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गोरखपुर कोषागार की अनोखी है कहानी, यहां दर्जनों चाभियों को है अपने तालों की तलाश
Wed, 09 Dec 2020 02:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 09 Dec 2020 02:32 PM IST
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गोरखपुर कोषागार।
- फोटो : अमर उजाला।
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करीब दो सौ साल पुरानी संस्कृति और सभ्यता की गवाह रह चुकी गोरखपुर कोषागार की पुरानी इमारत के डबल लॉक में अभी भी बहुत से पुराने बेशकीमती सामान सुरक्षित रखे हैं। इन्हीं में शामिल चार दर्जन से अधिक ऐसी चाभियां, जिन्हें दशकों से अपने तालों का इंतजार है। अलग-अलग आकार की इन चाभियों में से कई पर तो जंग भी लग चुकी है।
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दरअसल समय दर समय बहुत से विभाग या उनके अलग-अलग कार्यालय बंद होते गए। इन विभागों-दफ्तरों में ताला लगने के बाद उनकी चाभियां कोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित रख दी गईं। इसके बाद उनमें से कई चाभियों के बारे में पलटकर किसी ने पूछा ही नहीं। कोषागार कार्यालय की तरफ से कुछ विभागों से पत्राचार भी हुए मगर उसका भी कोई सार्थक जवाब नहीं आया।
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उप्र कोषागार कर्मचारी संघ के प्रांतीय अपर महामंत्री अश्वनी श्रीवास्तव बताते हैं कि गोरखपुर कोषागार की स्थापना 1789 में हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे अलग-अलग इमारतें वजूद में आईं। अंग्रेजी शासन काल में बैंक तो होते नहीं थे लिहाजा उनका पूरा खजाना भी इसी कोषागार के डबल लॉक में रखा जाता था।
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नवागत डीएम भी यहीं लेते हैं चार्ज
विभागीय सूत्रों के मुताबिक डबल लॉक में बंद हो चुके कई विभागों की चाभियां, पुराने सिक्के, कस्टम के बक्शे और आलमारी के अलावा बहुत पहले पुलिस द्वारा पकड़े गए गांजा आदि नशे के कई पदार्थों के अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सुरक्षित रखे गए हैं।
जिले में तैनात होने वाले सभी नए डीएम भी कोषागार में ही पदभार ग्रहण करते हैं। डीएम चूंकि जिले के राजस्व के भी मुखिया होते हैं लिहाजा ब्रिटिश काल से यह परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा समय-समय पर होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी यहीं सुरक्षित रखे जाते हैं।
जिले में तैनात होने वाले सभी नए डीएम भी कोषागार में ही पदभार ग्रहण करते हैं। डीएम चूंकि जिले के राजस्व के भी मुखिया होते हैं लिहाजा ब्रिटिश काल से यह परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा समय-समय पर होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी यहीं सुरक्षित रखे जाते हैं।