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Gorakhpur News: सहालग में खूब उड़ाई मुर्गे की दावत...अब हलक में अटकी जान
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लोग तनाव में कि कहीं बर्ड फ्लू से संक्रमित मुर्गा तो नहीं खा लिया
गोरखपुर। चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू का मामला मिलने के बाद भी शहर में मीट की दुकानें खुली रहीं। लोगों ने भी इस बीच सहालग में खूब दावत उड़ाई। अब मुर्गे की दुकानों पर संक्रमण की पुष्टि होने के बाद इन लोगों की जान हलक में अटक गई है। डर है कि कहीं बर्ड फ्लू से संक्रमित मुर्गा तो नहीं खा लिया।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में सात मई को बाघिन शक्ति की मौत हो गई थी। जांच के लिए विसरा राष्ट्रीय उच्च पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजा गया था। 12 मई को रिपोर्ट आई, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से चिड़ियाघर बंद है, लेकिन शहर में मीट की दुकानें संचालित होती रहीं।
20 मई को मीट की दुकानों से सैंपल लेकर भोपाल भेजा गया। इस बीच लोगों ने भी सहालग में खूब दावतें उड़ाईं। अब 30 मई को आई रिपोर्ट में चार दुकानों पर बर्ड फ्लू के वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद से ही पूरे शहर में हड़कंप की स्थिति है। इस बीच जिन्होंने मुर्गे का मीट खाया, वे तनाव में हैं कि कहीं उन्हें भी बर्ड फ्लू न हो जाए। बड़गो के अजीत सिंह ने बताया कि उन्हाेंने पिछले दिनों मुर्ग का मीट लगातार खाया था। अब खबरों में पढ़ा कि मीट की दुकानों पर बर्ड फ्लू के संक्रमण मिले हैं। शरीर में कोई लक्षण तो नहीं लेकिन डर लग रहा है। अब सोमवार को जांच कराएंगे। रुस्तमपुर के संदीप धर दूबे ने कहा कि बर्ड फ्लू की खबर सुनने के बाद से ही डर लग रहा है। पिछले दिनों कई पार्टियों में मुर्गे का मीट खाया था। हालांकि, इंसानों में यह संक्रमण काफी कम मिलता है। अब मांस-मछली खाना ही छोड़ दिए हैं।
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डॉक्टरों से पूछा- बर्ड फ्लू से कैसे बचें
बर्ड फ्लू संक्रमण के बीच रविवार को बहुत सारे लोग डॉक्टरों से इसके बारे में जानकारी लेते रहे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार और डाॅ. बीके सुमन के पास कॉल कर लोगों ने बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं, इससे कैसे बचा जाए, अगर संक्रमण वाली जगह से मुर्गा खरीदकर खा लिए हैं तो अब क्या करें? जैसे सवाल पूछे। डॉक्टरों ने आश्वस्त किया कि उनमें यदि लक्षण नहीं हैं तो डरने की जरूरत नहीं है।
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ये हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
बर्ड फ्लू से संक्रमित होने पर इंसान में करीब 2-8 लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार बर्ड फ्लू के लक्षण को लोग सीजनल फ्लू समझकर इग्नोर कर देते हैं। इसके लक्षण हैं- खांसी और गले में खराश होना, तेज बुखार आना, सर्दी-जुकाम और नाक बहना, हड्डी और जोड़ों में तेज दर्द होना, ठंड लगना और थकान होना, सिर और छाती में तेज दर्द, भूख कम लगना आदि। तेज बुखार के साथ खांसी और शरीर में तेज दर्द है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह बर्ड फ्लू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
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संक्रमित पक्षियों से रहें दूर
इंसान यदि संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आते हैं तो बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पोल्ट्री फॉर्म में आप जाते हैं और वहां पर देखरेख करते हैं इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पक्षी के मल, नाक, मुंह और आंखों से जो लिक्विड निकलता है उससे भी यह इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पक्षी के अंडे या उसके मीट को खाने से भी यह बीमारी हो सकती है।
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कोट-
यह मौसम संक्रामक बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील है। कोविड का संक्रमण भी बढ़ रहा है। ऐसे में बर्ड फ्लू का संक्रमण चिंताजनक है। लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भीड़ में जाने से बचें और मास्क का इस्तेमाल करें। हाथों को सैनिटाइज करें। इस मौसम में केवल घर का बना ताजा भोजन ही करें। उमस भरी गर्मी में चार घंटे पहले पका भोजन भी खराब होने लगता है, इसे खाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा सड़कों के किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।
डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन
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गोरखपुर। चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू का मामला मिलने के बाद भी शहर में मीट की दुकानें खुली रहीं। लोगों ने भी इस बीच सहालग में खूब दावत उड़ाई। अब मुर्गे की दुकानों पर संक्रमण की पुष्टि होने के बाद इन लोगों की जान हलक में अटक गई है। डर है कि कहीं बर्ड फ्लू से संक्रमित मुर्गा तो नहीं खा लिया।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में सात मई को बाघिन शक्ति की मौत हो गई थी। जांच के लिए विसरा राष्ट्रीय उच्च पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजा गया था। 12 मई को रिपोर्ट आई, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद से चिड़ियाघर बंद है, लेकिन शहर में मीट की दुकानें संचालित होती रहीं।
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20 मई को मीट की दुकानों से सैंपल लेकर भोपाल भेजा गया। इस बीच लोगों ने भी सहालग में खूब दावतें उड़ाईं। अब 30 मई को आई रिपोर्ट में चार दुकानों पर बर्ड फ्लू के वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद से ही पूरे शहर में हड़कंप की स्थिति है। इस बीच जिन्होंने मुर्गे का मीट खाया, वे तनाव में हैं कि कहीं उन्हें भी बर्ड फ्लू न हो जाए। बड़गो के अजीत सिंह ने बताया कि उन्हाेंने पिछले दिनों मुर्ग का मीट लगातार खाया था। अब खबरों में पढ़ा कि मीट की दुकानों पर बर्ड फ्लू के संक्रमण मिले हैं। शरीर में कोई लक्षण तो नहीं लेकिन डर लग रहा है। अब सोमवार को जांच कराएंगे। रुस्तमपुर के संदीप धर दूबे ने कहा कि बर्ड फ्लू की खबर सुनने के बाद से ही डर लग रहा है। पिछले दिनों कई पार्टियों में मुर्गे का मीट खाया था। हालांकि, इंसानों में यह संक्रमण काफी कम मिलता है। अब मांस-मछली खाना ही छोड़ दिए हैं।
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डॉक्टरों से पूछा- बर्ड फ्लू से कैसे बचें
बर्ड फ्लू संक्रमण के बीच रविवार को बहुत सारे लोग डॉक्टरों से इसके बारे में जानकारी लेते रहे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार और डाॅ. बीके सुमन के पास कॉल कर लोगों ने बर्ड फ्लू के लक्षण क्या हैं, इससे कैसे बचा जाए, अगर संक्रमण वाली जगह से मुर्गा खरीदकर खा लिए हैं तो अब क्या करें? जैसे सवाल पूछे। डॉक्टरों ने आश्वस्त किया कि उनमें यदि लक्षण नहीं हैं तो डरने की जरूरत नहीं है।
ये हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
बर्ड फ्लू से संक्रमित होने पर इंसान में करीब 2-8 लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार बर्ड फ्लू के लक्षण को लोग सीजनल फ्लू समझकर इग्नोर कर देते हैं। इसके लक्षण हैं- खांसी और गले में खराश होना, तेज बुखार आना, सर्दी-जुकाम और नाक बहना, हड्डी और जोड़ों में तेज दर्द होना, ठंड लगना और थकान होना, सिर और छाती में तेज दर्द, भूख कम लगना आदि। तेज बुखार के साथ खांसी और शरीर में तेज दर्द है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह बर्ड फ्लू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
संक्रमित पक्षियों से रहें दूर
इंसान यदि संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आते हैं तो बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पोल्ट्री फॉर्म में आप जाते हैं और वहां पर देखरेख करते हैं इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पक्षी के मल, नाक, मुंह और आंखों से जो लिक्विड निकलता है उससे भी यह इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमित पक्षी के अंडे या उसके मीट को खाने से भी यह बीमारी हो सकती है।
कोट-
यह मौसम संक्रामक बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील है। कोविड का संक्रमण भी बढ़ रहा है। ऐसे में बर्ड फ्लू का संक्रमण चिंताजनक है। लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भीड़ में जाने से बचें और मास्क का इस्तेमाल करें। हाथों को सैनिटाइज करें। इस मौसम में केवल घर का बना ताजा भोजन ही करें। उमस भरी गर्मी में चार घंटे पहले पका भोजन भी खराब होने लगता है, इसे खाने से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा सड़कों के किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।
डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन