{"_id":"6015042876334a1e9c7f7228","slug":"gorakhpur-800-traders-will-get-back-cases-filed-in-epidemic-act-violations","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर के 800 व्यापारियों पर दर्ज मुकदमे होंगे वापस, जानिए किस वजह से हुई थी कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर के 800 व्यापारियों पर दर्ज मुकदमे होंगे वापस, जानिए किस वजह से हुई थी कार्रवाई
Sat, 30 Jan 2021 12:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:30 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लॉकडाउन के दौरान महामारी एक्ट के उल्लंघन के आरोपियों से केस वापस लेने के सरकार के फैसले का गोरखपुर के करीब 800 व्यापारियों को फायदा मिलेगा। कंप्लेन केस के तहत दर्ज इन मुकदमों में पुलिस के अलावा प्रशासनिक कर्मी भी वादी हैं। ज्यादातर मुकदमों में चार्जशीट भेज दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर में महामारी एक्ट की धारा 188 और धारा 144 के तहत 14,452 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें व्यापारी भी शामिल हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई थी और बिना अनुमति के दुकान खोलने की मनाही थी। यही नहीं, कुछ दुकानों को तय रोस्टर के हिसाब से खोला जा रहा था। पर कई ऐसे दुकानदार थे जो बिना किसी रोस्टर के ही अपनी दुकान खोल दे रहे थे।
वहीं दुकान खोलने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तथा मास्क लगाने का भी निर्देश था। किसी को अपनी दुकानों पर भीड़ नहीं जमा करनी थी। इन सब मामलों में जिन लोगों ने उल्लंघन किया उनके खिलाफ पुलिस ने महामारी एक्ट में केस किया था। महामारी एक्ट में केस दर्ज होने से जिले में मुकदमों की संख्या एकाएक बड़ गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर में महामारी एक्ट की धारा 188 और धारा 144 के तहत 14,452 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें व्यापारी भी शामिल हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई थी और बिना अनुमति के दुकान खोलने की मनाही थी। यही नहीं, कुछ दुकानों को तय रोस्टर के हिसाब से खोला जा रहा था। पर कई ऐसे दुकानदार थे जो बिना किसी रोस्टर के ही अपनी दुकान खोल दे रहे थे।
विज्ञापन
वहीं दुकान खोलने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तथा मास्क लगाने का भी निर्देश था। किसी को अपनी दुकानों पर भीड़ नहीं जमा करनी थी। इन सब मामलों में जिन लोगों ने उल्लंघन किया उनके खिलाफ पुलिस ने महामारी एक्ट में केस किया था। महामारी एक्ट में केस दर्ज होने से जिले में मुकदमों की संख्या एकाएक बड़ गई थी।
विज्ञापन
अभियान चलाकर की गई थी कार्रवाई
महामारी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों की विवेचना को 72 घंटे में निस्तारित करने का अभियान चलाया गया था, जिसके बाद इन मुकदमों का पर्चा काट कर विवेचना निस्तारित की गई।
धारा 188, महामारी एक्ट
सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी एक्ट यानी एपिडमिक डिजास्टर एक्ट 1897 के तहत की गई थी। इस एक्ट के अनुसार अगर कोई शख्स लॉकडाउन या उसके दौरान सरकार के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। महामारी एक्ट के सेक्शन 3 के अनुसार अगर कोई इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है या सरकारी निर्देशों व नियमों को तोड़ता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है। किसी सरकारी कर्मचारी के ऐसा करने पर भी यह धारा लगाई जा सकती है। इस कानून का उल्लंघन करने या कानून व्यवस्था को तोड़ने पर दोषी को कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि ज्यादातर मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा चुकी है। आगे शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
धारा 188, महामारी एक्ट
सरकार ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी एक्ट यानी एपिडमिक डिजास्टर एक्ट 1897 के तहत की गई थी। इस एक्ट के अनुसार अगर कोई शख्स लॉकडाउन या उसके दौरान सरकार के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। महामारी एक्ट के सेक्शन 3 के अनुसार अगर कोई इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है या सरकारी निर्देशों व नियमों को तोड़ता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है। किसी सरकारी कर्मचारी के ऐसा करने पर भी यह धारा लगाई जा सकती है। इस कानून का उल्लंघन करने या कानून व्यवस्था को तोड़ने पर दोषी को कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि ज्यादातर मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा चुकी है। आगे शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।