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Gorakhpur News: गोरखपुर-बस्ती में कुल 2551 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

Fri, 04 Apr 2025 12:58 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Apr 2025 12:58 AM IST
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Gorakhpur news: Waqf Board occupies a total of 2551 government properties in Gorakhpur-Basti
मंडल में सबसे अधिक देवरिया जिले में कुल 1027 सरकारी संपत्तियां वक्फ के रूप में दर्ज
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वक्फ घोषित संपत्ति के मुतवल्ली की नियुक्ति और जमीनों के व्यावसायिकरण की रिपोर्ट केंद्रीय एजेंसी कर रही तैयार
गोरखपुर। गोरखपुर-बस्ती मंडल में 2551 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है। इनमें से तमाम जमीनें बेच दी गई हैं, या उन पर अवैध रूप से लोगों ने पक्का निर्माण करा लिया है। अब वक्फ की संपत्तियों को लेकर एक केंद्रीय जांच एजेंसी की तरफ से गोपनीय रिपोर्ट तैयारी की जा रही है।
वक्फ संपत्ति कितने मुस्लिम लोगों ने घोषित की थी और घोषित होने के बाद से लेकर अभी तक इन जमीनों पर क्या-क्या व्यावसायिक निर्माण हुए हैं, इसके आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। हालांकि, इसमें मस्जिद और मदरसों को बाहर रखा गया है। राजस्व की टीम ने रिकॉर्ड का सत्यापन शुरू कर दिया है।
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गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर में कुल 2,551 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ का कब्जा मिला है। इसकी रिपोर्ट शासन स्तर पर भेज दी गई है। माना जा रहा है कि पहले इन सरकारी संपत्तियों को कब्जे से मुक्त करवाया जाएगा। इसके बाद जमीनों के व्यवसायीकरण पर कार्रवाई की जाएगी।
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जिला प्रशासन के पास मौजूद राजस्व अभिलेखों में 1366 फसली वर्ष से लेकर वर्ष 1795 के रिकाॅर्ड भी मिले हैं। ये रिकॉर्ड उर्दू में हैं, इनकी हिंदी प्रति भी तैयार कराई जा रही है। इसमें राजा सत्तासी और नवाब असिउद्दौला की तरफ से दी गई संपत्ति का भी उल्लेख है। ये संपत्तियां गोरखपुर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में है।
रिकाॅर्ड के अनुसार, नवाब और राजा की तरफ से जो 16 गांव दिए गए थे, वो मौजा उनौसा से लेकर कालेपुर ( वर्तमान, डीआईजी बंगला रोड) का क्षेत्र है। इन गांवों को तत्कालीन राजा और नवाब ने धार्मिक उन्नति और बेहतरी के लिए दिया था। आजादी के बाद इन सरकारी जमीनों को गलत तरीके वक्फ में घोषित कर इनका बैनामा कर दिया गया।
1956 में गोरखपुर नगरपालिका को प्रथम श्रेणी की नगरपालिका घोषित किया गया था। इसे 15 वार्डों में बांटा गया। इसी के साथ ही इन वक्फ की जमीनों पर खेल शुरू हो गया। धीरे-धीरे जमींदारी की इन जमीनों को वक्फ कर इन पर होटल व अन्य व्यावसायिक परिसर बना दिए गए।
वक्फ घोषित कर सीलिंग में खूब हुआ खेल

गोरखपुर में नगरपालिका होने के बाद शत्रु संपत्ति और वक्फ के नाम पर जमीनों को बेचा-खरीदा गया। जबकि नियमानुसार ये सरकारी जमीनें केंद्र के अधीन होती हैं। जिलाधिकारी इसके कस्टोडियन होते हैं। इसी वजह से वक्फ के संशोधन बिल में भी डीएम को ही मूल अधिकार दिए जाने की बात कही गई है। अगर किसी संपत्ति को लीज (पट्टा) करना होता था, तो कस्टोडियन उस जमीन के पट्टे की पत्रावलियों को राज्य सरकार के पास भेजता था और राज्यपाल की तरफ से लीज दी जाती थी। लेकिन, बिना कस्टोडियन की जानकारी में डाले ही पट्टे और वक्फ की जमीन को मंहगे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया।


वक्फ के अलावा 16 शत्रु संपत्तियां भी चिह्नित

शहर में घासीकटरा, इलाहीबाग, निजामपुर, सदर क्षेत्र, मोहद्दीपुर, नयागांव, तुर्कवलिया, पिपराइच, बांसगांव, करमहा बुजुर्ग इलाकों में वाणिज्यिक और आवासीय कब्जे लेकर कुल 16 शत्रु संपत्तियां सामने आई हैं। जिला प्रशासन की तरफ से इसकी रिपोर्ट तैयार की गई है।
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