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गोरखपुर एम्स : गवर्निंग काउंसिल सदस्य डॉ. अशोक प्रसाद की डिग्री पर उठे सवाल, केंद्रीय मंत्री से की शिकायत

Mon, 07 Oct 2024 04:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 07 Oct 2024 04:44 AM IST
सार

सच्चिदानंद शुक्ला नाम के व्यक्ति ने स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की है कि डॉ. अशोक प्रसाद का मेडिकल रजिस्ट्रेशन आस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन आदि देशों में रद्द कर दिया गया था। उन पर फर्जी डॉटा तैयार करने और खुद को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित कराने की गलत सूचना देने आदि के भी आरोप हैं।

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In Gorakhpur AIIMS, Questions raised on the degree of Governing Council member Dr. Ashok Prasad.
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य डॉ. अशोक प्रसाद की डिग्री पर सवाल उठे हैं। बेतियाहाता के सच्चिदानंद शुक्ला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की है। आरोप है कि डॉ. अशोक प्रसाद के खिलाफ ब्रिटिश जर्नल मैगजीन में भी रिपोर्ट प्रकाशित है।

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इसके अलावा आस्ट्रेलिया, कनाडा व ब्रिटेन में मेडिकल रजिस्ट्रेशन निरस्त किया जा चुका है। उन्हें एम्स की गवर्निंग कौंसिल का सदस्य नहीं बनाया जा सकता। इस पर डॉ. अशोक प्रसाद ने सारे आरोप गलत बताते हुए इसे एक साल पुराना मामला बताया है।
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डॉ. अशोक प्रसाद ने ही एम्स के डॉ. कुमार सतीश रवि के खिलाफ जांच कर नियुक्ति को अवैध बताया था, जिसके आधार पर डॉ. सतीश की सेवाएं एम्स गोरखपुर में समाप्त कर दी गई थीं। सच्चिदानंद शुक्ला नाम के व्यक्ति ने स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की है कि डॉ. अशोक प्रसाद का मेडिकल रजिस्ट्रेशन आस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन आदि देशों में रद्द कर दिया गया था। उन पर फर्जी डॉटा तैयार करने और खुद को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित कराने की गलत सूचना देने आदि के भी
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आरोप हैं। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि एम्स अधिनियम के तहत गवर्निंग काउंसिल में विवादित निजी चिकित्सक को नहीं होना चाहिए था। इस संबंध में डॉ. अशोक प्रसाद का कहना है कि शिकायतकर्ता ने डॉ. सतीश रवि के प्रकरण के चलते ही इस तरह का गलत आरोप लगाया है। वह शिकायतकर्ता को जानते भी नहीं हैं। उनके पास ऑक्सफोर्ड की पीएचडी डिग्री है जिसे चाहे देख सकता है।

एम्स की जांच स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंची, कई लोगों पर गिर सकती है गाज
पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल के पुत्र के सर्टिफिकेट मामले की जांच पूरी हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने एम्स गोरखपुर के अलावा एम्स पटना से भी इससे संबंधित दस्तावेज जुटाए हैं। इसके अलावा पटना में प्रशासन की तरफ से कराई गई जांच रिपोर्ट भी मिल चुकी है।

जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट 01 अक्तूबर को स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी थी। अब पूरी फाइल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पास पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में जल्द ही कई लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

बता दें कि एम्स गोरखपुर में कार्यकारी निदेशक रहे डॉ. जीके पाल के पुत्र डॉ. औरव पाल की माइक्रो बायोलॉजी विभाग में पीजी की डिग्री के लिए पंजीकरण हुआ था। अगले ही दिन डॉ. औरव की तरफ से लगाए गए जाति प्रमाण पत्र को लेकर सवाल खड़े हो गए।


आरोप लगा कि निदेशक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आठ लाख से कम आय दर्शाते हुए जाति प्रमाण पत्र बनवाएं हैं। एम्स सूत्रों का कहना है कि जांच में कार्यकारी निदेशक के अलावा कुछ और लोगों के नामांकन में भी गड़बड़ी पकड़ी गई है। इसीलिए कार्रवाई के लिए पूरी फाइल स्वास्थ्य मंत्री को दी गई है।

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