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गीडा: दो दशक से अधिक पुराने तारों से हो रही आपूर्ति, बार-बार बिजली जाने से होता है काफी नुकसान

Wed, 22 Sep 2021 12:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 22 Sep 2021 12:40 PM IST
सार

तारों के जर्जर होने के कारण कई बार ट्रिपिंग होने से बिजली चली जाती है। नुकसान होने की वजह से कई उद्यमी बहुत परेशान हैं। बिजली का इस तरह चला जाना उद्यमियों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है।

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Gorakhpur Industrial Development Authority power cut entrepreneurs have become troubled
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गीडा को उद्योगों का हब बनना है, कैसे, 20 साल पुरानी बिजली लाइन के भरोसे, जिसके चलते जब देखो तब ट्रिपिंग होती रहती है? गीडा में उद्योग लगाने वाले हर उद्यमी के मन में यह सवाल हर दिन 5-10 बार, हर उस समय कौंधता है, जब बिजली चली जाती है। यकीन न हो तो किसी उद्यमी से बस एक सवाल करके देख लें, उत्पादन तो अच्छा चल रहा होगा, वीआईपी इलाका है, विद्युत आपूर्ति तो निर्बाध है न?
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गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के इलाके में वैसे तो 24 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान किया गया है, लेकिन इन दिनों हालत बहुत खराब हैं। हर रोज पांच से छह बार ट्रिपिंग की वजह से बिजली चली जाती है। बिजली का इस तरह चला जाना उद्यमियों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। नुकसान होने की वजह से कई उद्यमी बहुत परेशान हैं। उनका साफ कहना है कि ऐसे में कारखाना चलाना मुश्किल हो गया है। ट्रिपिंग की वजह से बिजली के कटने से जहां उत्पादन प्रभावित होता है, वहीं कई कारखानों में काफी कच्चा माल खराब हो जाता है। इस तरह महीनों में लाखों का नुकसान हो जाता है। उद्यमियों का कहना है कि जब से गीडा बना है, तब से कभी भी तारों को नहीं बदला गया। पुराने और जर्जर तार होने की वजह से ट्रिपिंग की समस्या ज्यादा हो रही है। ऐसे में अब बिजली विभाग को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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रोजाना दस बार हो रही बिजली ट्रिपिंग
रॉयल सवेरा फूड्स के राजकुमार ने बताया कि हमारी टोमैटो सॉस बनाने की यूनिट है। एक बार बिजली ट्रिप होने पर पैन के इजिटेटर बंद हो जाते हैं। उसमें रखा माल हिल नहीं पता है और जल जाता है। बॉयलर से भाप अपनी गति से आती रहती है। इसलिए जला हुआ माल फेंकना पड़ता है। अगर जेनरेटर का बैकअप न हो तो बिजली के भरोसे यूनिट नहीं चला सकते। इन दिनों स्थिति ऐसी है कि गीडा के औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना आठ से 10 बार बिजली की ट्रिपिंग हो रही है। इससे काफी नुकसान होता है।
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हर रोज हो जाता है करीब दस हजार का नुकसान
साईं पॉलीप्रिंट्स के राजेश अग्रवाल ने बताया कि जब भी ट्रिपिंग होती है तो प्रिंटिंग मशीन में लगने वाली प्लास्टिक फिल्म का रजिस्ट्रेशन आउट हो जाता है। इस वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ता है। एक बार ट्रिपिंग के बाद तकरीबन 10 किलो प्लास्टिक फिल्म बर्बाद होती है। इतनी प्लास्टिक फिल्म की कीमत तकरीबन दो हजार रुपये के आसपास है। ऐसे में समझा जा सकता है कि दिन भर में पांच-छह बार बिजली ट्रिप कर जाए तो रोजाना दस हजार से अधिक का नुकसान हो जाता है।


इंडस्ट्रियल एरिया में होनी चाहिए 24 घंटे निर्बाध बिजली की आपूर्ति
सर्वोत्तम फूड्स प्रोडक्टस के उमेश छापड़िया ने बताया कि मेरा मवेशी चारा निर्माण की फैक्ट्री है। बिजली जानेपर प्लांट को स्टार्ट करने में एक घंटा लग जाता है। लगातार बिजली ट्रिपिंग से फैक्ट्री के उपकरणों में खराबी आती रहती है। इंडस्ट्रियल एरिया में 24 घंटे निर्बाध बिजली होनी चाहिए। बार-बार की ट्रिपिंग से बहुत नुकसान झेलना पड़ता है।
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