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Gorakhpur News: इलाज ही नहीं, एक साल तक निगरानी भी करेगा एम्स
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गोरखपुर। एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) मरीजों के इलाज के साथ-साथ उनकी निगरानी भी करेगा। इसके लिए हेल्थ एंड डेमोग्रॉफी सर्विलांस सिस्टम का सहारा लिया जाएगा। इसमें शहरी क्षेत्र के 30 हजार और ग्रामीण इलाकों से 40 हजार लोग शामिल किए जाएंगे। चयनित क्षेत्र में महिलाओं की गर्भावस्था की स्थिति, प्रजनन दर, पुरुषों की सभी प्रकार की बीमारियां, पारिवारिक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का डाटा एकत्र किया जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों ने एम्स दिल्ली और पुणे जाकर प्रशिक्षण भी लिया है।
एम्स दिल्ली और एम्स पुणे की कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की टीम ने एचडीएसएस मॉडल पर मरीजों का डॉटा एकत्रित किया है। इससे बीमारियों के इतिहास का विश्लेषण कर भविष्य में क्या दिक्कत आ सकती है, इस पर इलाज के उपाय खोजने में मदद मिलेगी। ऐसी जानकारियां स्वास्थ्य नीति बनाने में भी कारगर होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स गोरखपुर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. यू वेंकटेश ने पुणे के वाडु का दौरा कर एचडीएसएस की कार्यप्रणाली को समझा। अब इसी मॉडल के आधार पर एम्स गोरखपुर की टीम 70 हजार की आबादी का आंकड़ा एकत्रित करेगी।
डॉ. यू वेंकटेश ने बताया कि शहर से लगते ग्रामीण इलाके का चयन किया जाएगा। वहां लोगों की हर छोटी-बड़ी बीमारी का इलाज होगा। इससे बीमारी के इतिहास, इलाज, इलाज के बाद आए परिवर्तन, समूह में उसका असर, कुपोषण की स्थिति आदि की बारे में भी सटीक जानकारी मिलेगी। इसकी शुरुआत मार्च से होगी। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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एम्स दिल्ली और एम्स पुणे की कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की टीम ने एचडीएसएस मॉडल पर मरीजों का डॉटा एकत्रित किया है। इससे बीमारियों के इतिहास का विश्लेषण कर भविष्य में क्या दिक्कत आ सकती है, इस पर इलाज के उपाय खोजने में मदद मिलेगी। ऐसी जानकारियां स्वास्थ्य नीति बनाने में भी कारगर होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स गोरखपुर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. यू वेंकटेश ने पुणे के वाडु का दौरा कर एचडीएसएस की कार्यप्रणाली को समझा। अब इसी मॉडल के आधार पर एम्स गोरखपुर की टीम 70 हजार की आबादी का आंकड़ा एकत्रित करेगी।
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डॉ. यू वेंकटेश ने बताया कि शहर से लगते ग्रामीण इलाके का चयन किया जाएगा। वहां लोगों की हर छोटी-बड़ी बीमारी का इलाज होगा। इससे बीमारी के इतिहास, इलाज, इलाज के बाद आए परिवर्तन, समूह में उसका असर, कुपोषण की स्थिति आदि की बारे में भी सटीक जानकारी मिलेगी। इसकी शुरुआत मार्च से होगी। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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