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Gorakhpur News: गुआक्टा के सदस्यों ने किया प्रदर्शन...नियंता से धक्का-मुक्की
Sun, 14 Jul 2024 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 14 Jul 2024 01:05 AM IST
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फोटो
मांगाें को कार्य परिषद में शामिल नहीं करने पर जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक संगठन गुआक्टा ने शनिवार को लंबित मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन किया। कुलपति कार्यालय में जाने को लेकर शिक्षकों और मुख्य नियंता के बीच तीखी नोकझोंक के दौरान धक्का-मुक्की हो गई। करीब 15 मिनट तक चले हंगामे के बाद शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला और अपनी मांगों को रखा।
गुआक्टा के करीब 50 सदस्य करीब 1:30 बजे प्रशासनिक भवन के बाहर एकत्र हुए और इसके बाद नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय पहुंचे। गेट बंद होने की वजह से बाहर खड़े होकर विरोध किया। इसके बाद जब अंदर जाने के लिए दरवाजा खुला तो सभी शिक्षक अंदर जाने लगे। मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने इसका विरोध किया और केवल प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने को कहा।
इसपर उनकी शिक्षकों से तीखी बहस फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। थोड़ी देर में सीओ कैंट अंशिका वर्मा और एसएचओ कैंट रणधीर मिश्रा के साथ पुलिस फोर्स आई और उन्होंने शिक्षकों को शांत कराकर कुलपति से वार्ता कराई।
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रेट का विरोध करेगा गुआक्टा
गुआक्टा के महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर गुआक्टा का प्रतिनिधिमंडल कई बार कुलपति से मिला है, लेकिन अभी तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई। इससे शिक्षकों में काफी रोष है। कॉलेज के शिक्षकों को रेट के लिए बाधित करना यूजीसी के नियम के विरुद्ध है। कहा कि रेट परीक्षा से शिक्षकों को मुक्त नहीं रखा गया और 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित नहीं की तो रेट परीक्षा को होने नही देंगे। पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों का विभिन्न मदों में भुगतान लंबित है, इसे जल्द जारी किया जाए। विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में महाविद्यालय के शिक्षकों का समुचित प्रतिनिधित्व हो। अध्यक्ष एवं महामंत्री को आवश्यक रूप से सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कॉलेजों को शोध केंद्र के रूप में मान्यता नहीं दे रहा है। इसके साथ ही चार वर्षीय पाठ्यक्रम को लेकर भेदभाव कर रहा है जिससे सकल नामांकन अनुपात प्रभावित होगा। इस दौरान अध्यक्ष प्रो. लोकेश त्रिपाठी, प्रो. अनंत कीर्ति तिवारी, डॉ. केएन मिश्र, डॉ. राकेश प्रताप सिंह, डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह, डॉ. विवेक शाही, सुरेंद्र चौहान सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
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मांगाें को कार्य परिषद में शामिल नहीं करने पर जताया विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक संगठन गुआक्टा ने शनिवार को लंबित मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने प्रदर्शन किया। कुलपति कार्यालय में जाने को लेकर शिक्षकों और मुख्य नियंता के बीच तीखी नोकझोंक के दौरान धक्का-मुक्की हो गई। करीब 15 मिनट तक चले हंगामे के बाद शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल कुलपति से मिला और अपनी मांगों को रखा।
गुआक्टा के करीब 50 सदस्य करीब 1:30 बजे प्रशासनिक भवन के बाहर एकत्र हुए और इसके बाद नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय पहुंचे। गेट बंद होने की वजह से बाहर खड़े होकर विरोध किया। इसके बाद जब अंदर जाने के लिए दरवाजा खुला तो सभी शिक्षक अंदर जाने लगे। मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने इसका विरोध किया और केवल प्रतिनिधिमंडल को अंदर जाने को कहा।
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इसपर उनकी शिक्षकों से तीखी बहस फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। थोड़ी देर में सीओ कैंट अंशिका वर्मा और एसएचओ कैंट रणधीर मिश्रा के साथ पुलिस फोर्स आई और उन्होंने शिक्षकों को शांत कराकर कुलपति से वार्ता कराई।
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रेट का विरोध करेगा गुआक्टा
गुआक्टा के महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर गुआक्टा का प्रतिनिधिमंडल कई बार कुलपति से मिला है, लेकिन अभी तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई। इससे शिक्षकों में काफी रोष है। कॉलेज के शिक्षकों को रेट के लिए बाधित करना यूजीसी के नियम के विरुद्ध है। कहा कि रेट परीक्षा से शिक्षकों को मुक्त नहीं रखा गया और 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित नहीं की तो रेट परीक्षा को होने नही देंगे। पिछले तीन वर्षों से शिक्षकों का विभिन्न मदों में भुगतान लंबित है, इसे जल्द जारी किया जाए। विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में महाविद्यालय के शिक्षकों का समुचित प्रतिनिधित्व हो। अध्यक्ष एवं महामंत्री को आवश्यक रूप से सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कॉलेजों को शोध केंद्र के रूप में मान्यता नहीं दे रहा है। इसके साथ ही चार वर्षीय पाठ्यक्रम को लेकर भेदभाव कर रहा है जिससे सकल नामांकन अनुपात प्रभावित होगा। इस दौरान अध्यक्ष प्रो. लोकेश त्रिपाठी, प्रो. अनंत कीर्ति तिवारी, डॉ. केएन मिश्र, डॉ. राकेश प्रताप सिंह, डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह, डॉ. विवेक शाही, सुरेंद्र चौहान सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।