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मस्जिद प्रकरण: गोरखपुर नगर निगम ने दी थी जमीन, जीडीए ने निर्माण पर की आपत्ति...25 को होगी सुनवाई
Thu, 20 Feb 2025 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:07 AM IST
सार
इसमें 30 मई तक जवाब मांगा गया। 27 अक्तूबर को मुतवल्ली सुहैल का इंतकाल हो गया। अगस्त में इस मामले को लेकर एक सामाजिक संगठन ने पीआईएल भी दाखिल किया। अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव के अनुसार, इस मामले में 15 फरवरी 2025 को पक्ष रखा गया, लेकिन जीडीए ने एकतरफा आदेश पारित कर दिया।
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घोषकंपनी पर तैयार मस्जिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
घोष कंपनी तिराहे के पास नई बनी जिस मस्जिद को जीडीए ने गिराने का आदेश पारित किया है, उसके लिए जमीन देने का फैसला नगर निगम बोर्ड की बैठक में हुआ था। इसके लिए शेख फुन्ना आदि बनाम नगर निगम के बीच हुए समझौते को आधार बनाया गया।
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अब जीडीए ने मानचित्र नहीं होने के आधार पर यह फैसला दिया है। दोनों पक्ष के अपने तर्क हैं। फिलहाल अब यह मामला जीडीए अध्यक्ष होने के चलते अपीलीय अधिकारी कमिश्नर के कोर्ट में है। वहां 25 फरवरी को इस पर सुनवाई होगी।
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मस्जिद के पैरोकार शोएब अंसारी की तरफ से अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने इस मामले में 17 फरवरी को कमिश्नर कोर्ट में केस दाखिल करने के बाद 18 फरवरी को एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें मामला धर्म विशेष से जुड़े होने के चलते जल्द सुनवाई की मांग की गई है। जीडीए की तरफ से भी इस मामले में अपना पक्ष कोर्ट में रखा गया है।
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अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को कोर्ट पहुंचे तो पता लगा कि मामले की सुनवाई 25 फरवरी को होगी। अधिवक्ता के अनुसार आजादी से पहले से घोष कंपनी के पास मौजा चैनपुर मेवातीपुर गाड़ीखाना था, जहां लोग अपना तांगा रखते थे। यहीं एक छोटी सी मस्जिद भी थी, जिसमें मुस्लिम धर्म के लोग नमाज अदा करते थे। वर्ष 1967 में पहली बार इस जगह को लेकर विवाद हुआ।
नगर निगम के पुराने जानकार लोग बताते हैं कि इस जमीन पर अधिकार को लेकर रामचंदर बनान नगर निगम, प्रदीप प्रधान बनाम नगर निगम और निजामुद्दीन बनाम नगर निगम का मुकदमा चल रहा था। पिछले साल फरवरी में नगर निगम ने जमीन को अपना बताते हुए यहां के पुराने निर्माण को हटाना शुरू कर दिया।
ॉइस पर पक्षकारों ने आपत्ति की और शेख फुन्ना आदि बनाम नगर निगम के मामले में हुए फैसले का जिक्र किया, जिसमें मस्जिद पूरी जमीन के बीच में बताई गई। नगर निगम को इसकी कॉपी उपलब्ध कराई गई। इसके बाद नगर निगम और मस्जिद कमेटी के बीच एक समझौता हो गया, जिसमें पूर्व में वर्णित जगह 24 गुणे 26 वर्ग फीट जमीन दक्षिण पश्चिम किनारे उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद नगर निगम की बोर्ड की 27 फरवरी 2024 को हुई छठीं बैठक में मस्जिद कमेटी को जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल की तरफ से रखा गया।
मानचित्र को लेकर चल रहा विवाद
जमीन मिलने पर मुतवल्ली रहे सुहैल की देखरेख में निर्माण शुरू हुआ। इस पर किसी ने बिना मानचित्र स्वीकृत कराए मस्जिद निर्माण की शिकायत की। इस पर जीडीए के अवर अभियंता ने मौके की जांच की। जीडीए की तरफ से कारण बताओ नोटिस सुहेल को भेजा गया।
इसमें 30 मई तक जवाब मांगा गया। 27 अक्तूबर को मुतवल्ली सुहैल का इंतकाल हो गया। अगस्त में इस मामले को लेकर एक सामाजिक संगठन ने पीआईएल भी दाखिल किया। अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव के अनुसार, इस मामले में 15 फरवरी 2025 को पक्ष रखा गया, लेकिन जीडीए ने एकतरफा आदेश पारित कर दिया।
मस्जिद के निर्माण पर जीडीए की ओर जारी आदेश के खिलाफ अपील की गई है। 25 फरवरी को इस पर कोर्ट में सुनवाई होगी: अनिल ढींगरा, कमिश्नर
इस मामले में मस्जिद के पैरोकार को अपना पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया है। मामले की सुनवाई प्रथम अपीलीय अधिकारी के यहां होनी है। वहां जीडीए ने भी अपना पक्ष रखा है। न्यायालय के निर्णय पर कार्रवाई होगी: आनंद वर्द्धन, वीसी जीडीए