गोरखपुर जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली बेटियां अब पढ़ाई के साथ-साथ खिलौनों से अपना भविष्य संवारेंगी। पहली बार व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें खिलौना बनाने और उसकी मार्केटिंग का गुर सिखाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले के 10 कस्तूरबा विद्यालयों को व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। एक हजार छात्राओं को प्रशिक्षण देने की शुरुआत फरवरी में हो चुकी है।
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हजारों बेटियां बनेंगी 'आत्मनिर्भर', खिलौनों से संवारेंगी अपना भविष्य
Mon, 25 May 2020 02:32 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
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Published by: vivek shukla
Updated Mon, 25 May 2020 02:32 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला।
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शासन ने इसके लिए प्रति विद्यालय 24 हजार रुपये की धनराशि कच्चे माल, प्रशिक्षक और उपकरण के लिए आवंटित किया है। योजना के तहत कस्तूरबा में पढ़ने वाली बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के नजरिए से तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसकी खासियत यह होगी कि तैयार उत्पाद को लोकल मार्केट में कैसे बेचा जाए, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे अपने उत्पाद को जनता की मांग के मुताबिक तैयार कर सकेंगी।
इसकी खासियत यह होगी कि तैयार उत्पाद को लोकल मार्केट में कैसे बेचा जाए, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे अपने उत्पाद को जनता की मांग के मुताबिक तैयार कर सकेंगी।
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- फोटो : अमर उजाला।
सर्व शिक्षा अभियान के समन्वयक विवेक जायसवाल ने बताया कि छात्राओं को प्रशिक्षण देने के लिए विशेषज्ञ दिल्ली और लखनऊ समेत अन्य जगहों से बुलाए जाएंगे। ये छात्राओं के साथ ही विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे ताकि जरूरत के मुताबिक शिक्षक भी प्रशिक्षण देने के काबिल बन सकें।
प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा
प्रशिक्षण पूरा करने वाली छात्राओं को बाकायदा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। ताकि इस प्रशिक्षण के आधार पर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद मिल सके। मार्च में लॉकडाउन के बाद से फिलहाल ये प्रशिक्षण कार्य बंद है। मगर स्कूल खुलते ही इस कोर्स को पढ़ाई के साथ साथ पूरा किया जाएगा।
प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा
प्रशिक्षण पूरा करने वाली छात्राओं को बाकायदा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। ताकि इस प्रशिक्षण के आधार पर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद मिल सके। मार्च में लॉकडाउन के बाद से फिलहाल ये प्रशिक्षण कार्य बंद है। मगर स्कूल खुलते ही इस कोर्स को पढ़ाई के साथ साथ पूरा किया जाएगा।
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ये प्रशिक्षण दिए जाएंगे
सिलाई कटाई, कढ़ाई, पेटिंग बनाना, नर्सरी बनाना, बुक बाइडिंग, फल संरक्षण, ब्यूटी पॉर्लर, मेंहदी लगाना, मोबाइल रिपेयरिंग, विद्युत रिपेयरिंग, खिलौने बनाना, लेदर बैग, फूलों की खेती, केले की खेती, मशरूम उत्पादन और कुकिंग।
सिलाई कटाई, कढ़ाई, पेटिंग बनाना, नर्सरी बनाना, बुक बाइडिंग, फल संरक्षण, ब्यूटी पॉर्लर, मेंहदी लगाना, मोबाइल रिपेयरिंग, विद्युत रिपेयरिंग, खिलौने बनाना, लेदर बैग, फूलों की खेती, केले की खेती, मशरूम उत्पादन और कुकिंग।
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इन कस्तूरबा विद्यालयों में दिया जा रहा प्रशिक्षण
सहजनवां के कस्तूरबा विद्यालय में कला और क्रॉफ्ट वर्क, ब्रह्मपुर में नर्सरी, सरदारनगर में मशरूम उत्पादन, जंगल कौड़िया व चरगांवा में कुकिंग, भटहट व बेलघाट में नर्सरी, बांसगांव तथा खजनी में सिलाई -कढ़ाई और खोराबार में कुकिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं को स्वावलंबी बनाने के लक्ष्य से पहली बार व्यावसायिक प्रशिक्षण की शुरुआत की जा रही है। 10 कस्तूरबा विद्यालयों में प्रशिक्षण शुरू हो गया है। जल्द ही बाकी विद्यालयों में भी इसे शुरू किया जाएगा।
सहजनवां के कस्तूरबा विद्यालय में कला और क्रॉफ्ट वर्क, ब्रह्मपुर में नर्सरी, सरदारनगर में मशरूम उत्पादन, जंगल कौड़िया व चरगांवा में कुकिंग, भटहट व बेलघाट में नर्सरी, बांसगांव तथा खजनी में सिलाई -कढ़ाई और खोराबार में कुकिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं को स्वावलंबी बनाने के लक्ष्य से पहली बार व्यावसायिक प्रशिक्षण की शुरुआत की जा रही है। 10 कस्तूरबा विद्यालयों में प्रशिक्षण शुरू हो गया है। जल्द ही बाकी विद्यालयों में भी इसे शुरू किया जाएगा।