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Gorakhpur News: छुट्टी के दिन खंगाले रिकॉर्ड, अभिलेख कक्ष के प्रभारियों को नोटिस
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डीडीयू के जिम्मेदारों ने एसटीएफ को भी भेज दी थी गलत रिपोर्ट
गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की बर्खास्त शिक्षिका के अंक बढ़ाने के मामले में कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा था कि उन्होंने जालसाजी के मामले में क्या कार्रवाई की है। इसके बाद रविवार को अभिलेख कक्ष के कर्मचारियों को बुलाया गया और सभी रिकॉर्ड खंगाले गए। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2000 से 2022 तक के सभी प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
दरअसल, वर्ष 2019 में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की थी। इसमें शामिल एक शिक्षिका की मार्कशीट की जांच के लिए विभाग ने विश्वविद्यालय में भेजा था। इस पर विवि प्रशासन ने कमेटी बनाई थी। कमेटी की जांच अभी चल ही रही थी कि इसी मामले की जांच यूपी एसटीएफ को भी दे दी गई। गोरखपुर इकाई ने शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच शुरू की। इसी बीच एसटीएफ ने वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर दो शिक्षकों की मार्कशीट के सत्यापन की रिपोर्ट मांग ली। सूत्रों ने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने शिक्षिका की मार्कशीट को सही बताकर एसटीएफ को जांच रिपोर्ट भेज दी थी। मामला संज्ञान में आने पर परीक्षा नियंत्रक ने एसटीएफ को पत्र लिखकर त्रुटि के बारे में बताया और नए सिरे से रिपोर्ट भेजी।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, शिक्षिका के प्रमाण पत्रों के अंकों में टेंपरिंग (छेड़छाड़) की गई थी लेकिन जिम्मेदारों ने एसटीएफ को जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें प्रमाण पत्रों को सही बता दिया। बाद में कुलपति ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई। अब कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी है जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई है।
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2021 में 100 शिक्षकों पर शुरू हुई थी जांच
एसटीएफ ने 2021 में गोरखपुर मंडल के करीब 100 शिक्षकों के खिलाफ जांच शुरू की थी। ये सभी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे थे। इसमें गोरखपुर जनपद के करीब 30 शिक्षक शामिल थे। इसके पहले 2019 में बेसिक शिक्षा विभाग ने दो फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया था। साथ ही संदिग्ध 15 शिक्षकों को निलंबित कर उनपर जांच बैठा दी थी।
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गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की बर्खास्त शिक्षिका के अंक बढ़ाने के मामले में कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा था कि उन्होंने जालसाजी के मामले में क्या कार्रवाई की है। इसके बाद रविवार को अभिलेख कक्ष के कर्मचारियों को बुलाया गया और सभी रिकॉर्ड खंगाले गए। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2000 से 2022 तक के सभी प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
दरअसल, वर्ष 2019 में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की थी। इसमें शामिल एक शिक्षिका की मार्कशीट की जांच के लिए विभाग ने विश्वविद्यालय में भेजा था। इस पर विवि प्रशासन ने कमेटी बनाई थी। कमेटी की जांच अभी चल ही रही थी कि इसी मामले की जांच यूपी एसटीएफ को भी दे दी गई। गोरखपुर इकाई ने शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच शुरू की। इसी बीच एसटीएफ ने वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर दो शिक्षकों की मार्कशीट के सत्यापन की रिपोर्ट मांग ली। सूत्रों ने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने शिक्षिका की मार्कशीट को सही बताकर एसटीएफ को जांच रिपोर्ट भेज दी थी। मामला संज्ञान में आने पर परीक्षा नियंत्रक ने एसटीएफ को पत्र लिखकर त्रुटि के बारे में बताया और नए सिरे से रिपोर्ट भेजी।
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विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, शिक्षिका के प्रमाण पत्रों के अंकों में टेंपरिंग (छेड़छाड़) की गई थी लेकिन जिम्मेदारों ने एसटीएफ को जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें प्रमाण पत्रों को सही बता दिया। बाद में कुलपति ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई। अब कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी है जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई है।
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2021 में 100 शिक्षकों पर शुरू हुई थी जांच
एसटीएफ ने 2021 में गोरखपुर मंडल के करीब 100 शिक्षकों के खिलाफ जांच शुरू की थी। ये सभी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे थे। इसमें गोरखपुर जनपद के करीब 30 शिक्षक शामिल थे। इसके पहले 2019 में बेसिक शिक्षा विभाग ने दो फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया था। साथ ही संदिग्ध 15 शिक्षकों को निलंबित कर उनपर जांच बैठा दी थी।