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महराजगंज में राज्यपाल: आत्मनिर्भर बनाने वाले समूहों को दिया 61 लाख 50 हजार रुपये का चेक, स्टॉल पर लगे उत्पादों का किया अवलोकन
Mon, 01 Nov 2021 05:06 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 01 Nov 2021 05:06 PM IST
सार
स्टॉलों का अवलोकन करने के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कारीगरों की कुछ समस्याएं भी सुनी और उन्हें दूर करने का आश्वासन भी दिया।
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महराजगंज में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आंनदीबेन पटेल ने सोमवार को महराजगंज कलेक्ट्रेट परिसर में लगे स्वयं सहायता समूह के चार, ओडीओपी के तीन तथा कृषि उत्पादन संगठनों के एक सहित कुल आठ स्टॉलों का अवलोकन किया। जहां पर कारीगरों की कुछ समस्याएं भी सुनी और उन्हें दूर करने का आश्वासन भी दिया। हालांकि राज्यपाल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले समूहों को 61 लाख 50 हजार रुपये का चेक देकर पुरस्कृत भी किया।
मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह करमहा निवासी हिरमती ने बताया कि क्लस्टर लेवल फेडरेशन के तहत पांच समूह एमएनए, गंगा, अंबेडकर, शिवा और मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह का ग्रुप बनाया गया। जिसमें पांचों समूह की कुल 50 महिलाएं शामिल रहीं। ब्लॉक मिशन मैनेजर द्वारा समूह के सदस्यों को रोजगार के बारे में नियमित बैठक कर पहले प्रशिक्षण दिया गया। उसके उपरांत सरकार की तरफ से पहले किस्त में 1 लाख 10 हजार तथा दूसरे किस्त में 15 हजार रुपये यानी कुल 1 लाख 25 हजार प्रति समूह के मुताबिक सहायता राशि दी गई। जिससे पांचों स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा एलईडी लाइट, झालर, हॉर्पिक्स, सैनिटाइजर, हैंडवास, फिनायल, धनिया, हल्दी, मिर्च, गरम मसाले और सब्जी मसाले की पाउडर सहित अगरबत्ती, मोमबत्ती, कृतिम फूल बनाने का रोजगार किया जा रहा है। समूहों के द्वारा उत्पाद की जाने वाली सामग्री बाजारों से काफी सस्ती और अच्छी हैं।
मिला अनुदान तो रोजगार को बढ़ाया आगे
कलेक्ट्रेट परिसर में ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तीन स्टॉल लगे थे। वहीं एक स्टॉल इमरान फर्नीचर के संचालक मोहम्मद इमरान निवासी आजाद नगर ने कहा कि गत तीन वर्ष पहले उन्हें रोजगार करने के लिए सरकार से 9 लाख रुपये अनुदान मिले थे। उस रकम से उन्होंने एक जिला एक उत्पाद के तहत फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। जो आज तीन वर्ष बाद कारोबार 12 लाख रुपये का हो गया है। इस कारोबार में आठ लोगों को प्रतिदिन स्थायी रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। इन्होंने कहा कि अगर कोरोना संक्रमण का दौर नहीं होता तो शायद यह कारोबार इससे अधिक हो गया होता। इन्होंने अपने फर्नीचर स्टॉल में डायनिंग सेट, सोफा सेट, ड्रेसिंग सहित अन्य मॉडल प्रस्तुत किया।
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12 सौ लोगों को दिला चुके प्रशिक्षण
कलेक्ट्रेट परिसर में कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक स्टॉल कृषि उत्पादन संगठन द्वारा लगाया गया था। कृषि उत्पादन स्टॉल के संचालक नागेंद्र पांडेय ने कहा कि करीब 21 वर्ष पहले बगैर सरकारी अनुदान लिए ही वर्मी कम्पोस्ट का कारोबार शुरू किया था। जो वर्तमान में कारोबार को बढ़ाते हुए वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए तीन सौ बेड तैयार कर चुके हैं। जिसमें एक वर्ष में करीब 50 से 60 लाख रुपये की लागत आती है। वहीं वर्मी कम्पोस्ट तैयार होने के बाद आसानी से 15 से 20 फीसदी की बचत हो जाती है। इतना ही नहीं वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर भी खोल चुके हैं। जहां पर एक वर्ष में 12 सौ लोगों को वर्मी कम्पोस्ट के लिए प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। इन्होंने कहा कि इस कारोबार के माध्यम से प्रतिदिन 25 से 30 परिवारों को स्थायी रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। वहीं स्वच्छता को देखते हुए वर्मी कम्पोस्ट केंद्र पर दो किलोवाट का सोलर सिस्टम तथा जलसंरक्षण के लिए तालाब भी बनवा रखा है। स्टॉल में वर्मी कम्पोस्ट से तैयार की गई धान की पौधे तथा सब्जियों के फलों को लगाया गया।
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मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह करमहा निवासी हिरमती ने बताया कि क्लस्टर लेवल फेडरेशन के तहत पांच समूह एमएनए, गंगा, अंबेडकर, शिवा और मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह का ग्रुप बनाया गया। जिसमें पांचों समूह की कुल 50 महिलाएं शामिल रहीं। ब्लॉक मिशन मैनेजर द्वारा समूह के सदस्यों को रोजगार के बारे में नियमित बैठक कर पहले प्रशिक्षण दिया गया। उसके उपरांत सरकार की तरफ से पहले किस्त में 1 लाख 10 हजार तथा दूसरे किस्त में 15 हजार रुपये यानी कुल 1 लाख 25 हजार प्रति समूह के मुताबिक सहायता राशि दी गई। जिससे पांचों स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा एलईडी लाइट, झालर, हॉर्पिक्स, सैनिटाइजर, हैंडवास, फिनायल, धनिया, हल्दी, मिर्च, गरम मसाले और सब्जी मसाले की पाउडर सहित अगरबत्ती, मोमबत्ती, कृतिम फूल बनाने का रोजगार किया जा रहा है। समूहों के द्वारा उत्पाद की जाने वाली सामग्री बाजारों से काफी सस्ती और अच्छी हैं।
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मिला अनुदान तो रोजगार को बढ़ाया आगे
कलेक्ट्रेट परिसर में ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तीन स्टॉल लगे थे। वहीं एक स्टॉल इमरान फर्नीचर के संचालक मोहम्मद इमरान निवासी आजाद नगर ने कहा कि गत तीन वर्ष पहले उन्हें रोजगार करने के लिए सरकार से 9 लाख रुपये अनुदान मिले थे। उस रकम से उन्होंने एक जिला एक उत्पाद के तहत फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। जो आज तीन वर्ष बाद कारोबार 12 लाख रुपये का हो गया है। इस कारोबार में आठ लोगों को प्रतिदिन स्थायी रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। इन्होंने कहा कि अगर कोरोना संक्रमण का दौर नहीं होता तो शायद यह कारोबार इससे अधिक हो गया होता। इन्होंने अपने फर्नीचर स्टॉल में डायनिंग सेट, सोफा सेट, ड्रेसिंग सहित अन्य मॉडल प्रस्तुत किया।
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12 सौ लोगों को दिला चुके प्रशिक्षण
कलेक्ट्रेट परिसर में कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक स्टॉल कृषि उत्पादन संगठन द्वारा लगाया गया था। कृषि उत्पादन स्टॉल के संचालक नागेंद्र पांडेय ने कहा कि करीब 21 वर्ष पहले बगैर सरकारी अनुदान लिए ही वर्मी कम्पोस्ट का कारोबार शुरू किया था। जो वर्तमान में कारोबार को बढ़ाते हुए वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए तीन सौ बेड तैयार कर चुके हैं। जिसमें एक वर्ष में करीब 50 से 60 लाख रुपये की लागत आती है। वहीं वर्मी कम्पोस्ट तैयार होने के बाद आसानी से 15 से 20 फीसदी की बचत हो जाती है। इतना ही नहीं वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर भी खोल चुके हैं। जहां पर एक वर्ष में 12 सौ लोगों को वर्मी कम्पोस्ट के लिए प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। इन्होंने कहा कि इस कारोबार के माध्यम से प्रतिदिन 25 से 30 परिवारों को स्थायी रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। वहीं स्वच्छता को देखते हुए वर्मी कम्पोस्ट केंद्र पर दो किलोवाट का सोलर सिस्टम तथा जलसंरक्षण के लिए तालाब भी बनवा रखा है। स्टॉल में वर्मी कम्पोस्ट से तैयार की गई धान की पौधे तथा सब्जियों के फलों को लगाया गया।