्याय दिलाने की बात लिखी है। उनका अचानक चले जाना बहुत ही स्तब्ध करने वाला है। सेडिका के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष चंद्रभाल पांडेय ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे चुनाव में उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मेरे अच्छे दोस्त थे उनका असमय चले जाना बहुत दुखदायी है।
2010 में की थी लव मैरिज
अभिषेक ने पांच जुलाई 2010 को बिछिया निवासी कुमुद सिंह से प्रेम विवाह किया। दोनों एक साथ ही पढ़ते थे। इस लव मैरिज के खिलाफ घरवाले थे लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया। कुछ दिनों बाद अभिषेक एक टेलीकॉम कंपनी में नौकरी करने लगे। कुछ दिनों तक दिल्ली रहने के बाद पत्नी के साथ लखनऊ शिफ्ट हो गए। इसके बाद प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में भी हाथ अजमाया। वर्ष 2019 में एक कंपनी भी बनाई। उनके सहपाठी गबीश दुबे बताते हैं, अभी बहुत ही हंसमुख और जिंदादिल इंसान थे। उनके आत्महत्या करने की खबर से स्तब्ध हूं। वह अपनी दो साल की बेटी से बहुत प्यार करते थे।
11 अक्तूबर को था जन्मदिन
अभिषेक का जन्मदिन 11 अक्तूबर था। 1982 में जन्मे अभिषेक के मित्रों ने फेसबुक पर उनके साथ की तस्वीरें पोस्ट की हैं। अभिषेक सोशल मीडिया पर भी बहुत सक्रिय थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला, जम्मू के राज्यपाल मनोज सिन्हा सहित कई बड़े नेताओं के साथ की फोटो उनके फेसबुक वॉल पर हैं।