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Gorakhpur News: बचपन से ही मिला सियासी माहौल...अधूरी रह गई विधायक बनने की हसरत

Wed, 26 Jun 2024 06:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jun 2024 06:31 AM IST
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Got political environment since childhood...the desire to become an MLA remained unfulfilled
खजनी क्षेत्र के बदरा तिवारी गांव निवासी देवेंद्र नाथ तिवारी के पुत्र आशुतोष तिवारी को सियासी माहौल बचपन से ही मिला था। उनका बचपन ननिहाल गोला क्षेत्र के ककरही में बीता। नाना स्व. राम लखन शुक्ल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ ही कांग्रेस से जुड़े हुए थे। ननिहाल के परिवार के ही चंद्रशेखर शुक्ल विधायक रहे। लिहाजा आशुतोष का भी झुकाव बचपन से ही समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में बढ़ता गया। आचार्य नरेंद्र देव इंटर कालेज लहसड़ी में लिपिक पद की नौकरी करते हुए जल्द ही वे शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बन गए। कांग्रेस में भी जिला महासचिव के बाद महानगर अध्यक्ष बने। शहर से विधायक का चुनाव लड़ने की इच्छा उनकी अधूरी रह गई।
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आशुतोष की माता स्व. रामा त्रिपाठी मन्नीपुर स्थित कन्या विद्यालय में शिक्षका थीं। उनका निधन होने के बाद आशुतोष ननिहाल में रहने लगे। आनंद विद्यापीठ इंटर कालेज ककरही से इंटर और वीएसएवी पीजी कालेज गोला से स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद लहसड़ी के आचार्य नरेंद्रदेव इंटर कालेज में लिपिक पद पर कार्य करने लगे। इस दौरान कर्मचारी संगठन की राजनीति में सक्रिय हो गए। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद कांग्रेस में सक्रियता दिखाई और जिला महासचिव बने। फिर पिछले पांच सालों से महानगर अध्यक्ष थे।
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ननिहाल से आए विनय शुक्ल, सुधीर शुक्ल, कौशल किशोर शुक्ल, सरोज रंजन शुक्ल, देवेश शुक्ल, अमरेश शुक्ल, मन्नू शुक्ल आदि लोग शव लेकर देर शाम बड़गो पहुंचे। कम उम्र में ही मिलनसार रिश्तेदार खो चुके लोगों की आंखें नम थीं। लोग एक दूसरे को सांत्वना देने का प्रयास कर रहे थे।
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मिलनसार स्वभाव ने बढ़ा दी थी मित्रों की संख्या
सुबह सोशल मीडिया पर जैसे ही हादसे में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष के मौत की खबर आई, शहर के हर क्षेत्र में उनके जानने वाले व्याकुल हो गए। लोग फोन कर घटना की जानकारी लेने लगे। शव के साथ बड़गो पहुंचे दिलीप निषाद ने बताया कि पैतृक गांव बदरा तिवारी हो, ननिहाल ककरही हो या वर्तमान का बड़गो, हर जगह के लोग अंतिम दर्शन को आ रहे थे। हर आने-जाने वाले के पास अपना अलग किस्सा था। आशुतोष का स्वभाव इतना मिलनसार था कि जो भी एक बार मिला, वह उनका मुरीद हो जाता था। संगठन में भी वे अपने हमेशा कार्यकर्ताओं को सहेज कर चलने वाले थे। इसीलिए लंबे समय बाद भी वे पद पर रहते हुए भी सबके प्रिय बने हुए थे।

हमने उर्जावान साथी खो दिया
कांग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने बताया कि आशुतोष तिवारी ऐसे कार्यकर्ता थे, जो चुनाव हो या सामान्य परिस्थिति, हमेशा सक्रिय रहते थे। जिले स्तर पर संगठन का कोई भी कार्यक्रम हो, वे सबसे आगे खड़े नजर आते थे। उनके निधन से पार्टी ने क्षमतावान कार्यकर्ता खो दिया।

पूर्व जिलाध्यक्ष सैय्यद जमाल बताते हैं कि उनके समय में ही आशुतोष को जिला महासचिव बनाया गया था। वे उन नौजवानों में से थे जो अपनी पूरी उर्जा संगठन के काम में लगाते थे। अभी पिछले चुनाव में बांसगांव क्षेत्र में प्रचार के लिए वे सबसे आगे नजर आते थे। प्रदेश उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने कहा कि हमने योग्य नेतृत्वकर्ता खो दिया। गोरखपुर शहर में तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भी वे हमेशा पूरी उर्जा के साथ पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे थे।
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