पत्नी की मेहनत लाई रंग, अब जर्मनी की जेल में सजा काटेगा मैनफ्रैंड
- कोर्ट ने सुनाई है दस साल की सजा, जर्मनी भेजने की अनुमति मिली, तिथि तय नहीं
- वर्ष 2014 में नेपाल से भारत में प्रवेश करते सोनौली सीमा पर पकड़ा गया था मैनफ्रैंड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर जिला जेल में बंद जर्मन नागरिक मैनफ्रैंड बैरेंड अब आगे की सजा अपने देश की जेल में काटेगा। मैनफ्रैंड को एनडीपीएस एक्ट में 10 साल की सजा हुई है। मैनफ्रैंड को शिफ्ट करने की शासन की तरफ से अनुमति मिल गई है। जिला जेल के अधिकारियों ने गृह मंत्रालय और जर्मन दूतावास को पत्र लिखकर मैनफ्रैंड को जर्मनी भिजवाने के लिए दिशा-निर्देश मांगे हैं। दिशा-निर्देश मिलने के बाद मैनफ्रैंड को दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास भेज दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, जर्मनी के सजसेन के सिरायू लेसिंग स्ट्रीट निवासी मैनफ्रैंड ने 31 अक्तूबर 2014 को नेपाल के भैरहवां से भारत की सोनौली सीमा में प्रवेश किया। वह बस में बैठने जा रहा था तभी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने पकड़ लिया। उसके बैग से चार किलोग्राम चरस मिली थी।
जांच में पता चला कि उसने भैरहवां के एक होटल में 1.20 लाख रुपये में चरस खरीदी थी और गोवा लेकर जा रहा था। पकड़े जाने के बाद महाराजगंज की जेल में वह एक साल रहा। एक अक्तूबर 2015 को मैनफ्रैंड को गोरखपुर जेल में शिफ्ट किया गया।
जमानत मिली पर जमानतदार नहीं मिले
31 मई 2017 को कोर्ट ने मैनफ्रैंड को जमानत के लिए दो जमानतदार पेश करने का आदेश दिया। मैनफ्रैंड की पत्नी जूलिया ने दो जमानतदारों के नाम दिए, लेकिन जांच में एक फर्जी निकल गया, जिससे मैनफ्रैंड को जमानत नहीं मिल पाई। इसके बाद जूलिया ने जर्मनी दूतावास व गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के अधिकारियों को पत्र लिखकर मदद मांगी।
वर्ष 2018 में मैनफ्रैंड को कोर्ट ने दस साल का कारावास, डेढ़ लाख रुपये जुर्माना व जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई। तभी से वह गोरखपुर जेल में बंद है। वह महराजगंज व गोरखपुर जेल में छह साल की सजा काट चुका है। चार साल की सजा अब जर्मनी की जेल में काटेगा।
गोरखपुर जेल में मैनफ्रैंड समेत दो विदेशी बंदी
वर्तमान में गोरखपुर जेल में मैनफ्रैंड और पाकिस्तान का आदिल ही विदेशी बंदी हैं। मैनफ्रैंड के चले जाने के बाद केवल आदिल बचेगा। दोनों को वर्तमान समय में हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है।
वर्ष 2017 में गोरखपुर जेल आए थे जर्मन दूतावास के अधिकारी
27 सितंबर 2017 को जर्मनी दूतावास के अधिकारी मैंनफ्रेंड से मिलने गोरखपुर जेल आए थे। उनके साथ मैनफ्रैंड की लीगल एडवाइजर यामिनी महाजन भी थीं। जर्मनी दूतावास के अधिकारियों ने मैनफ्रैंड को कानूनी मदद दिलाने का भरोसा दिया था। इस बीच पत्नी जूलिया केस की पैरवी के सिलसिले में जर्मनी दूतावास व गृह मंत्रालय के चक्कर लगाती रही।
पत्नी के अनुरोध व दूतावास के प्रयासों के बाद जेल अधिकारियों ने शासन को पत्र लिखकर मैनफ्रैंड को जर्मनी की जेल में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी थी। जूलिया पांच साल तक केस की पैरवी के सिलसिले में जेल, कचहरी से लेकर दूतावास के चक्कर काटती रही। लॉकडाउन से पहले तक वह शाहपुर क्षेत्र में जेल के पास किराए का कमरा लेकर रही।
गोरखपुर जेल/वरिष्ठ अधीक्षक प्रभारी व डीआईजी डॉ. रामधनी ने कहा कि मैनफ्रैंड को एनडीपीएस एक्ट में 10 साल की सजा मिली है। छह साल की सजा वह काट चुका है। कोर्ट से जमानत भी मंजूर हो गई है, लेकिन जमानतदार नहीं मिलने से उसकी रिहाई अटक गई। दूतावास की पहल पर उसे शेष सजा जर्मनी की जेल में काटने की अनुमति मिली है। बंदी को जर्मनी भेजने की तैयारी चल रही है। जाने की तिथि अभी तय नहीं हुई है।